जीरे के निर्यात को बड़ा झटका, चीन की घटती मांग से भारत की कमाई में करीब 28 फीसदी की गिरावट

India Cumin Export 2026: भारत के जीरे के निर्यात को इस साल बड़ा झटका लगा है क्योंकि दुनिया में इसकी मांग घट गई है, खासकर चीन की खरीद बहुत कम हो गई है. 2025-26 में भारत ने पिछले साल की तुलना में कम जीरा निर्यात किया और उससे होने वाली कमाई भी करीब 28 फीसदी तक घट गई.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 20 Jun, 2026 | 10:07 AM

Jeera Export Decline 2026: भारत दुनिया के सबसे बड़े जीरा उत्पादक और निर्यातक देशों में गिना जाता है, लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 में जीरे के निर्यात को बड़ा झटका लगा है. इसकी सबसे बड़ी वजह चीन की ओर से खरीद में आई भारी गिरावट रही. चीन भारतीय जीरे का प्रमुख खरीदार रहा है, लेकिन इस बार वहां से मांग कम होने के कारण निर्यात की मात्रा और कमाई दोनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.

आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने करीब 1.96 लाख टन जीरे का निर्यात किया, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 2.29 लाख टन था. यानी निर्यात की मात्रा में लगभग 14 फीसदी की कमी आई. वहीं निर्यात से होने वाली कमाई में और भी बड़ी गिरावट (28 फीसदी) देखने को मिली है.

कम हुआ निर्यात, घटी कमाई

डॉलर के हिसाब से देखें तो जीरे के निर्यात से भारत को 524 मिलियन डॉलर की आय हुई, जबकि एक साल पहले यह 732.35 मिलियन डॉलर थी. भारतीय मुद्रा में यह कमाई घटकर 4,611 करोड़ रुपये रह गई, जो पिछले साल के 6,178 करोड़ रुपये से करीब 28 फीसदी कम है. मांग घटने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर भी दबाव रहा, जिसका असर कुल निर्यात मूल्य पर पड़ा.

चीन ने क्यों घटाई खरीद?

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, मसाला कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों ने बताया कि, पिछले साल चीन में जीरे की अच्छी पैदावार हुई थी. वहां करीब 85,000 से 90,000 टन तक उत्पादन होने के कारण चीन को भारत से ज्यादा खरीदारी की जरूरत नहीं पड़ी. यही वजह रही कि चीन को होने वाला भारतीय जीरे का निर्यात 38,721 टन से घटकर सिर्फ 9,271 टन रह गया. यानी खरीद में करीब 76 फीसदी की गिरावट आई. मूल्य के लिहाज से भी चीन को निर्यात 114.51 मिलियन डॉलर से घटकर 22.81 मिलियन डॉलर पर आ गया.

पश्चिम एशिया में तनाव का भी पड़ा असर

जीरे के निर्यात पर सिर्फ चीन की मांग कम होने का असर नहीं पड़ा, बल्कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव ने भी कारोबार को प्रभावित किया. ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े तनाव के कारण मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका के कई बाजारों में व्यापार की रफ्तार धीमी रही.

इसका असर संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बांग्लादेश, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे प्रमुख खरीदार देशों में भी देखने को मिला, जहां भारतीय जीरे की मांग पहले के मुकाबले कमजोर रही.

तुर्किये बना नया बड़ा खरीदार

जहां कई देशों में मांग घटी, वहीं तुर्की भारत के लिए एक उभरता हुआ बाजार बनकर सामने आया. वित्त वर्ष 2025-26 में तुर्की को जीरे का निर्यात पांच गुना से अधिक बढ़ गया. जानकारों का कहना है कि तुर्की में मिट्टी की उर्वरता से जुड़ी समस्याओं के कारण जीरे की खेती प्रभावित हुई है. वहीं सीरिया की फसल भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही. ऐसे में तुर्की ने अपनी जरूरत पूरी करने के लिए भारत का रुख किया.

आगे क्या है उम्मीद?

मसाला उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि आने वाले महीनों में निर्यात की स्थिति कुछ बेहतर हो सकती है. हालांकि चीन में इस साल भी अच्छी फसल होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे वहां से मांग सीमित रह सकती है. दूसरी ओर, पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने और नए बाजारों में मांग बढ़ने पर भारतीय जीरे के निर्यात को फिर से रफ्तार मिल सकती है. फिलहाल जीरा कारोबारियों और किसानों की नजर वैश्विक बाजार की गतिविधियों पर टिकी हुई है.

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