क्यों सिकुड़ रहे हैं आम्रपाली आम? किसानों की बढ़ी टेंशन, कृषि वैज्ञानिक की जानें सलाह
Mango Fruit Size Problem: पिछले कुछ वर्षों में आम, खासकर आम्रपाली किस्म के फलों का आकार छोटा होता जा रहा है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इसके पीछे बढ़ती गर्मी, अनियमित मौसम, पानी की कमी, असंतुलित खाद और घने बाग मुख्य वजह हैं. ज्यादा तापमान के कारण फलों का विकास रुक जाता है और वे जल्दी पकने लगते हैं.
Amrapali Mango: आम को भारत में फलों का राजा कहा जाता है. इसका स्वाद, खुशबू और मिठास लोगों को बहुत पसंद आती है. आम की खेती से लाखों किसानों की कमाई भी होती है. लेकिन पिछले कुछ सालों में किसानों और ग्राहकों ने एक बड़ा बदलाव देखा है. अब आम पहले जितने बड़े नहीं रहे. खासकर ‘आम्रपाली’ किस्म के आम का आकार तेजी से छोटा हो रहा है. कई बागों में आम 20 से 50 प्रतिशत तक छोटे पाए गए हैं.
बिहार स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार, इसके पीछे सिर्फ पानी या खाद की कमी नहीं, बल्कि बदलता मौसम, ज्यादा गर्मी और बाग की सही देखभाल न होना भी बड़ी वजह है.
बढ़ती गर्मी का आम पर सीधा असर
विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले कुछ सालों में तापमान लगातार बढ़ रहा है. बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और गंगा के मैदानी इलाकों में अप्रैल से जून के बीच तेज लू और बहुत ज्यादा गर्मी देखने को मिली है. कई जगह तापमान 44 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया. इसका सीधा असर आम के फलों पर पड़ा है. ज्यादा गर्मी की वजह से फल जल्दी पकने लगते हैं और उनका सही विकास रुक जाता है. इसी कारण आम बाहर से तो अच्छे और रंगीन दिखते हैं, लेकिन उनका आकार छोटा रह जाता है और अंदर की गुठली (बीज) बड़ी दिखाई देती है.
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आम्रपाली किस्म में ज्यादा क्यों दिख रही समस्या?
आम्रपाली आम देश की सबसे लोकप्रिय किस्मों में से एक है. इसका पेड़ छोटा होता है, लेकिन इसमें बहुत ज्यादा फल लगते हैं. इसी वजह से किसान इसे सघन बागवानी में खूब पसंद करते हैं.
लेकिन अब यही इसकी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. एक पेड़ पर जरूरत से ज्यादा फल लगने पर पौधे की ताकत सभी फलों में बंट जाती है. हर फल को पूरा पोषण नहीं मिल पाता, जिससे उनका आकार छोटा रह जाता है. कई बार ज्यादा वजन और फल होने की वजह से शाखाओं पर दबाव बढ़ जाता है और फलों का सही विकास भी रुक जाता है, जिससे उनकी गुणवत्ता पर असर पड़ता है.
पानी की कमी से रुक रहा फलों का विकास
अप्रैल से जून के बीच आम के फलों को लगातार नमी की जरूरत होती है. लेकिन इस समय तेज गर्मी और कम बारिश की वजह से मिट्टी जल्दी सूख जाती है. जब पौधों को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, तो वे तनाव में आ जाते हैं. ऐसे में फलों तक सही मात्रा में रस और पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते. इसका सीधा असर फलों के अंदर के गूदे पर पड़ता है और फल पूरी तरह बढ़ नहीं पाते, जिससे उनका आकार छोटा और सिकुड़ा हुआ रह जाता है.
सिर्फ यूरिया डालना भी बन रहा नुकसान की वजह
कई किसान फसल में सिर्फ यूरिया का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं. इससे पेड़ तो हरे-भरे दिखते हैं, लेकिन आम की गुणवत्ता और आकार पर बुरा असर पड़ता है. अच्छे और बड़े फलों के लिए सिर्फ नाइट्रोजन नहीं, बल्कि पोटाश, कैल्शियम, बोरॉन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भी जरूरी होते हैं. अगर ये संतुलन बिगड़ जाए तो फल ठीक से नहीं बढ़ते. लगातार ज्यादा रासायनिक खादों के इस्तेमाल से मिट्टी की ताकत भी कम हो रही है. मिट्टी में जैविक तत्व घटने से पौधों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता, जिससे फलों की क्वालिटी और उत्पादन दोनों प्रभावित होते हैं.
घने बाग भी बढ़ा रहे समस्या
सघन बागवानी में यदि समय पर पेड़ों की कटाई-छंटाई नहीं की जाए, तो पेड़ों के अंदर तक धूप और हवा नहीं पहुंच पाती. इससे पत्तियां कमजोर होने लगती हैं और पौधे पर्याप्त भोजन नहीं बना पाते. नतीजतन फलों की बढ़वार रुक जाती है और उनका आकार छोटा रह जाता है.
छोटे फल की समस्या से कैसे बचें?
- नियमित सिंचाई करें
- अतिरिक्त फलों को हटाएं
- संतुलित खाद का इस्तेमाल
- समय पर छंटाई करें
भविष्य के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लगातार बढ़ती गर्मी और अनियमित मौसम का असर इसी तरह जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में आम के फल और छोटे हो सकते हैं. साथ ही झुलसन, समय से पहले पकना और गूदे की कमी जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं. ऐसे में किसानों को अब सिर्फ ज्यादा उत्पादन नहीं, बल्कि अच्छी गुणवत्ता और बड़े आकार वाले फलों पर भी ध्यान देना होगा.