ओलावृष्टि ने बिगाड़ा प्लम किसानों का गणित, फलों की क्वालिटी घटी, बाजार में नहीं मिल रहा सही दाम

Plum Crop Damage: कश्मीर घाटी में लगातार हो रही ओलावृष्टि ने प्लम (बेर) किसानों की चिंता बढ़ा दी है. फलों पर दाग और चोट के निशान आने से उनकी क्वालिटी खराब हो गई है, जिससे किसानों को बाजार में सही कीमत नहीं मिल रही. खराब मौसम के कारण चेरी और सेब जैसी दूसरी बागवानी फसलें भी प्रभावित हुई हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Updated On: 4 Jul, 2026 | 09:14 AM

Plum Farming Kashmir: कश्मीर घाटी में इस साल प्लम (बेर) की अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को मौसम ने बड़ा झटका दिया है. पिछले कुछ हफ्तों में हुई लगातार ओलावृष्टि ने बागों में तैयार फलों को नुकसान पहुंचाया है. कई जगहों पर प्लम पर दाग और चोट के निशान पड़ गए हैं, जिससे उनकी क्वालिटी खराब हो गई है. इसका सीधा असर बाजार भाव पर पड़ा है और किसानों को अपनी मेहनत की फसल औने-पौने दामों में बेचनी पड़ रही है. किसानों का कहना है कि इस बार फसल अच्छी थी, लेकिन मौसम की मार ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. अब उन्हें उत्पादन से ज्यादा नुकसान की चिंता सता रही है.

अच्छी फसल की उम्मीद पर फिरा पानी

पुलवामा के किसान अब्दुल गफ्फार मलिक ने बिजनेस लाइन को बताया कि, दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के वारवान गांव सहित कई इलाकों में तेज ओलावृष्टि हुई, जिससे प्लम के बागों को काफी नुकसान पहुंचा. फलों पर पड़े दाग और चोट के कारण व्यापारी उन्हें अच्छी क्वालिटी का नहीं मान रहे हैं.

पुलवामा के किसान अब्दुल गफ्फार मलिक का कहना है कि इस साल अच्छी कमाई की उम्मीद थी, लेकिन ओलों ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया. अब व्यापारी खराब हुए फलों की कीमत काफी कम लगा रहे हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.

जुलाई से शुरू हुई प्लम की तुड़ाई

कश्मीर घाटी में जुलाई की शुरुआत के साथ प्लम की तुड़ाई शुरू हो जाती है. चेरी के बाद यह सीजन की दूसरी बड़ी फल फसल मानी जाती है. हर साल हजारों किसान इसकी खेती से अच्छी आय कमाते हैं. घाटी में करीब 1,500 हेक्टेयर क्षेत्र में प्लम की खेती होती है और सालाना लगभग 8,000 मीट्रिक टन उत्पादन होता है. पुलवामा, शोपियां, बडगाम और श्रीनगर जैसे जिलों के सैकड़ों परिवारों की आजीविका काफी हद तक इसी फसल पर निर्भर करती है. लेकिन इस बार खराब मौसम की वजह से न केवल उत्पादन की क्वालिटी प्रभावित हुई है, बल्कि बाजार में भी किसानों को उचित कीमत नहीं मिल रही है.

सिर्फ प्लम ही नहीं, चेरी और सेब भी प्रभावित

किसानों का कहना है कि, इस बार मौसम ने केवल प्लम की फसल को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि चेरी और सेब के बाग भी इसकी चपेट में आए हैं. एक अन्य किसान मुश्ताक अहमद के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में कई बार हुई ओलावृष्टि ने बागवानी को भारी नुकसान पहुंचाया है. उनका कहना है कि मौसम पहले जैसा नहीं रहा और हर साल नई चुनौतियां सामने आ रही हैं.

दो महीनों में 10 से 12 बार हुई ओलावृष्टि

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, पिछले दो महीनों में कश्मीर घाटी में 10 से 12 बार ओलावृष्टि दर्ज की गई. इसका असर केवल फलों पर ही नहीं, बल्कि कई सब्जी फसलों पर भी पड़ा है.

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल फरवरी में सामान्य से ज्यादा तापमान रिकॉर्ड किया गया, लेकिन उसके बाद अचानक मौसम बदला और तापमान में तेजी से गिरावट आई. इस तरह के लगातार उतार-चढ़ाव ने फलों की बढ़वार, रंग और क्वालिटी पर नकारात्मक असर डाला.

जलवायु परिवर्तन बन रहा सबसे बड़ी चुनौती

बागवानी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सभी जिलों में बड़े स्तर पर नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन जहां तेज ओलावृष्टि हुई, वहां फलों की क्वालिटी काफी प्रभावित हुई है. जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है. कभी तेज गर्मी, कभी अचानक बारिश और बार-बार होने वाली ओलावृष्टि अब किसानों के लिए नई चुनौती बनती जा रही है.

मौसम से बचाव के बेहतर इंतजाम की जरूरत

किसानों का कहना है कि अगर समय रहते फसलों को मौसम से बचाने के लिए मजबूत व्यवस्था, जोखिम प्रबंधन और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में बागवानी करने वाले हजारों परिवारों की आय पर गंभीर असर पड़ सकता है. फिलहाल प्लम की तुड़ाई जारी है, लेकिन इस बार किसानों के चेहरे पर खुशी से ज्यादा चिंता दिखाई दे रही है. अच्छी पैदावार के बावजूद मौसम की मार ने उनकी कमाई घटा दी है, जिससे घाटी के बागवान भविष्य को लेकर चिंतित हैं.

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Published: 4 Jul, 2026 | 09:13 AM

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