हिमाचल में सेब उत्पादन घटा, मार्केट में 79.66 लाख पेटियां पहुंचीं.. पिछले साल से आवक 45 फीसदी कम
हिमाचल प्रदेश में इस साल सेब उत्पादन 1.25 करोड़ पेटियों तक रहने का अनुमान है. 9 सितंबर तक सिर्फ 79.66 लाख पेटियां बाजार में पहुंची हैं, जो पिछले साल से 45 फीसदी कम हैं. फूल आने के समय खराब मौसम से उत्पादन घटा है. हालांकि, कम सप्लाई के बीच सेब के भाव 2,000 से 3,000 रुपये प्रति पेटी तक बने हुए हैं.
हिमाचल प्रदेश में इस साल सेब का उत्पादन काफी कम रहने की आशंका है. सेब का आधे से ज्यादा सीजन बीत चुका है, लेकिन अब तक एक करोड़ से भी कम पेटियां मंडियों में पहुंची हैं. बागवानी विभाग के मुताबिक, 9 सितंबर तक राज्य के अंदर और बाहर कुल 79.66 लाख सेब पेटियां ही बिकने के लिए पहुंची हैं. पिछले साल इसी अवधि में 1.46 करोड़ पेटियां बाजार में आ चुकी थीं.
विभाग के एक अधिकारी ने द ट्रिब्यून को बताया कि इस साल सेब की आवक पिछले साल के मुकाबले करीब 45 फीसदी कम है. इससे हिमाचल में सेब उत्पादन के कमजोर रहने की आशंका बढ़ गई है. ऐसे हिमाचल में सेब उत्पादन 1.25 करोड़ पेटियों तक रहने का अनुमान है. हिमाचल प्रदेश में सेब का सीजन आधे से ज्यादा बीत चुका है. किसानों का कहना है कि अब ज्यादा फल बागों में नहीं बचे हैं. ऐसे में पिछले साल की तुलना में सेब की आवक में बड़ी कमी को पूरा करना मुश्किल है. संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने कहा कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए राज्य में इस साल सेब का कुल उत्पादन 1.25 करोड़ पेटियों से ज्यादा रहने की संभावना नहीं है.
खराब मौसम से सेब उत्पादन में भारी गिरावट, अच्छे भाव से किसानों को राहत
हिमाचल प्रदेश में इस साल ज्यादातर सेब उत्पादकों को उत्पादन में बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ा है. फूल आने के समय खराब मौसम इसका मुख्य कारण रहा. इससे सेब की फसल को काफी नुकसान हुआ है. हालांकि, किसानों के लिए राहत की बात यह है कि बाजार में सेब के भाव स्थिर बने हुए हैं. उन्हें अपनी उपज के अच्छे दाम मिल रहे हैं. एक सेब उत्पादक ने कहा कि उत्पादन में हुआ नुकसान इतना ज्यादा है कि अच्छे भाव से भी इसकी भरपाई मुश्किल है. फिर भी बाजार में कीमतें अच्छी बनी हुई हैं और किसानों को उनकी उपज का उचित दाम मिल रहा है.
इस साल सेब उत्पादकों को गुणवत्ता के हिसाब से 2,000 से 3,000 रुपये प्रति पेटी का भाव मिल रहा है. किसानों का कहना है कि यह भाव सिर्फ कम उत्पादन के समय नहीं, बल्कि सामान्य स्थिति में भी मिलना चाहिए. संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाले सेब के लिए 1,500-2,000 रुपये प्रति पेटी का औसत भाव अब पर्याप्त नहीं है. उन्होंने कहा कि 15-20 साल पहले भी किसानों को लगभग इतना ही भाव मिलता था, जबकि इस दौरान खेती की लागत और अन्य खर्च काफी बढ़ गए हैं.
स्टोरेज की सुविधा मिले तो किसान सही समय पर बेचकर कमा सकते हैं ज्यादा
इस साल कम उत्पादन और सप्लाई के बीच सेब के भाव मजबूत बने हुए हैं. एक किसान ने कहा कि अगर उत्पादकों का सप्लाई चेन पर ज्यादा नियंत्रण हो, तो उन्हें बेहतर दाम मिल सकते हैं. किसान के मुताबिक, सेब को स्टोर करने की सुविधा और बिक्री का सही समय चुनने की क्षमता होने पर किसान अच्छे भाव हासिल कर सकते हैं. इससे उन्हें बाजार में कम कीमत पर तुरंत बिक्री करने की मजबूरी नहीं होगी.