भाभा परमाणु केंद्र ने 15 फसलों की 72 उन्नत किस्में विकसित कीं, रेडिएशन तकनीक का इस्तेमाल

Bhabha Atomic Research Centre Crops varieties: भाभा परमाणु केंद्र ने 15 फसलों की 72 किस्में विकसित की हैं. इनमें मूंगफली, धान, सरसों समेत कई फसलें शामिल हैं. इन किस्मों को खास रेडिएशन तकनीक के जरिए विकसित किया गया है, जो किसी भी रोग और मौसम स्थितियों से लड़ने और झेलने में सक्षम हैं.

नोएडा | Published: 12 Aug, 2026 | 08:13 PM

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) ने रेडिएशन तकनीक और हाइब्रिड ब्रीडिंग की मदद से अलग-अलग फसलों की 72 उन्नत किस्में विकसित की हैं. इन किस्मों को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के सहयोग से देश में व्यावसायिक खेती के लिए जारी किया गया है. सबसे ज्यादा 10 मूंगफली की किस्में और धान की 10 किस्में विकसित की गई हैं. इन किस्मों में अधिक उत्पादन, बड़े आकार के बीज, कम समय में पकने और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने की खासियत हैं.

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि अणु ऊर्जा विभाग के तहत भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र (बीएआरसी) ने रेडिएशन तकनीक और अन्य विधियों की मदद से नई किस्में विकसित की हैं, जिन्हें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की मदद से देशभर में बोया जा रहा है और किसानों की ओर से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. उन्होंने बताया कि इन किस्मों को उत्पादन, क्वालिटी समेत कई पैमानों पर कई सालों तक परखा गया है और शोध किया गया है. नतीजे संतोषजनक मिलने के बाद ही इन्हें आईसीआर को सौंपकर किसानों तक पहुंचाया गया है.

परमाणु केंद्र ने 15 फसलों की 72 किस्में विकसित कीं

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भाभा परमाणु केंद्र ने 15 फसलों की 72 किस्में विकसित की हैं. इनमें मूंगफली की 17, धान की 10, मूंग और सरसों की 9-9, उड़द की 8 और अरहर की 5 किस्में शामिल हैं. इसके अलावा ज्वार, लोबिया, गेहूं, सोयाबीन, केला, तिल, अलसी, सूरजमुखी और जूट की भी उन्नत किस्में विकसित की गई हैं. परमाणु केंद्र की इन किस्मों को ट्रॉम्बे किस्में या ट्रॉम्बे फसलें (trombay climate resilient crops) भी कहा जाता है. इन किस्मों में अधिक उत्पादन, बड़े आकार के बीज, कम समय में पकने और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने जैसे गुण विकसित किए गए हैं. इनमें सूखा, अधिक गर्मी और मिट्टी में लवणता सहने की क्षमता के साथ-साथ कई रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता भी शामिल है.

रेडिएशन तकनीक से फसलों में आनुवांशिक बदलाव

सरकार के अनुसार रेडिएशन के जरिए इन फसलों में किए गए आनुवंशिक बदलाव से कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पाया गया है. व्यावसायिक खेती के लिए जारी करने से पहले इन किस्मों का कई वर्षों तक अलग-अलग स्थानों पर परीक्षण किया जाता है और मौजूदा किस्मों से बेहतर प्रदर्शन करने के बाद ही इन्हें मंजूरी दी जाती है. किसानों तक इन उन्नत किस्मों को पहुंचाने के लिए परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) कई पहल कर रहा है. इसके तहत राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर ट्रॉम्बे किस्मों के गुणवत्तापूर्ण बीजों का बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण किया जा रहा है.

ट्रॉम्बे किस्मों के बीज किसानों को पहुंचा रहा ऊर्जा विभाग

परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) ने कहा है कि किसानों को अधिक उत्पादन देने वाली और बदलती जलवायु अनुकूल फसल किस्में उपलब्ध कराना है, ताकि कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ सूखा, गर्मी और अन्य मौसम संबंधी चुनौतियों से निपटने में भी मदद मिल सके. कृषि विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर किसानों तक उन्नत फसल किस्मों की जानकारी और तकनीक पहुंचाने और ट्रेनिंग देने का भी काम कर रहा है. इसके अलावा खेतों में प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और उन्नत ट्रॉम्बे किस्मों के बीज मिनीकिट किसानों को बांटे जाते हैं. इन कार्यक्रमों के जरिए हजारों किसानों को फायदा पहुंचाने और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोगों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है.

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