गन्ने में तेजी से फैल रहा टॉप बोरर! समय रहते नहीं संभले तो आधी रह सकती है पैदावार, जानें उपाय

Sugarcane Farming: कम बारिश और गर्म मौसम के कारण गन्ने की फसल पर टॉप बोरर कीट का खतरा बढ़ गया है. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि फसल की नियमित निगरानी करें और शुरुआती लक्षण दिखते ही कृषि विशेषज्ञ की सलाह से सही कीटनाशक का छिड़काव करें, ताकि पैदावार में नुकसान से बचा जा सके.

नोएडा | Updated On: 4 Aug, 2026 | 11:52 AM

Top Borer Control in Sugarcane: उत्तर प्रदेश का लखीमपुर खीरी देशभर में ‘चीनी का कटोरा’ के नाम से जाना जाता है. यहां बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती करते हैं और यही उनकी आय का मुख्य जरिया है. लेकिन इस बार समय पर बारिश नहीं होने और लगातार गर्म मौसम के कारण गन्ने की फसल पर टॉप बोरर (शीर्ष छेदक कीट) का खतरा तेजी से बढ़ गया है. कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार, अगर समय रहते इस कीट पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो गन्ने की पैदावार पर बड़ा असर पड़ सकता है.

क्या है टॉप बोरर कीट?

कृषि वैज्ञानिक के अनुसार, टॉप बोरर एक खतरनाक कीट है जिसकी इल्ली गन्ने के सबसे ऊपरी हिस्से में घुसकर अंदर ही अंदर तने को नुकसान पहुंचाती है. इससे पौधे का विकास रुक जाता है और गन्ने की लंबाई, मोटाई और वजन कम होने लगता है. अगर इसका प्रकोप ज्यादा बढ़ जाए, तो किसानों को प्रति हेक्टेयर कई क्विंटल उत्पादन का नुकसान उठाना पड़ सकता है.

बारिश की कमी से क्यों बढ़ा खतरा?

इस साल कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश हुई है, जिससे खेतों में नमी की कमी बनी हुई है. कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक, गर्म और सूखा मौसम टॉप बोरर जैसे कीटों के फैलने के लिए अनुकूल होता है. इसलिए इस समय किसानों को अपने खेतों की नियमित निगरानी करनी चाहिए.

ऐसे पहचानें टॉप बोरर का हमला

टॉप बोरर का पता कुछ आसान लक्षणों से लगाया जा सकता है. अगर गन्ने की ऊपरी पत्तियों पर छोटे-छोटे छेद दिखाई दें या पत्तियों की बीच वाली नस पर एक सीध में छेद बने हों, तो यह टॉप बोरर का संकेत हो सकता है. इसके अलावा पौधे का ऊपरी हिस्सा सूखने लगता है और उसकी बढ़वार रुक जाती है. अगर तने को चीरकर देखा जाए, तो उसके अंदर इल्ली और सुरंग जैसी बनावट दिखाई देती है. ज्यादा प्रकोप होने पर गन्ने का ऊपरी हिस्सा कमजोर होकर टूट भी सकता है.

समय पर करें बचाव

कृषि वैज्ञानिक का कहना है कि जैसे ही खेत में टॉप बोरर के लक्षण दिखाई दें, तुरंत कृषि विशेषज्ञ या कृषि विभाग की सलाह लें. समय पर सही दवा का इस्तेमाल करने से इस कीट पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है. उन्होंने बताया कि, क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 एससी की करीब 150 मिलीलीटर मात्रा को 200 से 250 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव किया जा सकता है. इसके अलावा फ्लूबेंडियामाइड 39.35 एससी और फिप्रोनिल 0.3 जीआर का भी कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार इस्तेमाल किया जा सकता है.

दवा का इस्तेमाल करते समय रखें सावधानी

किसी भी कीटनाशक का उपयोग अपनी मर्जी से नहीं करना चाहिए. दवा की मात्रा, समय और छिड़काव का तरीका कृषि विभाग या कृषि वैज्ञानिक की सलाह के अनुसार ही अपनाएं. इससे फसल सुरक्षित रहेगी और अनावश्यक खर्च से भी बचा जा सकेगा.

नियमित निगरानी से होगा फायदा

किसानों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे खेत का नियमित निरीक्षण करते रहें. अगर शुरुआती लक्षणों पर ही कार्रवाई कर ली जाए, तो टॉप बोरर का प्रकोप फैलने से पहले ही रोका जा सकता है. समय पर पहचान और सही प्रबंधन से गन्ने की अच्छी पैदावार बचाई जा सकती है और आर्थिक नुकसान से भी बचा जा सकता है.

Published: 4 Aug, 2026 | 11:20 AM

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