पौधों में बोरॉन की कमी बन सकती है बड़ा खतरा! समय रहते नहीं संभले तो घट जाएगी पैदावार, एक्सपर्ट से जानें टिप्स

Boron Deficiency In Wheat: गेहूं की फसल में बोरॉन नामक सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी होने पर बालियां टेढ़ी हो सकती हैं और दानों का विकास प्रभावित हो जाता है. इससे फसल की पैदावार में 10 से 30 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है. समय रहते बोरेक्स या बोरॉन युक्त उर्वरकों का उपयोग करके इस समस्या को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है.

नोएडा | Published: 14 Mar, 2026 | 10:52 AM

Gehun Ki Kheti: भारत में गेहूं प्रमुख खाद्यान्न फसलों में से एक है और देश की खाद्य सुरक्षा में इसकी अहम भूमिका है. पिछले कुछ वर्षों में उन्नत किस्मों, आधुनिक तकनीकों और बेहतर उर्वरक प्रबंधन के कारण गेहूं की पैदावार में काफी बढ़ोतरी हुई है. इसके बावजूद कई क्षेत्रों में किसानों को पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण समस्या है पौधों में बोरॉन की कमी. इसकी वजह से गेहूं की बालियों के टेढ़ी या मुड़ने लगती है.

बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि, कई बार किसान गेहूं की बालियों के टेढ़ा या मुड़ जाने को किसी रोग या कीट का असर समझ लेते हैं, जबकि यह बोरॉन की कमी का संकेत होता है.

गेहूं की फसल में बोरॉन का महत्व

बोरॉन एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है जो पौधों की वृद्धि और विकास में अहम भूमिका निभाता है. यह पौधों में कोशिका विभाजन, फूल बनने की प्रक्रिया और दानों के सही विकास में मदद करता है. इसके अलावा बोरॉन पौधों में पोषक तत्वों के संतुलित परिवहन और परागण की प्रक्रिया को भी मजबूत बनाता है. इसलिए इसकी कमी होने पर पौधों का सामान्य विकास प्रभावित होने लगता है और फसल की गुणवत्ता भी घट जाती है.

बोरॉन की कमी के प्रमुख लक्षण

गेहूं की फसल में बोरॉन की कमी होने पर कुछ विशेष लक्षण दिखाई देते हैं, जिनकी मदद से किसान समय रहते समस्या को पहचान सकते हैं.

बोरॉन की कमी के प्रमुख कारण

खेती में कई कारणों से मिट्टी में बोरॉन की उपलब्धता कम हो सकती है.

फसल की पैदावार पर असर

बोरॉन की कमी का सीधा असर गेहूं की उपज और गुणवत्ता पर पड़ता है.

इन सभी कारणों से कुल मिलाकर 10 से 30 प्रतिशत तक उपज में कमी आ सकती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

बोरॉन की कमी का समाधान

यदि खेत में बोरॉन की कमी की पुष्टि हो जाए तो किसान कुछ आसान उपाय अपनाकर इसे नियंत्रित कर सकते हैं.

गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए केवल बड़े पोषक तत्व ही नहीं बल्कि सूक्ष्म पोषक तत्व भी उतने ही जरूरी हैं. बोरॉन की कमी को समय पर पहचानकर उचित प्रबंधन किया जाए तो फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को बेहतर बनाया जा सकता है.

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