अरहर खेती का नया तरीका, दिशा बदलते ही बढ़ेगा उत्पादन और घटेगा नुकसान

अरहर की खेती में सही दिशा अपनाने से फसल पर बड़ा असर पड़ सकता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार उत्तर से दक्षिण कतार में बुवाई करने से पौधों को समान धूप और हवा मिलती है. इससे बीमारियां कम होती हैं और पैदावार बढ़ सकती है. किसान इस वैज्ञानिक तकनीक से बेहतर लाभ पा सकते हैं.

नोएडा | Updated On: 4 Jul, 2026 | 06:02 PM

Arhar Farming: खरीफ सीजन में अरहर की बुवाई शुरू हो चुकी है. अधिकांश किसान अच्छी किस्म के बीज, खाद और सिंचाई पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन बुवाई की दिशा को नजरअंदाज कर देते हैं. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, अरहर की कतारों की सही दिशा फसल की बढ़वार, रोग नियंत्रण और उत्पादन पर सीधा असर डालती है. यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से उत्तर से दक्षिण दिशा में कतार बनाकर बुवाई करें, तो फसल को बेहतर धूप, हवा और पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है.

उत्तर से दक्षिण दिशा में करें अरहर की बुवाई

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, अरहर की बुवाई  हमेशा उत्तर से दक्षिण दिशा में कतार बनाकर करनी चाहिए. इस दिशा में पौधों को सुबह से शाम तक दोनों ओर से समान रूप से सूर्य का प्रकाश मिलता है. इससे पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बेहतर होती है और उनका विकास संतुलित रहता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि सही दिशा में बुवाई करने से पौधों की शाखाएं अधिक निकलती हैं, उनकी बढ़वार अच्छी होती है और फसल मजबूत बनती है. यही कारण है कि वैज्ञानिक भी कतारों की दिशा को खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं.

धूप और हवा से कम होता है बीमारियों का खतरा

अरहर की फसल में नमी अधिक समय तक रहने पर फफूंदजनित रोग  तेजी से फैल सकते हैं. लेकिन उत्तर से दक्षिण दिशा में कतारें बनाने से खेत में हवा का आवागमन बेहतर रहता है. इससे अतिरिक्त नमी जल्दी सूख जाती है और पौधों में रोग लगने की संभावना कम हो जाती है. इसके साथ ही, सभी पौधों को बराबर धूप मिलने से उनका विकास एक समान होता है. कमजोर पौधों की संख्या घटती है और पूरी फसल अधिक स्वस्थ दिखाई देती है. इससे कीट और रोगों का प्रकोप भी काफी हद तक कम हो सकता है.

सिंचाई और दवा छिड़काव भी होता है आसान

सही दिशा में कतार बनाकर बुवाई करने का एक बड़ा फायदा यह भी है कि खेत में सिंचाई  करना आसान हो जाता है. पानी सभी कतारों तक समान रूप से पहुंचता है, जिससे न तो जलभराव की समस्या होती है और न ही पानी की बर्बादी. इसके अलावा खरपतवार नियंत्रण, कीटनाशकों और फफूंदनाशकों का छिड़काव भी आसानी से किया जा सकता है. इससे खेती की लागत कम होती है और फसल प्रबंधन अधिक प्रभावी बनता है.

छोटी सावधानी से मिल सकता है बेहतर उत्पादन

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार का कहना है कि किसान केवल अच्छे बीज और उर्वरकों पर ही ध्यान न दें, बल्कि बुवाई की दिशा जैसी वैज्ञानिक तकनीकों  को भी अपनाएं. यदि दिशा का ध्यान रखकर अरहर की बुवाई की जाए, तो पौधों का विकास बेहतर होता है, रोगों का खतरा कम रहता है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. खरीफ सीजन में यह छोटी-सी तकनीक किसानों के लिए बड़ा फायदा साबित हो सकती है. सही दिशा में कतार बनाकर बुवाई करने से कम लागत में बेहतर फसल तैयार की जा सकती है और खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है.

Published: 4 Jul, 2026 | 08:00 PM

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