अल नीनो का बढ़ा खतरा! देर से होगी गेहूं की बुवाई, रबी फसल पर मंडराया संकट
अल नीनो के असर से इस साल गेहूं की बुवाई और रबी फसलों पर खतरा बढ़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि खरीफ फसलों की कटाई में देरी और कमजोर माॉसून का असर उत्पादन पर पड़ेगा. हालांकि, सितंबर-अक्टूबर में पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) अच्छी बारिश लाकर कुछ राहत दे सकता है.
अल नीनो का असर इस साल गेहूं की फसल पर पड़ सकता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में बदलाव के कारण खरीफ फसलों की कटाई देर से हो सकती है, जिससे गेहूं की बुवाई भी प्रभावित होगी. उनका मानना है कि अगर मौसम की स्थिति नहीं सुधरी, तो कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं और रबी फसलों पर भी इसका असर पड़ सकता है.
दरअसल, उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आयोजित व्हीट प्रोडक्ट्स प्रमोशन सोसाइटी के सीईओ कॉन्क्लेव में आईटीसी एग्री बिजनेस डिवीजन के ग्रेन्स बिजनेस प्रमुख गौरव आनंद ने कहा कि खरीफ फसलों की कटाई देर से होने की संभावना है. इससे गेहूं की बुवाई भी देर से हो सकती है और मौसम की स्थिति फसल को प्रभावित कर सकती है. वहीं, स्काइमेट के संस्थापक और प्रबंध निदेशक जतिन सिंह ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की स्थिति अच्छी नहीं है. उनका मानना है कि सितंबर तक मौसम का असर और ज्यादा दिखाई देगा, जिससे फसलों को नुकसान पहुंच सकता है.
मॉनसून कमजोर रहने से फसलों को नुकसान
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल सूखे जैसी स्थिति बन सकती है. हालांकि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2016 के बाद से आधिकारिक तौर पर सूखे की घोषणा करना बंद कर दिया है. हालांकि, राहत की बात यह है कि पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) सितंबर और अक्टूबर में अच्छी बारिश ला सकता है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि तब तक मॉनसून कमजोर रहने से फसलों को नुकसान हो सकता है.
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गेहूं के बाजार में काफी उतार-चढ़ाव
आईटीसी फूड डिवीजन के खरीद और लॉजिस्टिक्स प्रमुख सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अल नीनो की आशंकाओं के कारण गेहूं का बाजार काफी उतार-चढ़ाव वाला बना हुआ है. वहीं, एगपल्स एनालिटिक्स के सह-संस्थापक और निदेशक गौरव जैन ने कहा कि युद्ध जैसी परिस्थितियों के दौरान कई देश खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका (MENA) के कुछ देशों में उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है.
अल नीनो का असर गेहूं पर पड़ेगा
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मौजूदा अल नीनो का असर इस साल की रबी फसलों, खासकर गेहूं के उत्पादन पर पड़ सकता है. उनका कहना है कि मौसम की वजह से रबी फसलें जोखिम में आ सकती हैं. एगपल्स एनालिटिक्स के सह-संस्थापक गौरव जैन ने कहा कि भारत और चीन जैसे देशों में गेहूं की मांग बढ़ने के बाद उत्पादन भी बढ़ाया गया है. पहले जहां उत्पादन करीब 15 करोड़ टन था, अब यह बढ़कर 17 करोड़ टन हो गया है.
दुनिया में गेहूं की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है
वाराणसी में आयोजित गेहूं सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कहा कि ईरान युद्ध और अल नीनो जैसी चुनौतियों के बावजूद दुनिया में गेहूं की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है. वहीं, विशेषज्ञों ने कहा कि भारत कीमत के मामले में रूस और ब्लैक सी क्षेत्र के गेहूं से मुकाबला नहीं कर सकता. इसलिए भारत को गेहूं के वैल्यू एडेड (प्रोसेस्ड) उत्पादों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए.