आम के पेड़ों से झड़ रहे हैं फल? बस ये 2 दवाएं कर दें स्प्रे, टिकोले बनेंगे बड़े और पैदावार होगी दोगुनी

Mango Farming Tips: मार्च-अप्रैल का समय आम की खेती के लिए बेहद अहम होता है. इस दौरान पेड़ों में बौर के बाद फल बनने की प्रक्रिया शुरू होती है, लेकिन कई बार फल झड़ने की समस्या आ जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार इमिडाक्लोप्रिड और प्लानोफिक्स दवा का सही मात्रा में छिड़काव करने से कीटों से बचाव होता है, फल गिरना कम होता है और पैदावार बेहतर मिलती है.

Isha Gupta
नई दिल्ली | Published: 12 Mar, 2026 | 02:41 PM

Mango Farming: भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है और इसकी खेती देश के कई राज्यों में बड़े पैमाने पर की जाती है. आम की बागवानी किसानों के लिए अच्छी आय का स्रोत भी मानी जाती है. लेकिन कई बार बौर आने के बाद फल बनने की प्रक्रिया के दौरान फल झड़ने या छोटे रह जाने की समस्या सामने आ जाती है, जिससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है.

बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह ने किसान इंडिया (Kisan India) को बताया कि अगर सही समय पर बाग की देखभाल की जाए और कुछ जरूरी उपाय अपनाए जाएं, तो इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है.

मार्च-अप्रैल का समय क्यों है अहम

आम की खेती करने वाले किसानों के लिए मार्च से अप्रैल का महीना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस समय आम के पेड़ों पर बौर आने के बाद फल बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार, गर्मी का मौसम आम की बागवानी के लिए सबसे अनुकूल होता है. इस दौरान अगर किसान पौधों की सही तरीके से देखभाल करें तो फलन बेहतर होता है और पैदावार भी बढ़ती है. हालांकि इस समय थोड़ी सी भी लापरवाही किसानों को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए बाग का नियमित निरीक्षण और सही प्रबंधन जरूरी है.

फल झड़ने की समस्या से कैसे बचें

आम के पेड़ों में बौर आने के बाद जब छोटे-छोटे फल बनने लगते हैं, तो कई बार ये फल पौधे से गिरने लगते हैं. इसे आम भाषा में फल झड़ने की समस्या कहा जाता है. इससे बचने के लिए विशेषज्ञ किसानों को सलाह देते हैं कि जैसे ही पौधों पर टिकोले (छोटे फल) दिखाई देने लगें, उसी समय जरूरी कीटनाशकों और ग्रोथ रेगुलेटर का छिड़काव करना चाहिए.

इन दवाओं का करें सही उपयोग

डॉ. एस.के. सिंह के मुताबिक, आम के पौधों में फल बनने की शुरुआत के दौरान कुछ दवाओं का छिड़काव काफी फायदेमंद होता है.

  • इमिडाक्लोप्रिड: 6 मिली दवा को 15 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें.
  • प्लानोफिक्स: 1 मिली दवा को 4 से 5 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें.

इन दवाओं के छिड़काव से आम के पौधों पर लगने वाले कीटों से बचाव होता है. साथ ही फल गिरने की समस्या कम होती है और फल का आकार भी बेहतर होता है.

पौधों की नियमित निगरानी भी जरूरी

आम के बाग में सिर्फ दवा का छिड़काव ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि पौधों की नियमित निगरानी भी जरूरी होती है. किसानों को समय-समय पर बाग का निरीक्षण करना चाहिए और अगर कहीं कीट या रोग के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नियंत्रण के उपाय करने चाहिए.

इसके अलावा बाग में साफ-सफाई बनाए रखना और पौधों को पर्याप्त पोषण देना भी जरूरी है, जिससे उनकी वृद्धि अच्छी हो सके.

सही देखभाल से बढ़ेगा उत्पादन

विशेषज्ञों के अनुसार अगर किसान मार्च और अप्रैल के दौरान कीट नियंत्रण, पोषण प्रबंधन और नियमित देखभाल पर ध्यान दें, तो आम के फलों का आकार बेहतर होगा और पैदावार भी बढ़ेगी. इस तरह थोड़ी सी सावधानी और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान अपने आम के बाग से अच्छी गुणवत्ता वाले फल और ज्यादा मुनाफा हासिल कर सकते हैं.

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