अल नीनो के डर से किसान धान की खेती का तरीका बदल रहे, कम पानी लागत वाली विधियां अपनाईं

अल नीनो की गंभीर भविष्यवाणियों के चलते किसान पानी बचाने वाली धान खेती की तकनीकें अपना रहे हैं. वहीं, विशेषज्ञ ज्यादा पानी लेने वाली फसलों को छोड़ने की सलाह किसानों को दे रहे हैं. अब तेजी से खरीफ फसलों की खेती की विधियां बदल रही हैं.

नोएडा | Updated On: 18 Jun, 2026 | 01:35 PM

अल नीनो के चलते कम बारिश ने किसानों को खेती का तरीका बदलने को मजबूर कर दिया है. खरीफ सीजन में धान की खेती करने वाले किसान कम पानी लागत वाली विधियां अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं. ऐसे ही किसान सत्यम हैं, जो आंध्र प्रदेश में कई सालों के पारंपरिक तरीके से धान उगाने का तरीका छोड़कर इस बार डीएसआर विधि अपनाई है.

आंध्र प्रदेश के किसान ने पारंपरिक विधि छोड़ी

आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के जेआर पुरम गांव के रहने वाले 52 वर्षीय किसान सत्यम के पास पांच एकड़ जमीन और दो बोरवेल हैं. उन्होंने पीटीआई को बताया कि  वे जीवन भर धान की खेती उसी पारंपरिक तरीके से करते रहे हैं, जैसा उनके पिता करते थे. नर्सरी में पौधे तैयार करना, उन्हें पानी से भरे खेतों में लगाना और फसल कटने तक खेत में पानी जमाए रखना.

पिछली बार मई में हुई थी बारिश पर इस बार नहीं

इस खरीफ सीजन में वे कुछ अलग करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्हें डॉ. रेड्डीज फाउंडेशन से कई सालों की ट्रेनिंग मिली है. यह फाउंडेशन बड़ी फार्मा कंपनी डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के CSR फंड से चलता है और किसानों को आधुनिक खेती विधियों की ट्रेनिंग देता है. किसान सत्यम ने कहा कि पिछले साल मई में ही बारिश हो गई थी. इस साल अभी तक बारिश नहीं हुई है. मैंने सुना है कि अल नीनो की वजह से बारिश कम होगी.

भूजल स्तर बेहतर करने और पानी बचाने की शुरूआत

अल नीनो की गंभीर भविष्यवाणियों के कारण आंध्र प्रदेश के किसान पानी बचाने वाली धान खेती तकनीकें अपना रहे हैं, जैसे कि डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) और अल्टरनेट वेटिंग एंड ड्राइंग (AWD). चूंकि विशेषज्ञ ज्यादा पानी लेने वाली फसलों को छोड़ने की पुरजोर सलाह दे रहे हैं, इसलिए ये तरीके घटते भूजल को बचाने और इस खरीफ सीजन में खेती की पैदावार सुरक्षित करने के लिए बहुत जरूरी हैं.

पानी बचाने वाली खेती की नई विधियां

आंध्र प्रदेश में खासकर रायलसीमा जैसे इलाकों में जलवायु के अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए पानी बचाने के कई व्यवस्थित तरीके अपनाए जा रहे हैं. इनमें डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR), अल्टरनेट वेटिंग एंड Drying (AWD) और फसल विविधीकरण (Crop Diversification) विधियां अपना रहे हैं.

डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR)

डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) विधि इसमें पारंपरिक ज्यादा पानी लेने वाली नर्सरी ट्रांसप्लांटिंग प्रक्रिया के बजाय सीधे मिट्टी में बीज बोए जाते हैं. इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके (सूखे या गीले DSR) के आधार पर यह तरीका पारंपरिक ट्रांसप्लांटिंग की तुलना में प्रति एकड़ 400,000 से 1,200,000 लीटर पानी बचाता है.

अल्टरनेट वेटिंग एंड Drying (AWD) विधि

धान के खेतों में लगातार पानी भरे रखने के बजाय, इस सिंचाई तकनीक में खेत में दोबारा पानी देने से पहले मिट्टी को कुछ दिनों तक सूखने दिया जाता है. यह तकनीक फसल की पैदावार बनाए रखते हुए प्रति एकड़ लगभग 300,000 से 500,000 लीटर पानी बचाती है.

फसल विविधीकरण (Crop Diversification)

रीजनल एग्रीकल्चरल रिसर्च स्टेशन (RARS) और आचार्य एनजी रंगा एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों के कृषि वैज्ञानिक सूखे के संभावित दौर के हिसाब से खुद को ढालने के लिए धान और गन्ने के बजाय कम पानी लेने वाली और कम समय में तैयार होने वाली फसलों, जैसे दालों और मोटे अनाजों (मिलेट्स) की खेती अपनाने की पुरजोर सलाह दी है.

Published: 18 Jun, 2026 | 01:34 PM

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