बारिश में भेड़-बकरियों पर मंडराया ब्लू टंग का खतरा, गंदगी और मक्खियों से बढ़ी बीमारी की चिंता

बारिश में पशुबाड़े की गंदगी और नमी भेड़-बकरियों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है. कुलिकोइड्स मक्खी के काटने से ब्लू टंग बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है. तेज बुखार, मुंह में छाले, सूजन और नीली जीभ दिखे तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 8 Aug, 2026 | 08:01 PM

Blue Tongue Disease Prevention: बरसात का मौसम भेड़-बकरियों के लिए सिर्फ चारा और पानी की समस्या नहीं लाता, बल्कि कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है. पशुपालन विभाग के अनुसार, बारिश के दौरान पशुबाड़े में नमी, गंदगी और पानी जमा रहने से मक्खियों की संख्या बढ़ सकती है. इसी दौरान कुलिकोइड्स मक्खी के काटने से भेड़-बकरियों में ब्लू टंग बीमारी फैलने का खतरा रहता है. बीमारी का असर खासकर भेड़ों में गंभीर हो सकता है. इसलिए पशुपालकों को बरसात में पशुबाड़े की सफाई और कीट नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना चाहिए.

तेज बुखार से नीली जीभ तक, ऐसे पहचानें बीमारी

ब्लू टंग वायरस से होने वाली बीमारी है. संक्रमित पशु  में शुरुआत में अचानक तेज बुखार आ सकता है. इसके बाद होंठ, मसूड़ों, मुंह और चेहरे पर सूजन दिखाई देने लगती है. रक्त संचार प्रभावित होने पर जीभ नीली या बैंगनी रंग की दिखाई दे सकती है. इसी वजह से इसे ‘ब्लू टंग’ कहा जाता है. मुंह में छाले और घाव होने के कारण पशु के मुंह से ज्यादा लार गिर सकती है. नाक से पहले पानी जैसा और बाद में गाढ़ा स्राव भी निकल सकता है. पशु सुस्त पड़ जाता है और चारा खाना कम कर देता है. बीमारी बढ़ने पर खुरों के आसपास सूजन और लंगड़ापन भी देखने को मिल सकता है.

बीमारी बढ़ी तो पशुपालक को हो सकता है बड़ा नुकसान

ब्लू टंग का असर गंभीर होने पर पशु तेजी से कमजोर  होने लगता है और उसका वजन घट सकता है. दूध देने वाले पशुओं में दूध उत्पादन कम हो सकता है. गर्भवती पशुओं में गर्भपात का खतरा भी बना रहता है. गंभीर संक्रमण की स्थिति में पशु की मौत तक हो सकती है. पशुपालन विभाग की सलाह है कि बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. खासतौर पर जब पशु खाना छोड़ दे, तेज बुखार हो, मुंह में घाव दिखाई दें या जीभ का रंग बदलने लगे, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.

बाड़े में गंदगी और पानी जमा न होने दें

बरसात में पशुपालकों  को पशुबाड़े के आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए. नियमित रूप से गोबर और गंदगी हटाएं तथा बाड़े को सूखा और साफ रखने की कोशिश करें. मक्खियों और दूसरे कीटों को नियंत्रित करने के लिए पशु चिकित्सक या विभागीय कर्मियों की सलाह से उचित कीटनाशक का इस्तेमाल किया जा सकता है. जिन क्षेत्रों में ब्लू टंग का खतरा अधिक रहता है, वहां विभाग की सलाह के अनुसार समय पर टीकाकरण भी कराया जाना चाहिए. यदि किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो उसे स्वस्थ पशुओं से अलग रखें, ताकि संक्रमण फैलने का खतरा कम किया जा सके.

लक्षण दिखें तो खुद से दवा न दें

पशु चिकित्सकों के अनुसार ब्लू टंग वायरस से होने वाली बीमारी है, इसलिए शुरुआती सपोर्टिव देखभाल महत्वपूर्ण होती है. मुंह के छालों और घावों  की सफाई के लिए पशु चिकित्सक की सलाह से पोटेशियम परमैंगनेट यानी लाल दवा के घोल का इस्तेमाल किया जा सकता है. जरूरत के अनुसार एंटीइन्फ्लेमेटरी, एंटीहिस्टामिनिक और मल्टीविटामिन जैसी दवाएं भी डॉक्टर की सलाह से दी जा सकती हैं. पशु को पर्याप्त पौष्टिक आहार और खनिज मिश्रण देना भी जरूरी है. सबसे अहम बात यह है कि पशुपालक अपनी ओर से कोई दवा न दें. लक्षण दिखाई देते ही नजदीकी पशु चिकित्सक या पशुपालन विभाग से संपर्क करें. बरसात में साफ-सफाई, कीट नियंत्रण और समय पर उपचार ही पशुओं को इस बीमारी से बचाने की सबसे अहम तैयारी है.

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Published: 8 Aug, 2026 | 08:01 PM

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