बरसात में मुर्गी पालन की एक गलती पड़ेगी भारी! इन 5 उपायों से बचाएं हजारों का नुकसान

बरसात के मौसम में नमी, फंगस और दूषित पानी मुर्गियों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जाते हैं. पशुपालन विभाग की वैज्ञानिक सलाह अपनाकर किसान बीमारी से बचाव, बेहतर अंडा-मांस उत्पादन और कुक्कुट पालन से अधिक मुनाफा आसानी से हासिल कर सकते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 14 Aug, 2026 | 10:22 PM

Poultry Farming Tips: अगस्त और बरसात का मौसम कुक्कुट पालन के लिए सबसे संवेदनशील समय माना जाता है. इस दौरान अधिक नमी, दूषित पानी और चारे में फंगस की वजह से मुर्गियों में संक्रमण तेजी से फैल सकता है. पशुपालन विभाग के अनुसार यदि किसान साफ-सफाई, लिटर प्रबंधन, संतुलित आहार और समय पर टीकाकरण अपनाएं, तो बीमारी का खतरा कम होने के साथ उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ाए जा सकते हैं.

बरसात में क्यों बढ़ जाता है बीमारी का खतरा?

पशुपालन विभाग के अनुसार वर्षा ऋतु में पोल्ट्री शेड  के भीतर नमी तेजी से बढ़ जाती है. गीला वातावरण बैक्टीरिया, फंगस और परजीवियों के पनपने के लिए अनुकूल होता है. यदि बिछौना लंबे समय तक गीला रहे तो मुर्गियों में श्वसन रोग, पैरों के संक्रमण और उत्पादन में गिरावट की समस्या सामने आ सकती है. ऐसे में शेड में पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखना, पानी जमा न होने देना और नियमित सफाई करना बेहद जरूरी है. सूखा और स्वच्छ वातावरण मुर्गियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने में मदद करता है.

लिटर और चारे का रखें विशेष ध्यान

विभाग की सलाह है कि मुर्गियों के बिछौने (लिटर) को प्रतिदिन कम से कम एक बार उलट-पुलट करें, ताकि उसमें नमी जमा न हो. लिटर में लगभग 10 प्रतिशत मात्रा में चुना या फिटकरी का प्रयोग करने से नमी नियंत्रित रहती है और अमोनिया गैस का उत्सर्जन  भी कम होता है. बरसात के मौसम में चारे को कभी भी दीवार से सटाकर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि दीवार की नमी चारे तक पहुंचकर उसमें फंगस पैदा कर सकती है. चारे को हमेशा सूखी, हवादार और ऊंचे स्थान पर रखें. साथ ही दिन में एक बार अधिक दाना देने के बजाय दो से तीन बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दाना देना बेहतर माना जाता है.

समय पर टीकाकरण और स्वच्छ पानी जरूरी

पशुपालन विभाग के अनुसार अगस्त महीने में रानीखेत (Newcastle Disease) जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए निर्धारित टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार सभी मुर्गियों का समय पर वैक्सीनेशन कराना आवश्यक है. इससे बड़े आर्थिक नुकसान से बचाव किया जा सकता है. इसके अलावा बारिश के दिनों में पीने का पानी दूषित होने से ई. कोलाई जैसे संक्रमण फैलने  की आशंका रहती है. विभाग की सलाह है कि मुर्गियों को हमेशा साफ और उपचारित पानी ही पिलाएं. आवश्यकता होने पर 1000 लीटर पानी में 2 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर मिलाकर पानी को उपचारित किया जा सकता है.

वैज्ञानिक प्रबंधन से बढ़ेगा उत्पादन और मुनाफा

विशेषज्ञों के अनुसार बरसात में छोटी-छोटी सावधानियां कुक्कुट पालन  को अधिक लाभदायक बना सकती हैं. शेड की नियमित सफाई, सूखा लिटर, संतुलित पोषण, स्वच्छ पानी और समय पर टीकाकरण अपनाने से मुर्गियों की मृत्यु दर कम होती है और अंडा तथा मांस उत्पादन बेहतर रहता है. पशुपालन विभाग का कहना है कि वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन अपनाने वाले किसानों को बीमारी पर होने वाला खर्च घटता है, जबकि उत्पादन बढ़ने से कुक्कुट पालन का व्यवसाय अधिक टिकाऊ और लाभदायक बन जाता है.

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Published: 14 Aug, 2026 | 10:22 PM

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