सब्जियों की कीमतों में तेज उछाल, टमाटर सबसे महंगा.. खाद्य महंगाई 5.3 फीसदी पर पहुंची

देश में सब्जियों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. टमाटर सहित कई सब्जियों के दाम दोहरे अंक की महंगाई में पहुंच गए हैं. कम बारिश, गर्मी और मॉनसून की अनिश्चितता से आपूर्ति प्रभावित हो रही है. विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई और बढ़ सकती है, जिससे उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ेगा.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 24 Jun, 2026 | 09:17 AM

देश में सब्जियों की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है. आलू, प्याज और मटर के साथ-साथ कई अन्य सब्जियां भी महंगी हो गई हैं. सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मई में 17 प्रमुख सब्जियों में से 8 की महंगाई दर दोहरे अंक में रही. इनमें सबसे ज्यादा तेजी टमाटर की कीमतों में देखने को मिली. आंकड़ों के मुताबिक, सब्जियां, कंद-मूल, केला और दालों को शामिल करने वाले समूह की महंगाई दर अप्रैल में नकारात्मक स्तर पर थी, लेकिन मई में बढ़कर 5.3 प्रतिशत हो गई. यह खाद्य महंगाई दर 4.78 प्रतिशत और कुल खुदरा महंगाई दर 3.93 प्रतिशत से भी अधिक है.

विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की अनिश्चितता और समय से पहले पड़ी भीषण गर्मी के कारण सब्जियों की कीमतों पर दबाव  बढ़ा है. वहीं, सामान्य से कम मॉनसून की आशंका के चलते आने वाले महीनों में सब्जियों के दाम और बढ़ सकते हैं, जिससे उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ने की संभावना है. खास बात यह है कि दिल्ली में सब्जियों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. वेबसाइट vegetablemarketprice.com के आंकड़ों के अनुसार, 22 मई से 22 जून के बीच नींबू, हरी मटर, बैंगन, गाजर, पत्तागोभी, हरी मिर्च और फ्रेंच बीन्स जैसी सब्जियों के दाम 15 से 60 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं.

कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका

ऐसे आमतौर पर जून से सितंबर के मॉनसून सीजन से पहले सब्जियों की नर्सरी तैयार कर ली जाती है और बारिश शुरू होने के बाद पौधों को खेतों में लगाया जाता है. लेकिन इस साल मॉनसून की धीमी रफ्तार और कई राज्यों में पड़ रही भीषण गर्मी के कारण पौधों की रोपाई प्रभावित हुई है. इससे आने वाले समय में सब्जियों की उपलब्धता कम हो सकती है, जिसके चलते कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है.

 दालें और खाद्य तेल हो सकते हैं महंगे

केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने बिजनेसलाइन को कहा कि भले ही देश में खाद्यान्न का बफर स्टॉक पहले के अल नीनो वर्षों की तुलना में मजबूत है, लेकिन सब्जियां, दालें और खाद्य तेल जैसी वस्तुओं की कीमतों पर आगे दबाव बढ़ सकता है. इससे खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका बनी हुई है. वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि कम बारिश और लगातार पड़ रही गर्मी के कारण आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई बढ़ सकती है. एक रिपोर्ट में HDFC Bank ने कहा कि मई में खाद्य और पेय पदार्थों की महंगाई मासिक आधार पर 0.9 प्रतिशत बढ़ी, जबकि अप्रैल में यह बढ़ोतरी केवल 0.2 प्रतिशत थी.

हीटवेव, अल नीनो का खतरा बढ़ा

बैंक के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत में हीटवेव, अल नीनो का खतरा और सामान्य से कम दक्षिण-पश्चिम मॉनसून खाद्य महंगाई के लिए प्रमुख जोखिम बने हुए हैं. 23 जून तक देश में सामान्य से 43.2 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. वहीं, बागवानी वैज्ञानिकों का कहना है कि फलों की उपलब्धता  पर फिलहाल ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन सब्जियों के रकबे में कमी आ सकती है. जिन क्षेत्रों में किसान वर्षा आधारित खेती करते हैं, वहां कम बारिश की स्थिति में वे सब्जियों की जगह मोटे अनाज और अन्य फसलों की खेती को प्राथमिकता दे सकते हैं. इससे आने वाले समय में सब्जियों की आपूर्ति प्रभावित होने और कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है.

कुल सब्जी उत्पादन बढ़कर 2210 लाख टन होने का अनुमान

हालांकि, उत्पादन के मोर्चे पर कुछ राहत की खबर भी है. वर्ष 2025-26 में देश का कुल सब्जी उत्पादन बढ़कर 2210 लाख टन होने का अनुमान है, जो 2024-25 में 2178 लाख टन था. इसी अवधि में सब्जियों का रकबा भी 117.9 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 118.8 लाख हेक्टेयर हो गया है. इसके बावजूद मौसम संबंधी चुनौतियां बाजार में कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं.

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Published: 24 Jun, 2026 | 09:16 AM

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