Tomato Cultivation: मॉनसून के मौसम में टमाटर की खेती करने वाले किसानों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. अगस्त महीने में लगातार बारिश और तेज धूप के कारण खेत की मिट्टी में नमी का संतुलन बिगड़ जाता है, जिसका सीधा असर टमाटर के पौधों और फलों पर पड़ता है. ऐसे मौसम में फल फटने की समस्या किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, थोड़ी सावधानी और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाकर किसान इस नुकसान से बच सकते हैं.
डॉ. रजनीश मिश्रा, संयुक्त निदेशक (बागवानी) के अनुसार, बारिश के मौसम में टमाटर की फसल में जल प्रबंधन सबसे जरूरी होता है. खेत में अधिक समय तक पानी जमा रहने या लंबे अंतराल के बाद अचानक ज्यादा सिंचाई करने से पौधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. इसलिए किसानों को मौसम और मिट्टी की स्थिति के अनुसार सिंचाई करनी चाहिए.
अचानक नमी बढ़ने से फटने लगते हैं टमाटर के फल
टमाटर के फल फटने की सबसे बड़ी वजह मिट्टी की नमी में अचानक बदलाव माना जाता है. जब खेत काफी समय तक सूखा रहता है और उसके बाद तेज बारिश या अधिक सिंचाई से पौधे को अचानक पानी मिलता है, तो फल तेजी से आकार लेने लगते हैं. लेकिन फल की बाहरी त्वचा उतनी तेजी से फैल नहीं पाती, जिससे फल चटकने या फटने लगते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में किसानों को खेत में जल निकासी की बेहतर व्यवस्था रखनी चाहिए. अतिरिक्त पानी निकलने की व्यवस्था नहीं होने पर जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है.
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बोरॉन और कैल्शियम की कमी भी बनती है कारण
टमाटर के फलों के फटने का एक प्रमुख कारण पोषक तत्वों की कमी भी होती है. खासकर बोरॉन की कमी से फलों की त्वचा कमजोर हो जाती है, जिससे बारिश के दौरान फल आसानी से फट सकते हैं. बोरॉन फल की बाहरी परत को मजबूत बनाने में मदद करता है. डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, किसानों को संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाना चाहिए. बोरॉन की कमी दूर करने के लिए 2 ग्राम बोरॉन प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है. इसके अलावा कैल्शियम नाइट्रेट का प्रयोग भी फलों की मजबूती बढ़ाने में मददगार साबित होता है.
मल्चिंग और सही सिंचाई से मिलेगा फायदा
बारिश के मौसम में टमाटर की फसल को बचाने के लिए किसान मल्चिंग तकनीक अपना सकते हैं. इससे मिट्टी में नमी का संतुलन बना रहता है और अचानक बदलाव की स्थिति कम होती है. खेत में खरपतवार नियंत्रण और उचित दूरी पर पौध रोपण भी जरूरी है.विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान जरूरत के अनुसार ही सिंचाई करें और खेत में लंबे समय तक पानी जमा न होने दें. इससे पौधों की जड़ों को मजबूती मिलेगी और फल बेहतर गुणवत्ता वाले तैयार होंगे.
सही किस्म का चयन कर नुकसान करें कम
मॉनसून में टमाटर की खेती के लिए किसानों को ऐसी उन्नत और हाइब्रिड किस्मों का चयन करना चाहिए, जो फल फटने की समस्या के प्रति सहनशील हों. इसके अलावा फलों को पूरी तरह लाल होने का इंतजार करने के बजाय गुलाबी अवस्था में तोड़ लेना बेहतर रहता है. समय पर तुड़ाई करने से फलों की गुणवत्ता बनी रहती है और बाजार में अच्छे दाम मिलने की संभावना बढ़ती है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि वैज्ञानिक तरीके से खेती, संतुलित खाद-पोषण और सही प्रबंधन अपनाकर किसान बारिश के मौसम में भी टमाटर की फसल से अच्छी आमदनी हासिल कर सकते हैं.