कपास किसानों के लिए बड़ा अलर्ट! 40-45 दिन बाद जरूर लगाएं फेरोमोन ट्रैप, बचेगी पूरी फसल

कपास की फसल में गुलाबी सुंडी बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर फेरोमोन ट्रैप लगाने और नियमित निगरानी करने से इस कीट को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. कम लागत वाले वैज्ञानिक उपाय अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन के साथ फसल को 70 से 80 प्रतिशत तक होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं.

नोएडा | Published: 12 Jul, 2026 | 11:35 AM

Cotton Farming: अच्छी बारिश के बाद इस वर्ष कई क्षेत्रों में कपास की फसल बेहतर स्थिति में है, लेकिन बदलते मौसम और बढ़ती नमी के कारण गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवॉर्म) का खतरा भी बढ़ने लगा है. यह कीट कपास की सबसे नुकसानदायक समस्याओं में गिना जाता है, जो समय पर नियंत्रण नहीं होने पर किसानों की पैदावार और आय दोनों को प्रभावित कर सकता है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यदि किसान शुरुआती अवस्था में वैज्ञानिक तरीके अपनाएं तो इस कीट से होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.

गुलाबी सुंडी कैसे पहुंचाती है फसल को नुकसान?

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के प्रसार ब्यूरो के अनुसार गुलाबी सुंडी की मादा पतंगा कपास के फूलों  और डेंडू (बॉल) पर अंडे देती है. अंडों से निकलने वाली सुंडी सीधे डेंडू के अंदर प्रवेश कर जाती है और वहीं बीज व रेशों को नुकसान पहुंचाती है. इस कीट की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआत में बाहर से डेंडू सामान्य दिखाई देता है, जबकि अंदर से फसल लगातार खराब होती रहती है. यदि समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया जाए तो यह कीट 70 से 80 प्रतिशत तक फसल को नुकसान पहुंचा सकती है. इसलिए नियमित निगरानी और शुरुआती पहचान बेहद जरूरी है.

फेरोमोन ट्रैप से करें निगरानी और रोकथाम

गुलाबी सुंडी की निगरानी और नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप सबसे प्रभावी, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल तकनीक मानी जाती है. इस ट्रैप में विशेष रासायनिक ल्योर लगाया जाता है, जिसकी गंध से नर पतंगे आकर्षित होकर ट्रैप में फंस जाते हैं. इससे उनका प्रजनन चक्र टूटता है और नई सुंडियों की संख्या कम होने लगती है. विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान बुवाई के 40 से 45 दिन बाद प्रति हेक्टेयर 15 से 20 फेरोमैन ट्रैप लगाएं. एक ट्रैप की कीमत लगभग 50 से 60 रुपये होती है, जबकि प्रति बीघा इस पर कुल खर्च करीब 200 से 300 रुपये आता है. कम लागत में यह तरीका फसल सुरक्षा के लिए काफी प्रभावी माना जाता है.

वैज्ञानिक खेती से बचाएं उत्पादन और बढ़ाएं मुनाफा

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसान केवल कीटनाशकों  पर निर्भर न रहें, बल्कि फसल की नियमित निगरानी करें और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार समेकित कीट प्रबंधन (IPM) अपनाएं. समय-समय पर खेत का निरीक्षण करें और किसी भी प्रकार के कीट के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत आवश्यक कदम उठाएं. फेरोमैन ट्रैप, संतुलित पोषण प्रबंधन और समय पर निगरानी अपनाकर किसान गुलाबी सुंडी के प्रकोप को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं. इससे कपास की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर रहते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती सतर्कता और वैज्ञानिक तकनीकों का पालन करने से किसान फसल को बड़े नुकसान से बचाकर अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं.

Topics: