Poultry Farming: मुर्गी पालन आज ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से बढ़ता हुआ लाभदायक व्यवसाय बन चुका है. खेती के साथ-साथ किसान अब पोल्ट्री और लेयर फार्मिंग से नियमित आय हासिल कर रहे हैं. लेकिन कई बार सही जानकारी के अभाव में दाने की गुणवत्ता खराब होने से मुर्गियों का विकास रुक जाता है, अंडा उत्पादन घट जाता है और सीधे मुनाफे पर असर पड़ता है. बिहार पशु और मत्स्य संसाधन विभाग के अनुसार, यदि दाना खिलाने से पहले उसकी सरल देसी तरीके से जांच कर ली जाए, तो बड़े नुकसान से बचा जा सकता है.
बिना जानकारी शुरू किया व्यवसाय बन सकता है घाटे का सौदा
बिहार पशु और मत्स्य संसाधन विभाग के अनुसार, पोल्ट्री या लेयर फार्म शुरू करने से पहले प्रशिक्षण और बुनियादी तकनीकी जानकारी बेहद जरूरी है. सिर्फ मुर्गियां खरीद लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके पोषण, दाने की गुणवत्ता, पानी की स्वच्छता और प्रबंधन पर बराबर ध्यान देना चाहिए. सही जानकारी होने से बीमारी, कम उत्पादन और फीड संबंधी समस्याओं का समय रहते समाधान किया जा सकता है.
मुर्गियों के विकास में सबसे अहम है संतुलित दाना
मुर्गियों की बढ़वार और अंडा उत्पादन पूरी तरह पौष्टिक आहार पर निर्भर करता है. यदि दाने में प्रोटीन, ऊर्जा, खनिज और विटामिन संतुलित मात्रा में नहीं होंगे तो मुर्गियां कमजोर पड़ने लगती हैं. लेयर मुर्गियां कम अंडे देती हैं, जबकि ब्रॉयलर मुर्गियों का वजन अपेक्षित गति से नहीं बढ़ता. इसलिए गुणवत्तापूर्ण फीड का चयन व्यवसाय की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी माना जाता है.
विभाग के अनुसार ऐसे करें दाने की देसी जांच
दाने की प्राथमिक जांच घर पर भी की जा सकती है. इसके लिए एक साफ बाल्टी में पानी भरें और उसमें थोड़ी मात्रा में मुर्गियों का दाना डालकर अच्छी तरह मिलाएं. कुछ देर बाद देखें कि दाने का कौन-सा हिस्सा पानी में घुल रहा है. यदि अत्यधिक मात्रा में घुलनशील पदार्थ दिखाई दें, तो फीड की गुणवत्ता पर संदेह किया जा सकता है. एक्सपर्ट के अनुसार, दाने में प्रोटीन का संतुलन लगभग 10 से 12 प्रतिशत के आसपास होना चाहिए. जरूरत पड़ने पर प्रमाणित लैब से भी फीड की जांच कराई जा सकती है.
अच्छी फीड से बढ़ेगा उत्पादन और मुनाफा
मुर्गी पालन में सबसे बड़ा खर्च दाने पर आता है, इसलिए सस्ता नहीं बल्कि गुणवत्तापूर्ण फीड खरीदना अधिक लाभदायक होता है. स्वच्छ पानी, समय पर दाना, साफ शेड और संतुलित पोषण से मुर्गियां स्वस्थ रहती हैं और अंडा उत्पादन भी बेहतर होता है. एक्सपर्ट का मानना है कि दाने की नियमित जांच और सही प्रबंधन अपनाकर किसान अपने पोल्ट्री व्यवसाय की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ अधिक मुनाफा भी कमा सकते हैं.