पराली के खिलाफ मुहिम, छात्र बनेंगे दूत.. स्कूल-कॉलेजों से किसानों तक पहुंचेगा फसल अवशेष प्रबंधन का संदेश

हरियाणा के करनाल में पराली जलाने के खिलाफ कृषि विभाग ने जागरूकता अभियान तेज किया है. स्कूल-कॉलेज के छात्रों को अभियान से जोड़कर उन्हें पराली जलाने के नुकसान बताए जा रहे हैं. छात्रों को पराली न जलाने की शपथ भी दिलाई जा रही है. विभाग का लक्ष्य किसानों को वैज्ञानिक तरीके से फसल अवशेष प्रबंधन के लिए प्रेरित करना और पराली जलाने की घटनाओं को शून्य करना है.

नोएडा | Published: 5 Sep, 2026 | 11:34 AM

हरियाणा में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए जिले में अभियान शुरू किया है. इस बार अभियान में स्कूल और कॉलेज के छात्रों को भी जोड़ा गया है. छात्रों को इस अभियान का मुख्य दूत बनाया गया है, ताकि वे अपने परिवारों तक भी पराली न जलाने का संदेश पहुंचा सकें. दरअसल, कृषि विभाग की विशेष टीमें हर मंगलवार और शुक्रवार को स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं. इन कार्यक्रमों में कक्षा 9वीं और उससे ऊपर के छात्रों को धान की पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जा रहा है.

छात्रों को समझाया जा रहा है कि पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता कम होती है और वायु प्रदूषण बढ़ता है. इससे लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है. विभाग छात्रों से अपील कर रहा है कि वे यह जानकारी अपने परिवार और आसपास के लोगों तक पहुंचाएं और फसल अवशेषों के वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन के लिए किसानों को प्रेरित करें.

छात्रों को दिलाई जा रही पराली न जलाने की शपथ

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि विभाग के उप निदेशक (DDA) इस जागरूकता अभियान की निगरानी कर रहे हैं और इसे आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं. अभियान के दौरान छात्रों को पराली न जलाने की शपथ दिलाई जा रही है. छात्रों को फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उसके बेहतर और वैज्ञानिक प्रबंधन के तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. साथ ही, छात्रों से इन तरीकों के बारे में अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी जागरूक करने की अपील की जा रही है.

छात्रों के जरिए किसानों तक पहुंचेगा पराली न जलाने का संदेश

करनाल के कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. जसविंदर सिंह ने कहा कि खासकर ग्रामीण इलाकों में छात्र कृषि विभाग और किसान समुदाय के बीच एक अहम कड़ी हैं. विभाग का लक्ष्य स्कूलों और कॉलेजों में कक्षा 9वीं से ऊपर के छात्रों को पराली जलाने के नुकसान के बारे में जागरूक करना है. उन्होंने कहा कि छात्रों को यह संदेश अपने घर तक ले जाने और परिवार के सदस्यों को भी जागरूक करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. विभाग चाहता है कि किसान पराली जलाने के बजाय फसल अवशेषों का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें.

करनाल में पराली जलाने के मामले घटे, 2025 में सिर्फ 23 घटनाएं

कृषि विभाग की ओर से किए गए कई प्रयासों का असर अब करनाल जिले में दिख रहा है. पिछले कुछ वर्षों में पराली जलाने की घटनाओं में लगातार कमी आई है. धान के सीजन में 2025 में जिले में पराली जलाने के सिर्फ 23 मामले सामने आए. वहीं, 2024 में 95, 2023 में 126, 2022 में 301, 2021 में 957 और 2020 में 1,052 मामले दर्ज किए गए थे. कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. जसविंदर सिंह ने कहा कि विभाग ने इस दिशा में बड़ी प्रगति की है, लेकिन अंतिम लक्ष्य खेतों में पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह खत्म करना है. उन्होंने कहा कि मामलों में कमी अच्छी बात है, लेकिन विभाग अभी संतुष्ट नहीं है. उन्होंने बताया कि सभी फील्ड कर्मचारियों को लगातार किसानों के संपर्क  में रहने के निर्देश दिए गए हैं. कर्मचारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि फसल कटाई का सीजन शुरू होने से पहले किसानों को पराली के सही प्रबंधन के तरीकों की जानकारी दी जाए.

 

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