गेहूं सिंचाई के बाद भूलकर भी नहीं करें इस खाद का छिड़काव, फसल को होगा नुकसान.. करें ये काम

किसानों को गेहूं में सही समय और सही प्रकार की खाद का इस्तेमाल करना चाहिए. डीएपी केवल बुवाई के समय ही डालना चाहिए, जबकि यूरिया पहली सिंचाई के 21- 25 दिन बाद छिड़कें. गलत या अधिक खाद से फसल को नुकसान और पैदावार में गिरावट हो सकती है, जिससे आर्थिक नुकसान हो सकता है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 4 Jan, 2026 | 04:40 PM

Wheat Irrigation: बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और पंजाब सहित कई राज्यों में किसान गेहूं की दूसरी सिंचाई कर रहे हैं. इस दौरान कई किसान खेत में खाद का छिड़काव भी कर रहे हैं. लेकिन किसानों को खाद का छिड़काव करने से पहले यह खबर जरूर पढ़ लेनी चाहिए. क्योंकि एक्सपर्ट का कहना है कि जरूरत से ज्यादा और गलत खाद का छिड़काव करने पर फसल को नुकसान पहुंचता है. इससे पैदावार में गिरावट भी आती है. ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि गेहूं की फसल में बेहतरीन फुटाव और अच्छी पैदावार के लिए खाद का सही चुनाव और सही समय पर इस्तेमाल बेहद जरूरी है. अगर किसान खाद का छिड़काव  करते समय सही वक्त का चुनाव नहीं करते हैं, तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. अक्सर उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में किसान सिंचाई के बाद डीएपी (DAP) छिड़कते हैं, लेकिन कृषि विशेषज्ञ इसे गलत मानते हैं. ऐसा करने से न सिर्फ खाद का नुकसान होता है, बल्कि मिट्टी और फसल की जरूरत के हिसाब से भी यह सही नहीं है.

फास्फोरस मिट्टी में स्थिर हो जाता है

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, डीएपी एक बेसल डोज खाद है, जिसे बुवाई के समय बीज के पास डालना चाहिए. सिंचाई के बाद ऊपर से छिड़कने पर फास्फोरस मिट्टी में स्थिर हो जाता है और जड़ों तक नहीं पहुंच पाता, जिससे फसल पोषक तत्व नहीं ले पाती और खाद व्यर्थ चली जाती है. इसलिए डीएपी का अधिकतम लाभ लेने का सही समय सिर्फ बुवाई के दौरान है.

50-55 किलो डीएपी प्रति एकड़ पर्याप्त होता है

डीएपी (DAP) को हमेशा बुवाई के समय ही इस्तेमाल करना चाहिए. इसे बीज से 2-3 सेंटीमीटर नीचे डालें, ताकि जड़ें विकसित होते ही सीधे फास्फोरस ले सकें. गेहूं के लिए सामान्यत: 50-55 किलो डीएपी प्रति एकड़ पर्याप्त होता है. किसान को सिंचाई के बाद डीएपी नहीं डालना चाहिए. पहली सिंचाई के 21-25 दिन बाद यूरिया का छिड़काव करना सबसे असरदार होता है.

सिंचाई के बाद नाइट्रोजन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है

गेहूं को सिंचाई के बाद नाइट्रोजन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है. किसान इसे 40-45 किलो प्रति एकड़ की दर से इस्तेमाल करें. अगर मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी ज्यादा हो, तो यूरिया के साथ 5-10 किलो जिंक भी मिलाकर डाल सकते हैं. वहीं, अगर बुवाई के समय डीएपी  नहीं डाली गई थी, तो सिंचाई के बाद सीधे डीएपी छिड़कने के बजाय NPK 19:19:19 का छिड़काव करना सही रहता है.

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Published: 4 Jan, 2026 | 04:35 PM

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