हरियाणा के कपास खेतों में पिंक बॉलवर्म का खतरा, किसानों को निगरानी बढ़ाने की सलाह

हरियाणा के कपास उत्पादक इलाकों में गुलाबी सुंडी के शुरुआती लक्षण मिलने के बाद कृषि विभाग ने किसानों को अलर्ट किया है. सिरसा समेत कई जिलों में फेरोमोन ट्रैप लगाए गए हैं और वैज्ञानिक तरीके से कीट निगरानी की सलाह दी गई है. किसानों को NPSS मोबाइल ऐप और मंजूरशुदा कीटनाशकों के इस्तेमाल की भी सलाह दी गई है.

नोएडा | Updated On: 23 Jul, 2026 | 04:28 PM

हरियाणा के कपास उत्पादक इलाकों में गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) के शुरुआती लक्षण मिले हैं. इसे देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने और समय रहते निगरानी बढ़ाने की सलाह दी है, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके. यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत क्षेत्रीय एकीकृत कीट प्रबंधन केंद्र (फरीदाबाद) और संयुक्त निदेशक कृषि (कपास), सिरसा की टीम द्वारा किए गए संयुक्त सर्वे के बाद सामने आई. सर्वे के दौरान अधिकारियों ने सिरसा जिले के कपास खेतों का निरीक्षण किया और किसानों को समेकित कीट प्रबंधन (IPM) के बारे में जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि इससे कीटों पर नियंत्रण रखने के साथ रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता भी कम की जा सकती है.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में कुछ खेतों में गुलाबी सुंडी के शुरुआती हमले के संकेत मिले. इसके बाद किसानों को सलाह दी गई कि वे प्रति एकड़ 4 से 5 फेरोमोन ट्रैप लगाएं, जिनमें कॉटन फेरोमोन ल्योर का इस्तेमाल हो. इससे कीटों की संख्या पर नजर रखी जा सकेगी और शुरुआती चरण में ही हमले का पता चल जाएगा. इसके अलावा, रस चूसने वाले कीटों की निगरानी के लिए प्रति हेक्टेयर 20 पीले या नीले स्टिकी ट्रैप लगाने की भी सलाह दी गई है.

किसानों ने फेरोमोन ट्रैप का इस्तेमाल किया

कपास की फसल में गुलाबी सुंडी की निगरानी बढ़ाने के लिए हरियाणा के सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, हांसी, भिवानी, चरखी दादरी और जींद जिलों में फेरोमोन ट्रैप वाले प्रदर्शन प्लॉट (डेमो प्लॉट) लगाए गए हैं. कृषि अधिकारियों के अनुसार, जिन किसानों ने पहले से फेरोमोन ट्रैप का इस्तेमाल किया है, उन्हें गुलाबी सुंडी पर नियंत्रण में अच्छे नतीजे मिले हैं.

मंजूर कीटनाशकों का ही इस्तेमाल करें

अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि वे केवल केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIBRC) से मंजूर कीटनाशकों का ही इस्तेमाल करें. साथ ही, कीटनाशक का छिड़काव तभी करें, जब खेत में कीटों की संख्या आर्थिक नुकसान की तय सीमा (Economic Threshold Level) से अधिक हो. इससे अनावश्यक दवा के इस्तेमाल से बचा जा सकेगा और फसल की बेहतर सुरक्षा होगी.

किसान कीटों की पहचान

सर्वे के दौरान अधिकारियों ने किसानों को नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम (NPSS) मोबाइल ऐप की जानकारी भी दी. इस ऐप के जरिए किसान कीटों की पहचान, फसलों में रोग की जानकारी और बचाव के उपाय रियल टाइम में देख सकते हैं. इससे समय पर कार्रवाई करने और अनावश्यक कीटनाशकों के इस्तेमाल  से बचने में मदद मिलेगी. अधिकारियों ने बताया कि 2023, 2024 और 2025 में सिरसा जिले में गुलाबी सुंडी ने कपास की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया था. हालांकि, इस साल किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अत्यधिक बारिश बनकर उभरी है. कई इलाकों में लगातार बारिश से कपास की फसल प्रभावित हुई है और खेतों में नुकसान हुआ है.

Published: 23 Jul, 2026 | 02:45 PM

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