FCI ने नहीं लिया 6.5 लाख टन चावल, नाराज राइस मिलर्स ने किया अगले सीजन के बहिष्कार का ऐलान

हरियाणा में करीब 6.5 लाख मीट्रिक टन CMR चावल FCI द्वारा स्वीकार नहीं किए जाने से राइस मिलर्स नाराज हैं. मिलर्स ने अगले खरीद सीजन में CMR ऑपरेशन के बहिष्कार का फैसला किया है. उनका कहना है कि करीब 2,800 करोड़ रुपये का चावल लंबित है. मिलर्स ने बकाया भुगतान, भंडारण खर्च और खराब हो रहे स्टॉक के नुकसान की भरपाई की मांग की है.

नोएडा | Updated On: 22 Aug, 2026 | 02:19 PM

हरियाणा में करीब 6.5 लाख मीट्रिक टन कस्टम मिल्ड राइस (CMR) राइस मिलों में पड़ा हुआ है. मिलर्स का आरोप है कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) इस चावल को स्वीकार नहीं कर रहा है. इससे नाराज राइस मिलर्स ने अगले खरीद सीजन में CMR का काम नहीं करने का फैसला किया है. नया खरीद सीजन 1 अक्टूबर से शुरू होने की उम्मीद है. मिलर्स का कहना है कि जब तक मौजूदा CMR का समाधान नहीं होता और FCI चावल स्वीकार नहीं करता, तब तक वे नए सीजन के लिए CMR ऑपरेशन में हिस्सा नहीं लेंगे.

हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, करीब 2,800 करोड़ रुपये का CMR पिछले खरीद सीजन से लंबित है. एसोसिएशन का आरोप है कि इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री राजेश नागर और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई बार बैठक हो चुकी है, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ.

करनाल की बैठक में लिया गया फैसला

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, CMR की समस्या को लेकर करनाल में राइस मिलर्स  की बैठक हुई. बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के चेयरमैन ज्वेल सिंगला और अध्यक्ष हंसराज सिंगला ने की. इसमें अगले खरीद सीजन में CMR का काम नहीं करने का फैसला लिया गया. डिस्ट्रिक्ट करनाल राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन ने भी इस फैसले का समर्थन किया है. मिलर्स का कहना है कि जब तक पिछले सीजन का लंबित CMR स्वीकार नहीं किया जाता और समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक अगले सीजन में काम करना मुश्किल होगा.

CMR जमा करने की समय सीमा 30 सितंबर तक बढ़ी

राइस मिलर्स ने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले खरीद सीजन में 55 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य  तय किया था. इसके मुकाबले सरकारी एजेंसियों ने करीब 62 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की. इस धान को राज्य की करीब 1,400 राइस मिलों को कस्टम मिलिंग के लिए दिया गया. हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के चेयरमैन ज्वेल सिंगला ने कहा कि मिलर्स की बार-बार मांग के बाद केंद्र सरकार ने FCI को CMR जमा करने की समय सीमा 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाई थी. हालांकि, उनका आरोप है कि FCI ने अपने अधिकारियों को आगे चावल स्वीकार करने से रोक दिया है.

डिफॉल्टर सूची में शामिल होने का डर

सिंगला ने कहा कि CMR जमा नहीं होने के कारण मिलर्स के सामने सरकार की डिफॉल्टर सूची में शामिल होने और अगले CMR सीजन में हिस्सा लेने से रोक दिए जाने का खतरा है. इसके अलावा चावल की मिलिंग और परिवहन का भुगतान भी अभी लंबित है. उन्होंने साफ कहा कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, मिलर्स अगले सीजन में CMR का काम नहीं करेंगे.

बकाया भुगतान से बढ़ी मिलर्स की परेशानी

हरियाणा के राइस मिलर्स ने सरकार से चावल के भंडारण और स्टॉक रखने का खर्च देने की मांग की है. मिलर्स का कहना है कि लंबे समय तक चावल पड़े रहने से उसके रंग और गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है. इससे होने वाले नुकसान की भरपाई भी सरकार को करनी चाहिए. एसोसिएशन के चेयरमैन ज्वेल सिंगला ने कहा कि मिलिंग का बकाया भुगतान समय पर नहीं मिलने से मिलर्स पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि भुगतान में देरी से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को बढ़ावा मिल सकता है.

मांग पूरी होने तक रजिस्ट्रेशन नहीं

करनाल एसोसिएशन के अध्यक्ष राज कुमार गुप्ता ने कहा कि जिले के सभी राइस मिलर्स राज्य एसोसिएशन के फैसले के साथ हैं. उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, मिलर्स अगले सीजन के लिए रजिस्ट्रेशन  नहीं कराएंगे. मिलर्स ने राज्य सरकार से केंद्र के साथ बातचीत कर CMR को समय पर स्वीकार कराने, बकाया भुगतान दिलाने और भंडारण खर्च की भरपाई कराने की मांग की है.

 

Published: 22 Aug, 2026 | 02:13 PM

Topics: