Rain in Punjab and Haryana: आसमान से बरसी बूंदों ने पंजाब और हरियाणा के खेतों में किसानों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है. कहीं धान की फसल पानी और नमी पाकर तेजी से बढ़ रही है, तो कहीं कमजोर पड़ रही बाजरे की फसल में फिर से जान लौट आई है. लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने किसानों की सिंचाई की चिंता कुछ कम कर दी है. खेतों में नमी बढ़ने से ट्यूबवेल कम चलाने पड़ रहे हैं, जिससे बिजली और सिंचाई का खर्च घटने की उम्मीद है. साथ ही बारिश के पानी से भूजल रिचार्ज होने की भी संभावना बढ़ी है.
धान की फसल को बारिश से मिली बड़ी राहत
पंजाब और हरियाणा में इस समय खेतों में धान की फसल खड़ी है. पिछले कुछ दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश ने फसल के लिए जरूरी नमी बनाए रखी है. इससे किसानों को बार-बार ट्यूबवेल चलाकर खेतों की सिंचाई नहीं करनी पड़ रही है. किसानों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में भी बारिश का सिलसिला बना रहा तो धान की पैदावार और गुणवत्ता दोनों बेहतर हो सकती हैं. बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ने के साथ पौधों की जड़ों को पर्याप्त पानी मिल रहा है. इससे फसल की बढ़वार तेज होने की उम्मीद है. बारिश का पानी खेतों में पहुंचने से भूजल स्तर को भी फायदा मिलने की संभावना है.
बाजरा समेत दूसरी फसलों में भी लौटी हरियाली
बारिश का फायदा सिर्फ धान तक सीमित नहीं है. मक्का, बाजरा और दूसरी खरीफ फसलों को भी इससे राहत मिली है. लंबे समय तक बारिश नहीं होने से कुछ इलाकों में बाजरे की फसल कमजोर पड़ने लगी थी. दाना बनने पर असर पड़ रहा था और कीटों का प्रकोप भी बढ़ रहा था. लेकिन हाल की बारिश के बाद किसानों को फसल में दोबारा तेजी से बढ़वार दिखाई दे रही है. कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक पर्याप्त नमी से मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता बेहतर होती है और पौधों की जड़ों का विकास भी अच्छा रहता है. बारिश पौधों पर जमी धूल और गंदगी को हटाकर उनके स्वास्थ्य में भी सुधार करती है.
सिंचाई खर्च घटने से किसानों को दोहरा फायदा
बारिश ने किसानों की जेब पर भी राहत की उम्मीद जगाई है. खेतों में पर्याप्त नमी रहने से ट्यूबवेल कम चलाने पड़ रहे हैं. इससे सिंचाई के लिए होने वाली बिजली की खपत घट सकती है. साथ ही लगातार ट्यूबवेल चलाने की जरूरत कम होने से भूजल दोहन पर भी दबाव कम होगा. किसानों का कहना है कि फसल के अहम दौर में समय पर हुई बारिश किसी राहत से कम नहीं है. अंबाला समेत कई इलाकों में किसानों ने बारिश को ‘सोने जैसी’ बताया है. उनका मानना है कि अगर मानसून आगे भी साथ देता रहा तो उत्पादन बेहतर होने के साथ खेती की लागत में भी कमी आ सकती है.
बारिश की कमी अभी भी बनी चुनौती
हालांकि पंजाब और हरियाणा में हाल की बारिश ने किसानों को राहत दी है, लेकिन दोनों राज्यों में अभी भी बारिश की कमी बनी हुई है. मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल पंजाब और हरियाणा में करीब 30 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है. हरियाणा के जींद, पानीपत, सोनीपत, महेंद्रगढ़ और पंचकूला जैसे जिलों में सामान्य से करीब 50 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है. पंजाब में बठिंडा, फरीदकोट, मानसा और संगरूर जैसे जिले भी बारिश की कमी से जूझ रहे हैं. ऐसे में किसानों की निगाहें आने वाले दिनों के मौसम पर टिकी हैं. अगर मानसून की बारिश का वितरण बेहतर रहता है तो धान समेत दूसरी खरीफ फसलों को फायदा मिलने के साथ भूजल रिचार्ज और सिंचाई लागत में कमी का लाभ भी किसानों को मिल सकता है.