आंध्र प्रदेश में फसल बीमा का रिकॉर्ड नामांकन, गैर-कर्जदार किसानों की संख्या 1263 फीसदी बढ़ी
आंध्र प्रदेश में खरीफ 2026 के दौरान फसल बीमा कराने वाले किसानों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है. गैर-कर्जदार किसानों की भागीदारी 1,263 फीसदी बढ़कर 25.26 लाख हो गई. राज्य में 16.77 लाख हेक्टेयर खेती का बीमा हुआ है. PMFBY और RWBCIS के तहत कुल 42.44 लाख आवेदन मिले. सरकार ने इसे किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए अहम कदम बताया है.
Crop Insurance: आंध्र प्रदेश में खरीफ 2026 के दौरान फसल बीमा कराने वाले किसानों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है. मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की अपील के बाद गैर-कर्जदार किसानों की बीमा में भागीदारी 1,263 फीसदी बढ़ गई. राज्य सरकार ने अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए किसानों से हर खेती योग्य जीमीन को फसल बीमा के दायरे में लाने की अपील की थी.
पिछले खरीफ सीजन में करीब 2 लाख गैर-कर्जदार किसानों ने फसल बीमा कराया था, जबकि इस साल यह संख्या बढ़कर 25.26 लाख हो गई है. कृषि विभाग के निदेशक मनाजिर जीलानी समून के मुताबिक, 31 अगस्त तक राज्य में 23.41 लाख हेक्टेयर में खेती हुई है. इसमें से 16.77 लाख हेक्टेयर यानी करीब 72 फीसदी बोए गए क्षेत्र को फसल बीमा के दायरे में शामिल किया गया है.
खरीफ 2026 में फसल बीमा का दायरा बढ़ा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत 15 फसलों के लिए खरीफ 2026 का पंजीकरण 31 अगस्त को पूरा हो गया. वहीं, 7 फसलों को कवर करने वाली पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) के लिए पंजीकरण 15 अगस्त को बंद हो गया. खरीफ 2025 की तुलना में इस साल फसल बीमा के आंकड़ों में बड़ी बढ़ोतरी हुई है. बीमित क्षेत्र 215 फीसदी बढ़कर 7.84 लाख हेक्टेयर से 16.88 लाख हेक्टेयर हो गया. वहीं, कुल आवेदन 220 फीसदी बढ़कर 19.50 लाख से 42.44 लाख हो गए. इनमें PMFBY के तहत 32.06 लाख और RWBCIS के तहत 10.37 लाख आवेदन मिले. इस दौरान बीमा कराने वाले किसानों की संख्या भी 210 फीसदी बढ़ी है. पिछले साल 7.57 लाख किसानों का बीमा हुआ था, जो इस साल बढ़कर 15.95 लाख हो गया.
कर्जदार किसानों का बीमा लगभग स्थिर
कर्जदार किसानों की भागीदारी लगभग स्थिर रही. खरीफ 2025 में 17.49 लाख कर्जदार किसानों ने बीमा कराया था, जबकि इस साल यह संख्या बढ़कर 17.65 लाख हो गई. वहीं, गैर-कर्जदार किसानों की भागीदारी में रिकॉर्ड 1,263 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत धान सबसे आगे रहा. धान के लिए 21.46 लाख आवेदन मिले और 3.81 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा हुआ. यह वास्तविक खेती वाले क्षेत्र का 37 फीसदी है. अरहर के लिए 4.94 लाख आवेदन आए और 3.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र बीमित हुआ, जो वास्तविक क्षेत्र का 172 फीसदी है. लाल मिर्च के लिए 2.15 लाख आवेदन के साथ 1.29 लाख हेक्टेयर और मक्का के लिए 1.83 लाख आवेदन के साथ 66,962 हेक्टेयर क्षेत्र बीमा के दायरे में आया.
सरकार के जागरूकता अभियान से बढ़ा बीमा कवरेज
पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) के तहत मूंगफली का बीमा सबसे ज्यादा हुआ. मूंगफली के लिए 5.89 लाख आवेदन मिले और 3.29 लाख हेक्टेयर क्षेत्र बीमा के दायरे में आया. यह वास्तविक खेती वाले क्षेत्र का 259 फीसदी है. इसके बाद कपास का स्थान रहा. कपास के लिए 3.62 लाख आवेदन मिले और 2.13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा हुआ, जो वास्तविक क्षेत्र का 54 फीसदी है. कृषि विभाग के निदेशक मनाजिर जीलानी समून ने कहा कि सरकार के जागरूकता अभियान और जिला स्तर पर प्रशासन की सक्रियता से यह उपलब्धि हासिल हुई है. उन्होंने कहा कि फसल बीमा का यह व्यापक कवरेज मौसम में होने वाले बदलाव और अनिश्चित बारिश जैसी स्थितियों से किसानों को आर्थिक सुरक्षा देगा.