राजस्थान में रेजिड्यू फ्री जीरे की खेती से किसानों की बढ़ी कमाई, बाजार से मिल रहा 25 फीसदी ज्यादा भाव

पश्चिमी राजस्थान में DBT की पहल से रेजिड्यू फ्री जीरे की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रही है. IPM और बेहतर कृषि पद्धतियों से उगाए गए जीरे पर किसानों को बाजार से 25 फीसदी तक अधिक कीमत मिल रही है. फिलहाल 35 हजार टन उत्पादन हो रहा है, जिसे बढ़ाकर 1 लाख टन तक पहुंचाने की योजना है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 7 Aug, 2026 | 10:53 AM

Cumin Cultivation: पश्चिमी राजस्थान के जीरा किसानों के लिए अच्छी खबर है. जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) की एक पहल के तहत किसान अब रेजिड्यू फ्री (बिना हानिकारक कीटनाशक अवशेष वाला) जीरा उगा रहे हैं. इस मॉडल में एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) और अच्छी कृषि पद्धतियों (GAP) को अपनाकर किसानों ने सुरक्षित जीरे का उत्पादन किया. इसकी वजह से किसानों को बाजार भाव की तुलना में करीब 25 प्रतिशत अधिक कीमत मिल रही है.

यह पहल DBT की वित्तपोषित बायोटेक-किसान हब फॉर द वेस्टर्न ड्राई रीजन परियोजना के तहत चलाई गई. इसे साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC), जोधपुर और आईसीएआर-राष्ट्रीय बीज मसाला अनुसंधान केंद्र (NRCSS), अजमेर ने मिलकर लागू किया. इस परियोजना के तहत जीरे की खेती से लेकर उसकी मार्केटिंग तक एक समग्र मॉडल विकसित किया गया. फिलहाल 35,000 टन रेजिड्यू फ्री जीरे का उत्पादन  हो रहा है, जिसे बढ़ाकर 1 लाख टन तक ले जाने की संभावना जताई गई है.

किसानों को ट्रेनिंग से लेकर खरीद की गारंटी तक

इस परियोजना के तहत 2019 से 2024 के बीच पश्चिमी राजस्थान के प्रमुख जीरा उत्पादक जिलों में किसानों को IPM आधारित खेती की ट्रेनिंग, खेतों में प्रदर्शन, बेहतर खेती के तरीके, कृषि इनपुट और पौध संरक्षण उत्पाद उपलब्ध कराए गए. साथ ही किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के जरिए कंपनियों और निर्यातकों से बाय-बैक व्यवस्था भी कराई गई, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में दिक्कत न हो.

बेहतर उत्पादन के साथ मिला प्रीमियम भाव

साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC) के संस्थापक निदेशक भागीरथ चौधरी ने बिजनेसलाइन से कहा कि IPM तकनीक से उगाए गए जीरे के लिए किसानों को औसतन 24 प्रतिशत अधिक कीमत मिली. वहीं, फफूंद और कीटों के बेहतर नियंत्रण के कारण प्रति एकड़ खेती की लागत 25 से 35 प्रतिशत तक कम हुई. उन्होंने कहा कि जैसे महाराष्ट्र ने IPM तकनीक के जरिए अंगूर की खेती  में नई पहचान बनाई, उसी तरह राजस्थान अब रेजिड्यू फ्री जीरे की खेती का सफल मॉडल बनकर उभर रहा है. विज्ञान आधारित और क्षेत्र के अनुसार तैयार की गई IPM तकनीक किसानों को रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भर खेती से निकालकर अधिक मूल्य वाली, निर्यात योग्य और सुरक्षित जीरा उत्पादन की ओर ले जा रही है.

35 हजार टन से 1 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य

DBT के बायोटेक किसान हब की मदद से किसानों ने रेजिड्यू फ्री IPM जीरे का उत्पादन बढ़ाकर करीब 35 हजार टन कर दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर 1 लाख टन तक किया जा सकता है. साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC) के संस्थापक निदेशक भागीरथ चौधरी ने कहा कि यूरोप, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे देशों में रेजिड्यू फ्री और ऑर्गेनिक जीरे की मांग लगातार बढ़ रही है. वहीं, मसाला कंपनियों की सक्रिय भागीदारी से राजस्थान गुणवत्ता वाले जीरे के निर्यात का बड़ा केंद्र बन सकता है. इससे किसानों की आय बढ़ेगी और टिकाऊ खेती को भी बढ़ावा मिलेगा.

मसाला बोर्ड और उद्योग से सहयोग की अपील

वहीं, आईसीएआर-राष्ट्रीय बीज मसाला अनुसंधान केंद्र (NRCSS), अजमेर के निदेशक विनय भारद्वाज ने कहा कि IPM में इस्तेमाल हने वाले जैव उत्पाद (बायो फॉर्मूलेशन) प्रभावी साबित हो चुके हैं. अब इस मॉडल को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए वित्तीय सहायता  की जरूरत है. उन्होंने कहा कि मसाला बोर्ड, उद्योग, निजी कंपनियां और अनुसंधान संस्थानों को मिलकर इस पहल को आगे बढ़ाना चाहिए.

क्या होती है रेजिड्यू फ्री खेती

रेजिड्यू फ्री (अवशेष-मुक्त) खेती ऐसी खेती है, जिसमें फसल उगाने के दौरान जरूरत के अनुसार आधुनिक तकनीक और कृषि उपाय अपनाए जाते हैं. यदि रसायनों का इस्तेमाल किया भी जाता है, तो तय मानकों और सही समय पर किया जाता है, ताकि फसल की कटाई तक उसमें कीटनाशकों या अन्य रसायनों के हानिकारक अवशेष न रहें. इससे फसल सुरक्षित होती है, उसकी गुणवत्ता बेहतर होती है और उसे घरेलू के साथ-साथ निर्यात बाजार में भी अच्छी कीमत मिलती है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 7 Aug, 2026 | 10:49 AM

लेटेस्ट न्यूज़