मध्य प्रदेश में मॉनसून के रूखे रवैये ने खेती को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. भोपाल मौसम केंद्र के अनुसार राज्य में अब तक सामान्य से 19 फीसदी कम बारिश हुई है. इससे राज्य के 49 जिले बुरी तरह प्रभावित हैं. ऐसे में खरीफ फसलों को खतरा बढ़ गया है. सर्वाधिक चिंता धान, सोयाबीन, मक्का, उड़द, कपास और तिल फसलों को लेकर जताई जा रही है. बारिश कम होने से किसानों का सिंचाई पर होने वाला खर्च बढ़ गया है. जबकि, सूखा स्थिति से उत्पादन घटने और क्वालिटी गिरने का संकट भी खड़ा हो गया है. ऐसे में किसानों को नुकसान से बचने के लिए कृषि सलाह जारी की गई है.
सामान्य से 19 फीसदी कम बारिश ने बढ़ाई मुश्किल
मध्य प्रदेश में मॉनसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से काफी कम बारिश होने के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं. भोपाल मौसम केंद्र के अनुसार अब तक प्रदेश में 16.3 इंच बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक 20 इंच बारिश होनी चाहिए थी. यानी मध्य प्रदेश में करीब 19 फीसदी कम बारिश हुई है. बारिश की कमी का असर प्रदेश के 49 जिलों में देखने को मिल रहा है. केवल 6 जिलों में ही औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है.
कम बारिश वाले इलाकों में ये संभाग शामिल
मौसम केंद्र के अनुसार राजधानी भोपाल, जबलपुर, सागर, शहडोल, रीवा और नर्मदापुरम संभाग के सभी जिले सामान्य से कम बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल हैं. वहीं इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और चंबल संभाग के कुछ जिलों में औसत से अधिक बारिश हुई है. बारिश की यह स्थित कृषि के लिए संकट पैदा कर रही है. जबकि, पशुपालकों के लिए पौष्टिक चारे की उपलब्धता को भी मुश्किल बना रही हैं.
इन फसलों की बढ़वार और अंकुरण पर खतरा बढ़ा
मध्य प्रदेश के 49 जिलों में सामान्य से करीब 19 फीसदी कम बारिश से खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. यदि अगले कुछ दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं होती है, तो धान, सोयाबीन, मक्का, उड़द, मूंग, कपास और तिल जैसी फसलों की बढ़वार धीमी पड़ सकती है. नमी की कमी के कारण बीजों का अंकुरण प्रभावित हो सकता है, पौधों की जड़ें कमजोर रह सकती हैं, फूल और फल बनने की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है. इसके नतीजे में उत्पादन में गिरावट आने का खतरा बढ़ जाएगा.
किसानों को कृषि सलाह में क्या कहा गया
कम बारिश से उपजी चुनौतियों से निपटने के लिए किसानों कृषि सलाह में कहा गया है कि उपलब्ध सिंचाई संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए फसल के लिए जीवनरक्षक सिंचाई करनी जरूरी है. बारिश के भरोसे रहने पर फसल पूरी तरह चौपट हो सकती है. खेतों में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग, निराई-गुड़ाई और मेड़बंदी जैसे उपाय किसानों को अपनाने चाहिए, ताकि पानी का संरक्षण हो सके. अभी भी बुवाई के लिए नमी का इंतजार करने वाले किसानों को कम पाली लागत वाली और जल्दी पकने वाली सूखा सहनशील किस्मों का चयन करना होगा.