धान कटाई के साथ पराली पर शिकंजा, अंबाला में 563 अधिकारी तैनात.. जलाया तो जुर्माना और FIR तय
हरियाणा के अंबाला में धान की कटाई शुरू होने के साथ पराली जलाने से रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है. 563 नोडल अधिकारियों को किसानों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है. जिले में 2.08 लाख एकड़ से ज्यादा धान का रकबा दर्ज है. पिछले साल पराली जलाने के 8 मामले सामने आए थे. अब प्रशासन इन्हें शून्य करने की तैयारी में है.
हरियाणा के अंबाला जिले में धान की कटाई शुरू हो गई है. इसके साथ ही खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है. इसके लिए कई स्तरों पर पराली संरक्षण दल (Parali Protection Forces) का गठन किया गया है. कृषि विभाग के मुताबिक, मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) पोर्टल पर धान की खेती का 2.08 लाख एकड़ से ज्यादा रकबा दर्ज हुआ है. इस रकबे के आधार पर करीब 4.16 लाख मीट्रिक टन धान की पराली निकलने का अनुमान है. प्रशासन इसी पराली को जलाने से रोकने के लिए निगरानी कर रहा है. साथ ही जिले में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए 563 नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है.
अंबाला के कृषि उपनिदेशक डॉ. वजीर सिंह ने द ट्रिब्यून से कहा कि मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) पोर्टल दोबारा खुलने के बाद धान की खेती का रकबा और बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि कई किसान समय पर पोर्टल पर अपना पंजीकरण नहीं करा पाए हैं. ऐसे किसानों के लिए पोर्टल दोबारा खुलने पर धान की खेती का कुल दर्ज रकबा बढ़ने की संभावना है.
अंबाला में पराली जलाने पर रोक के लिए निगरानी बढ़ी
मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) पोर्टल के मुताबिक, अंबाला जिले में 2.08 लाख एकड़ से ज्यादा जमीन पर धान की खेती दर्ज है. हालांकि, बड़ी संख्या में किसान समय पर पंजीकरण नहीं करा पाए हैं. पोर्टल दोबारा खुलने के बाद धान का कुल रकबा और बढ़ने की उम्मीद है. जिले के कुछ इलाकों में पूसा 1509 किस्म के धान की कटाई शुरू हो गई है. इसके साथ ही पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था मजबूत कर दी है.
563 नोडल अधिकारियों की तैनाती
जिला प्रशासन ने जिला, उपमंडल, ब्लॉक और गांव स्तर पर पराली संरक्षण दल बनाए हैं. इन दलों का काम किसानों को जागरूक करना, खेतों की निगरानी करना और पराली जलाने के मामलों में कार्रवाई करना है. अंबाला में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए 563 नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है. हर नोडल अधिकारी को करीब 100 किसानों की जिम्मेदारी दी गई है. अधिकारी किसानों को पराली जलाने के बजाय इसे खेत में मिलाने, दूसरे कामों में इस्तेमाल करने या पशुओं के चारे के रूप में उपयोग करने के लिए जागरूक कर रहे हैं. इसके लिए सरकार की ओर से दी जा रही प्रोत्साहन राशि का लाभ लेने की भी जानकारी दी जा रही है.
किसानों को किया जा रहा जागरूक
कृषि विभाग किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में भी बता रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है. इससे बच्चों, बुजुर्गों और आम लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है. पराली जलाने से मिट्टी की सेहत भी खराब होती है. इसके अलावा गांवों में जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं. स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम और पेंटिंग प्रतियोगिताएं भी कराई जा रही हैं. इनके जरिए बच्चों को पर्यावरण बचाने की जिम्मेदारी समझाई जा रही है. बच्चों से अपने माता-पिता, परिवार के सदस्यों और आसपास के किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए प्रेरित करने को कहा जा रहा है.
अंबाला में पराली जलाने के केस हुए कम
अंबाला जिले में पिछले कुछ वर्षों में पराली जलाने की घटनाओं में लगातार कमी आई है. कृषि विभाग के मुताबिक, पिछले साल जिले में पराली जलाने के सिर्फ 8 मामले (AFLs) दर्ज हुए थे. इनमें 3 किसानों के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई थी. कृषि उपनिदेशक डॉ. वजीर सिंह ने कहा कि किसानों के सहयोग से पराली जलाने की घटनाओं को आगे शून्य तक लाने की उम्मीद है. हालांकि, उन्होंने किसानों को चेतावनी दी कि पराली जलाते पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसके तहत किसान पर 30,000 रुपये तक का जुर्माना, मेरी फसल मेरा ब्यौरा (MFMB) पोर्टल पर रेड एंट्री और FIR दर्ज की जा सकती है.