खुशखबरी! कल जारी होंगे 262 करोड़, हर परिवार को मिलेंगे 20000 रुपये.. जानिए क्या है योजना

सरकार के इस सक्रिय कदम से समुद्र में जान गंवाने वाले मछुआरों के परिवारों को आर्थिक संकट में जाने से बचाने में मदद मिली है. सीधे आर्थिक सहयोग के साथ-साथ सरकार समुद्री शैवाल (सीवीड) की खेती को भी बढ़ावा दे रही है, ताकि मछुआरों की आय के नए स्रोत बन सकें और उनका जीवन बेहतर हो सके.

नोएडा | Updated On: 19 May, 2026 | 04:31 PM

Andhra Pradesh News: आंध्र प्रदेश में लगातार दूसरे साल ‘मत्स्यकारुला सेवा’ योजना के तहत मछुआरों को आर्थिक सहायता देने की तैयारी पूरी हो गई है. मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू बुधवार को नेल्लोर जिले के कावली मंडल के तुम्मलापेंटा गांव में आयोजित कार्यक्रम में 1,30,796 मछुआरा परिवारों के खातों में कुल 262 करोड़ रुपये जारी करेंगे. इस योजना के तहत प्रत्येक परिवार को 20,000 रुपये सीधे बैंक खाते में दिए जाएंगे. यह सहायता 15 अप्रैल से 14 जून तक लागू 61 दिनों के मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के दौरान परिवारों के गुजारे के लिए दी जा रही है. इस अवधि में समुद्री जीवों के प्रजनन के कारण समुद्र में मछली पकड़ने पर रोक रहती है.

एनडीए गठबंधन सरकार ने यह योजना मछली पकड़ने पर हर साल लगने वाले प्रतिबंध के दौरान मछुआरों को आर्थिक  राहत देने के लिए शुरू की थी. कम समय में ही यह योजना तटीय आंध्र प्रदेश के मछुआरा परिवारों के लिए बड़ी मदद बन गई है. पिछले साल इस योजना के तहत 1,21,433 परिवारों को 243 करोड़ रुपये की सहायता दी गई थी, जबकि इस साल लाभार्थियों की संख्या बढ़कर करीब 1.31 लाख परिवारों तक पहुंच गई है.

हर परिवार को मिलेंगे 20,000 रुपये

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ दो साल में सरकार ने मछली पकड़ने पर प्रतिबंध के दौरान मछुआरों को कुल 505 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी है. अधिकारियों ने बताया कि पिछली सरकार हर परिवार को केवल 10,000 रुपये देती थी, जिससे कई मछुआरा परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था. आर्थिक चुनौतियों के बावजूद मौजूदा सरकार ने मछुआरा परिवारों को दी जाने वाली सहायता राशि 10,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये कर दी. सरकार का कहना है कि इससे कमजोर वर्गों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की कोशिश की गई है.

कुल 3.15 करोड़ रुपये की सहायता दी गई

लाभार्थियों की बढ़ती संख्या और सहायता राशि में बढ़ोतरी यह दिखाती है कि सरकार मछुआरा समुदाय  के साथ मजबूती से खड़ी है. सरकार ने समुद्र में जान गंवाने वाले मछुआरों के परिवारों को समय पर मुआवजा देने की भी व्यवस्था की है. वर्ष 2024-25 में 63 मामलों में कुल 3.15 करोड़ रुपये की सहायता दी गई. वहीं, 2025-26 में लंबित 113 दावों का निपटारा करते हुए 5.65 करोड़ रुपये जारी किए गए.

आर्थिक संकट में जाने से बचाने में मदद मिली

सरकार के इस सक्रिय कदम से समुद्र में जान गंवाने वाले मछुआरों के परिवारों को आर्थिक संकट में जाने से बचाने में मदद मिली है. सीधे आर्थिक सहयोग के साथ-साथ सरकार समुद्री शैवाल (सीवीड) की खेती को भी बढ़ावा दे रही है, ताकि मछुआरों की आय के नए स्रोत बन सकें और उनका जीवन बेहतर हो सके. इससे सरकार की इस क्षेत्र के लिए लंबी अवधि की योजना भी साफ दिखाई देती है.

मछुआरा परिवारों से सीधे बातचीत करेंगे CM

सार्वजनिक कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू दोपहर 1:15 बजे मछुआरा परिवारों से सीधे बातचीत करेंगे और उनकी समस्याओं व अनुभवों को सुनेंगे. इसके बाद दोपहर 2 बजे वह तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे, जिसमें संगठन और जनकल्याण योजनाओं पर चर्चा होगी. उनका कार्यक्रम शाम 4:45 बजे अमरावती लौटने के साथ समाप्त होगा. सरकार का कहना है कि लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने, सहायता राशि दोगुनी करने और मुआवजा दावों का तेजी से निपटारा करने जैसे कदमों से मछुआरा समुदाय को मजबूत समर्थन दिया जा रहा है. यह पहल न सिर्फ प्रतिबंध के दौरान तत्काल राहत देती है, बल्कि तटीय आंध्र प्रदेश में मछुआरों की आजीविका को लंबे समय तक मजबूत करने की दिशा में भी अहम कदम मानी जा रही है.

Published: 19 May, 2026 | 04:12 PM

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