मुफ्त राशन पर सरकार की बड़ी कार्रवाई, 2.21 करोड़ अपात्र लोगों के नाम सूची से हटाए गए
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत लाभार्थियों की सूची में बड़ा बदलाव किया गया है. देशभर में लाखों फर्जी और अपात्र राशन कार्डों की पहचान के बाद करोड़ों नाम हटाए गए हैं. सरकार का कहना है कि इस कदम से योजना का लाभ केवल जरूरतमंद और पात्र परिवारों तक पहुंच सकेगा.
Free Ration Scheme: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत मुफ्त राशन पाने वाले लाभार्थियों की सूची में बड़ा बदलाव किया गया है. केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा किए गए सत्यापन अभियान के बाद देशभर में 2.21 करोड़ ऐसे लोगों के नाम राशन सूची से हटा दिए गए हैं, जो योजना के लिए पात्र नहीं थे. सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मुफ्त अनाज का लाभ केवल गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक ही पहुंचे.
अपात्र लाभार्थियों की पहचान में तेजी
आधिकारिक बयान में केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि कई राज्यों में लाभार्थियों के रिकॉर्ड की समीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी और अपात्र नाम सामने आए. जांच में पाया गया कि कई राशन कार्ड मृत व्यक्तियों के नाम पर जारी थे, जबकि कुछ ऐसे लोग भी मुफ्त राशन का लाभ ले रहे थे जो नियमित रूप से आयकर का भुगतान करते हैं. सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि अपात्र लोगों को हटाने के साथ-साथ पात्र परिवारों को भी जल्द से जल्द योजना में शामिल किया जाए.
कई राज्यों में चल रहा है सत्यापन अभियान
सरकारी सूत्रों के अनुसार, विभिन्न विभागों के आंकड़ों का मिलान करने पर पता चला कि वर्तमान लाभार्थियों में लगभग 10 प्रतिशत लोग ऐसे थे जो राज्यों द्वारा निर्धारित पात्रता मानकों को पूरा नहीं करते थे. इसके बाद राजस्थान, ओडिशा, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों ने फर्जी और अपात्र राशन कार्डों को हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी. कुछ राज्यों ने ये काम पूरा कर लिया है, जबकि अन्य राज्यों में जांच अभी भी जारी है.
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कार मालिक, टैक्सदाता और कंपनी डायरेक्टर भी मिले
खाद्य मंत्रालय की जांच में कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं. अधिकारियों के अनुसार, अंत्योदय अन्न योजना के तहत लाभ लेने वालों में ऐसे लोग भी पाए गए जो कार के मालिक हैं, आयकर भरते हैं या कंपनियों में निदेशक पद पर कार्यरत हैं. इसके अलावा कुछ ऐसे लाभार्थी भी मिले जिन्होंने कई महीनों से अपना राशन उठाया ही नहीं था. अनुमान है कि ऐसे लोगों की संख्या 60 लाख से 1 करोड़ के बीच हो सकती है.
डिजिटल सिस्टम से बढ़ी पारदर्शिता
सरकार का कहना है कि राशन वितरण प्रणाली के डिजिटलीकरण से फर्जीवाड़े पर रोक लगाने में मदद मिली है. वर्तमान में 98.5 प्रतिशत राशन वितरण आधार प्रमाणीकरण और ई-पॉस मशीनों के माध्यम से किया जा रहा है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत देश के 81.3 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज मिलने का प्रावधान है, लेकिन हालिया कार्रवाई के बाद फिलहाल लगभग 79.2 करोड़ लोग ही इस योजना का लाभ उठा रहे हैं. सरकार का मानना है कि डिजिटल निगरानी और नियमित सत्यापन से भविष्य में भी योजना का लाभ सही लोगों तक पहुंचाना आसान होगा.