Wheat cultivation: बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में किसान अभी भी पारंपरिक तरीके से खेती कर रहे हैं. ऐसे में किसानों को काफी मेहनत करने के बावजूद बंपर पैदावार नहीं मिल रही है. इसलिए किसानों को उतना मुफाना नहीं होता है. खास कर गेहूं किसानों की साथ ये समस्या ज्यादा है. लेकिन अब पारंपरिक तरीके से गेहूं की खेती करने वाले किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. आज हम कुछ ऐसे घरेलू टिप्स बताने जा रहे हैं, जिसे अपनाते ही गेहूं की पैदावार बढ़ जाएगी. बस किसानों को नीचे बताए गए तरीकों को अपनाना होगा. इसके बाद गेहूं देखते ही देखते गेहूं किसानों की किस्मत बदल जाएगी. यानी उनकी कमाई में बढ़ोतरी होगी, क्योंकि पैदावार अच्छी होगी.
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं की फसल के पहले 25 दिन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. इस समय जड़ें मजबूत होती हैं और पौधे तेजी से बढ़ते हैं. अगर इस दौरान सही देखभाल नहीं की गई, तो फसल कमजोर रहती है और उत्पादन कम हो जाता है. दरअसल, गेहूं की खेती में खरपतवार बड़ी समस्या है. ये फसल से पानी, पोषक तत्व और धूप छीनते हैं. अगर शुरुआत में खरपतवार पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो पैदावार 30 से 40 प्रतिशत तक घट सकती है, जिससे किसानों को बड़ा नुकसान हो सकता है.
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यह दवा खरपतवार के अंकुरण को रोकती है
कृषि एक्सपर्ट की माने तो खरपतवार नियंत्रण के लिए प्री-इमरजेंसी दवा बहुत जरूरी है. बुवाई के तुरंत बाद यह दवा खरपतवार के अंकुरण को रोकती है और गेहूं को शुरुआती बढ़त देती है. सही समय और तरीके से दवा छिड़कने से खेत लंबे समय तक साफ रहते हैं. अगर किसान बुवाई के बाद 25 दिन तक प्री-इमरजेंसी दवा नहीं लगा पाए, तो पोस्ट-इमरजेंसी दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है. सल्फो सल्फ्यूरोन नाम की दवा लगभग 40 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से दी जा सकती है.
पहली सिंचाई बुवाई के 21 दिन बाद करनी चाहिए
गेहूं की फसल में सिंचाई का सही समय उत्पादन बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है. पहली सिंचाई बुवाई के 21 दिन बाद करनी चाहिए. इसके बाद दूसरी 45वें दिन, तीसरी 65वें दिन, चौथी 90वें दिन और पांचवीं 120वें दिन करनी चाहिए. बुवाई के बाद शुरुआती 25 दिन फसल के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. अगर किसान खरपतवार नियंत्रण, सही दवा और समय पर सिंचाई जैसी वैज्ञानिक विधियों को अपनाएं, तो कम खर्च में ज्यादा उत्पादन हासिल किया जा सकता है. इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होगी और किसानों की आमदनी में भी अच्छी बढ़ोतरी होगी.