ब्रह्मपुत्र की बाढ़ में डूबे किसानों के अरमान.. 24 हजार हेक्टेयर फसलें चौपट, पानी में घिरे 1800 गांव
Assam Flood Crisis : असम में भयंकर बाढ़ के कहर से 41 लोगों की जान चली गई है. जबकि, कई लोग लापता हैं और हजारों की संख्या में लोग बेघर हो गए हैं. वहीं, किसानों की फसलें चौपट हो गई हैं और मवेशियों के लापता होने से वे आर्थिक संकट की चपेट में आ गए हैं.
असम में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. 25 जिलों के 1,800 से ज्यादा गांवों में 9 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. वहीं, अब तक 41 लोगों की जान जा चुकी है और हजारों मवेशी बह गए हैं. जबकि, 24 हजार हेक्टेयर जमीन पर खड़ी फसलें पानी में डूब गई हैं. सर्वाधिक नुकसान चाय किसानों के साथ जूट और बांस की खेती करने वालों को हुआ है. जबकि, धान और पारंपरिक सब्जी फसलें बाढ़ में बह गई हैं. कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि ग्रामीणों तक राहत सामग्री नहीं पहुंचाने जाने और कृषि उपकरण समेत अन्य सामग्री जल्दी पहुंचाने की अपील की, ताकि कृषि गतिविधियां शुरू की जा सकें. कांग्रेस सांसद ने हिमंता सरकार को जमकर खरी-खोटी सुनाई है.
ब्रह्मपुत्र की बाढ़ की चपेट में 12 जिले
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार पूर्वोत्तर राज्य की कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. ब्रह्मपुत्र नदी की बाढ़ की चपेट में राज्य के 12 जिले हैं. बाढ़ के कारण 6.50 लाख से अधिक लोग इससे प्रभावित हुए हैं. अधिकारियों ने बताया कि सेना, वायुसेना और अन्य एजेंसियां राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं. असम के कई जिलों में बाढ़ और भूस्खलन से दूरदराज इलाकों में फंसे लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है.
बाढ़ की चपेट में आकर 41 लोगों की मौत
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से बाढ़ संबंधी बुलेटिन के अनुसार बीते 24 घंटे के दौरान बाढ़ संबंधी घटनाओं में 10 लोगों की मौत हो गई जिससे अब तक जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है. 11 जिलों शिवसागर, चराइदेव, धेमाजी, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, होजाई, जोरहाट, कामरूप, कामरूप महानगर, कार्बी आंगलोंग और नागांव में 6,53,100 से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं.
24 हजार हेक्टेयर में खड़ीं फसलें ब्रह्मपुत्र की बाढ़ में डूबीं
असम में बाढ़ में 11 जिलों में 24,897.27 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न है, जिससे किसानों की धान सहित कई खरीफ फसलें बुरी तरह प्रभावित और खराब हुई है. यह स्थिति ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों में जलस्तर बढ़ने और कई तटबंधों के टूटने के कारण उत्पन्न हुई है. विभिन्न जिलों में आई बाढ़ के कारण लगातार फसल और संपत्ति का नुकसान हो रहा है. सबसे ज्यादा किसानों को नुकसान हुआ है. चाय बागान, जूट की फसल, बांस, धान और सब्जियों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है.
राहत सामग्री पहुंचाने में देरी, कृषि कार्य रुके – गौरव गोगोई
असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि राज्य के बाढ़ प्रभावित लोगों तक आपात स्थिति में राशन, पेयजल और अन्य आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाने में भारी देरी हो रही है. उन्होंने कहा कि असम एक भीषण मानवीय संकट का सामना कर रहा है. कई लोग लापता हैं और हजारों लोग बेघर हो चुके हैं. सांसद ने आरोप लगाया कि आपातकालीन राशन, स्वच्छ पेयजल, फिनाइल, कपड़े और ब्लीचिंग पाउडर जैसी आवश्यक सामग्री पहुंचाने में भारी देरी हो रही है. उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि वह आवश्यक उपकरणों के साथ तकनीकी विशेषज्ञों का एक दल भेजे, ताकि लोगों को अपने घरों का पुनर्निर्माण करने और कृषि गतिविधियां फिर से शुरू करने में मदद मिल सके.
The destruction caused by #AssamFloods is of an unimaginable scale. Over 9 lakh people across 1,800+ villages in 25 districts have been impacted by this calamity. We have lost 41 precious lives till date and thousands of livestock has been washed away.
Cloudbursts upstream,… pic.twitter.com/hhBauSW357
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) July 23, 2026
बाढ़ में घिरे 1800 गांव, हजारों मवेशी बहे
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि Assam Floods से हुई तबाही का पैमाना कल्पना से परे है. इस आपदा से 25 जिलों के 1,800 से ज्यादा गांवों में 9 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. अब तक हमने 41 कीमती जानें गंवाई हैं और हजारों मवेशी बह गए हैं. हमने 148 से ज्यादा राहत शिविर बनाए हैं, जहां अभी लगभग 30,000 लोग शरण लिए हुए हैं. हमारी टीमें प्रभावित परिवारों तक भोजन, पीने का पानी और अन्य जरूरी सामान पहुंचा रही हैं. सिर्फ सबसे बुरी तरह प्रभावित जिलों में ही 3,00,000 किलोग्राम से ज्यादा चावल और राहत का अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जा चुका है, और भी सामान भेजा जा रहा है.