खरीफ सीजन में कौन सी धान की वैरायटी देगी ज्यादा मुनाफा? जानें किसानों के लिए सबसे फायदेमंद किस्में
Paddy Farming 2026: खरीफ सीजन शुरू होने से पहले किसान ऐसी धान की किस्मों की तलाश कर रहे हैं, जो कम पानी में ज्यादा उत्पादन और बेहतर मुनाफा दे सकें. कृषि एक्सपर्ट्स के अनुसार PR-126, PR-131, PR-113 जैसी वैरायटी किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही हैं. इनमें कुछ किस्में कम समय में तैयार हो जाती हैं, कम पानी लेती हैं और बीमारियों का असर भी कम होता है.
Best Paddy Varieties India: खरीफ सीजन शुरू होते ही किसानों की सबसे बड़ी चिंता होती है कि इस बार कौन सी धान की किस्म लगाई जाए, जिससे कम लागत में ज्यादा उत्पादन और बेहतर कमाई हो सके. बदलते मौसम, पानी की कमी और बढ़ती खेती लागत के बीच अब किसान ऐसी वैरायटी की तलाश कर रहे हैं जो जल्दी तैयार हो, कम पानी ले और बाजार में अच्छे दाम दिला सके.
धान की खेती में सही बीज का चुनाव ही सबसे बड़ा फायदा दिला सकता है. अगर किसान अपनी जमीन और मौसम के अनुसार सही किस्म चुनते हैं, तो उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ सकते हैं. इस समय PR-126, PR-131, PR-113, PB-1692 और पूसा बासमती 1509 जैसी वैरायटी किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं.
PR-126: कम समय और कम पानी में ज्यादा फायदा
अगर किसान ऐसी धान की किस्म चाहते हैं जो जल्दी पक जाए और पानी भी कम ले, तो PR-126 एक बेहतरीन विकल्प मानी जा रही है. यह किस्म रोपाई के लगभग 93 से 95 दिनों में तैयार हो जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पारंपरिक किस्मों की तुलना में 20 से 25 प्रतिशत तक कम पानी लगता है. इसके पौधे छोटे और मजबूत होते हैं, जिससे तेज हवा और बारिश में फसल गिरने का खतरा कम रहता है.
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इस वैरायटी में पराली भी कम निकलती है, जिससे खेत अगली फसल के लिए जल्दी तैयार हो जाता है. किसान धान के बाद आसानी से गेहूं, आलू या मटर की खेती कर सकते हैं. इसकी पैदावार लगभग 30 से 35 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच जाती है.
PR-131: बीमारी कम, उत्पादन ज्यादा
कई किसान ऐसी धान लगाना चाहते हैं जिसमें बीमारी कम लगे और दवा का खर्च भी कम आए. PR-131 इसी वजह से तेजी से लोकप्रिय हो रही है. यह किस्म करीब 110 दिनों में तैयार हो जाती है और लगभग 31 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन देती है. इसमें बैक्टीरियल ब्लाइट जैसी बीमारी का असर कम देखने को मिलता है.
इसके पौधे मजबूत होते हैं, इसलिए फसल गिरने की समस्या भी कम रहती है. इसके लंबे और साफ दानों की बाजार में अच्छी मांग रहती है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलती है.
PR-113: किसानों की भरोसेमंद किस्म
PR-113 लंबे समय से किसानों के बीच भरोसेमंद वैरायटी मानी जाती है. यह किस्म लगभग 140 से 142 दिनों में पककर तैयार होती है और 28 से 30 क्विंटल प्रति एकड़ तक उत्पादन देती है. इसके दाने मोटे और भारी होते हैं, जिससे मिलिंग अच्छी होती है. साथ ही इसके पौधों में बीमारी सहने की क्षमता भी बेहतर मानी जाती है. जिन किसानों को मजबूत और स्थिर फसल चाहिए, उनके लिए यह किस्म अच्छा विकल्प हो सकती है.
PB-1692: कम समय में तैयार होने वाली शानदार बासमती
बासमती धान की खेती करने वाले किसानों के लिए PB-1692 काफी फायदेमंद मानी जा रही है. यह किस्म करीब 110 से 115 दिनों में तैयार हो जाती है. इसके दाने लंबे, पतले और खुशबूदार होते हैं, जिनकी बाजार में काफी मांग रहती है. इसकी पैदावार 20 से 24 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच सकती है. इसके पौधे मध्यम ऊंचाई के होते हैं, जिससे फसल गिरने की संभावना कम रहती है.
पूसा बासमती 1509: कम पानी में ज्यादा कमाई
पूसा बासमती 1509 उत्तर भारत के किसानों के बीच सबसे लोकप्रिय बासमती किस्मों में से एक है. यह लगभग 115 से 120 दिनों में तैयार हो जाती है और दूसरी बासमती किस्मों के मुकाबले कम पानी लेती है.
इसके पौधे छोटे और मजबूत होते हैं, इसलिए गिरने की समस्या कम होती है. जल्दी कटाई होने के कारण किसान समय पर गेहूं की बुवाई भी कर लेते हैं. इसकी पैदावार 20 से 25 क्विंटल प्रति एकड़ तक पहुंच जाती है और बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है.
बदलते मौसम में सही वैरायटी चुनना जरूरी
कृषि अधिकारियों का कहना है कि, अब खेती में वही किसान ज्यादा फायदा कमा पाएंगे जो बदलते मौसम और पानी की कमी को ध्यान में रखते हुए सही किस्म का चुनाव करेंगे. कम पानी, कम लागत और ज्यादा उत्पादन देने वाली वैरायटी भविष्य की खेती के लिए बेहतर मानी जा रही हैं. सही बीज का चयन न सिर्फ उत्पादन बढ़ाता है, बल्कि किसानों की कमाई को भी कई गुना तक बढ़ा सकता है.
खरीफ सीजन में धान की सही वैरायटी चुनना किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. PR-126 और पूसा बासमती 1509 जैसी कम पानी वाली किस्में जहां लागत घटाने में मदद कर रही हैं, वहीं PR-131 और PB-1692 जैसी वैरायटी बेहतर उत्पादन और बाजार मूल्य दिला रही हैं.