किसानों के हित में बड़ा फैसला, खरीफ सीजन में मिलेगी भरपूर खाद.. सरकार ने इन उर्वरकों पर सब्सिडी बढ़ाई
सब्सिडी नीति के अनुसार, यूरिया पर पूरा खर्च सरकार वहन करती है, जबकि NBS दरें एक सीजन के लिए तय होती हैं. इसके तहत कंपनियों को डी-अमोनियम फॉस्फेट (DAP), म्यूरेट ऑफ पोटाश (MoP) और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों (N, P, K, S युक्त) की बिक्री कीमत तय करने की आजादी मिलती है.
Fertilizer Subsidy: खरीफ सीजन शुरू होने से पहले केंद्र सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने खरीफ 2026 के लिए न्यूट्रिएंट-बेस्ड खाद सब्सिडी (NBS) दरों को मंजूरी दे दी है. इसके लिए सरकार ने 41,533.81 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो पिछले खरीफ सीजन के 37,216.15 करोड़ रुपये से करीब 4,317 करोड़ रुपये ज्यादा है. इस बार पोटाश (K) पर सब्सिडी को पहले जैसी ही रखा गया है, जबकि नाइट्रोजन (N) पर 10 फीसदी और फॉस्फोरस (P) तथा सल्फर (S) पर 21 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है.
बिजनेसलाइ की रिपोर्ट के मुताबिक, नई दरों के अनुसार, अप्रैल 1 से 30 सितंबर 2026 तक चलने वाले खरीफ सीजन में उर्वरक कंपनियों को नाइट्रोजन पर 47.32 रुपये प्रति किलो, फॉस्फोरस पर 52.76 रुपये प्रति किलो, पोटाश पर 2.38 रुपये प्रति किलो और सल्फर पर 3.16 रुपये प्रति किलो सब्सिडी दी जाएगी. यह जानकारी सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद दी है. हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि अगर खरीफ 2026 की नई दरों की तुलना 2025-26 रबी सीजन से पहले की गई पिछली संशोधित दरों से की जाए, तो फॉस्फोरस और सल्फर पर भी करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी दिखाई देती है, जो यूरिया जैसी ही है.
2023 में कितनी थी सब्सिडी राशि
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि सरकार ने पोटाश (K) पर सब्सिडी लगातार छठे सीजन में नहीं बदली है. इसे घटाकर रबी 2023 में 15.91 रुपये प्रति किलो से 2.38 रुपये प्रति किलो कर दिया गया था और तब से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि वैश्विक बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. सरकार ने अपनी नीति में कहा है कि किसानों को सब्सिडी वाली, सस्ती और उचित कीमतों पर उर्वरक उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाएगा. साथ ही यह भी बताया गया कि हाल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों और इनपुट की कीमतों में बदलाव को देखते हुए यह संशोधन किया गया है.
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यूरिया पर पूरा खर्च सरकार वहन करती है
सब्सिडी नीति के अनुसार, यूरिया पर पूरा खर्च सरकार वहन करती है, जबकि NBS दरें एक सीजन के लिए तय होती हैं. इसके तहत कंपनियों को डी-अमोनियम फॉस्फेट (DAP), म्यूरेट ऑफ पोटाश (MoP) और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों (N, P, K, S युक्त) की बिक्री कीमत तय करने की आजादी मिलती है. हालांकि सरकार ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि DAP की कीमत 50 किलो के बैग पर 1,350 रुपये से ज्यादा नहीं बढ़ाई जाए. सरकार ने यह भी भरोसा दिया है कि जरूरत पड़ने पर सब्सिडी बढ़ाई जाएगी, ताकि उर्वरकों या कच्चे माल के आयात में कोई बाधा न आए.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में DAP की कीमतों में काफी बढ़ोतरी
मंत्री ने बताया कि कोविड के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में DAP की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसके बावजूद किसानों के लिए खुदरा कीमत 1,350 रुपये प्रति बैग पर ही स्थिर रखी गई है. खरीफ 2026 के लिए इंपोर्टेड ट्रिपल सुपर फॉस्फेट (TSP), सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) पर फ्रेट सब्सिडी और इंपोर्टेड व देश में बने अमोनियम सल्फेट को भी NBS योजना के तहत शामिल रखा जाएगा.
यूरिया की अंतरराष्ट्रीय कीमत 700 डॉलर प्रति टन
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मार्च 2025 में आयातित यूरिया की औसत कीमत लगभग 425 डॉलर प्रति टन थी, जबकि अप्रैल 2025 में सरकार ने इसकी सब्सिडी 43.02 रुपये प्रति किलो तय की थी. अब यूरिया की अंतरराष्ट्रीय कीमत 700 डॉलर प्रति टन से ज्यादा हो चुकी है, फिर भी खरीफ 2026 के लिए सब्सिडी में केवल 10 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है. इसी तरह, आयातित DAP की कीमत मार्च 2025 में लगभग 640 डॉलर प्रति टन थी, जो अब बढ़कर करीब 800 डॉलर प्रति टन हो गई है, लेकिन इसके बावजूद इस पर 21 फीसदी सब्सिडी बढ़ाई गई है.
उर्वरकों की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था
सरकार का कहना है कि आगामी खरीफ सीजन में देश में उर्वरकों की मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था है. हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार सब्सिडी दरें निजी कंपनियों के लिए अहम होंगी, ताकि वे डीएपी और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों का आयात कर सकें. उर्वरक मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस खरीफ सीजन में यूरिया की मांग 194.01 लाख टन, डीएपी 59.17 लाख टन, एमओपी 17.57 लाख टन, कॉम्प्लेक्स उर्वरक 84.99 लाख टन और एसएसपी 34.81 लाख टन आंकी गई है.