पराली पर सख्ती बढ़ी! दोपहर 3 से रात 9 बजे तक खेतों पर उड़ेंगे ड्रोन.. होगी सख्त कार्रवाई
हरियाणा के पानीपत में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सितंबर से ड्रोन निगरानी शुरू होगी. धान कटाई तक ड्रोन खेतों की रियल-टाइम निगरानी करेंगे. प्रशासन बेलर मशीनें उपलब्ध कराएगा, जागरूकता अभियान चलाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा.
अभी कई राज्यों में धान की रोपाई चालू है, लेकिन हरियाणा में इस बार अभी से ही प्रशासन ने पराली जलाने की घटनाओं पर लगाम लगाने की तैयारी शुरू कर दी है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देश पर हरियाणा के पानीपत जिला प्रशासन ने पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए ड्रोन निगरानी की तैयारी शुरू कर दी है. यह तकनीक आधारित रियल-टाइम निगरानी व्यवस्था सितंबर से शुरू होगी और धान की कटाई पूरी होने तक जारी रहेगी. ड्रोन के जरिए खेतों की निगरानी कर पराली जलाने की घटनाओं का तुरंत पता लगाया जाएगा.
अधिकारियों के अनुसार, इस साल पानीपत जिले में करीब 2.70 लाख एकड़ में धान की बुवाई हुई है और सितंबर से कटाई शुरू होने की संभावना है. पिछले कुछ वर्षों में जिले में खरीफ सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं में लगातार कमी दर्ज की गई है. कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, पानीपत जिले में पराली जलाने की घटनाओं में लगातार कमी आई है. वर्ष 2024 में पराली जलाने के 17 मामले सामने आए थे, जबकि 2025 में यह संख्या घटकर सिर्फ 2 रह गई.
सितंबर- अक्टूबर से शुरू हो जाएगी धान की कटाई
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के एसडीओ देवेंद्र कुहार ने द ट्रिब्यून से कहा कि पूसा-1509 और अन्य जल्दी पकने वाली धान की किस्मों की कटाई सितंबर के आखिर या अक्टूबर के पहले सप्ताह में शुरू होने की संभावना है. वहीं, देर से पकने वाली किस्मों की कटाई नवंबर में होगी. उन्होंने बताया कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए विस्तृत माइक्रो प्लान तैयार किया गया है. इसके तहत कक्षा 8 से 12 तक के छात्रों के लिए स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे. साथ ही गांवों के सरपंच, पंचायत सदस्यों और सचिवों के साथ बैठकें की जाएंगी. किसानों को जागरूक करने के लिए सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे और प्रचार सामग्री भी वितरित की जाएगी.
40 हजार एकड़ में देर से पकने वाली धान की खेती
जिला प्रशासन ने कहा है कि धान की कटाई के दौरान किसानों को बेलर मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि पराली का उचित प्रबंधन किया जा सके. साथ ही किसानों और कृषि मशीन मालिकों को शपथ पत्र देना होगा कि उनके खेतों में पराली नहीं जलाई गई है. कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पराली जलाने की सबसे अधिक आशंका नवंबर में रहती है. इस समय देर से पकने वाली धान की फसल की कटाई होती है और किसान गेहूं की समय पर बुवाई के लिए जल्दबाजी में खेत खाली करने की कोशिश करते हैं. जिले में करीब 40 हजार एकड़ में देर से पकने वाली धान की खेती की गई है.
ड्रोन रोजाना दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक उड़ान भरेंगे
उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि जिला प्रशासन वायु गुणवत्ता सुधारने और पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. इसी उद्देश्य से पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी और जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ड्रोन निगरानी का उद्देश्य किसानों को दंडित करना नहीं, बल्कि पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकना है. ड्रोन रोजाना दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक संवेदनशील इलाकों में उड़ान भरेंगे. यदि कहीं पराली जलाने की घटना होती है तो ड्रोन उसकी फोटो, वीडियो और जीपीएस लोकेशन संबंधित विभागों को तुरंत भेजेंगे, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके.
फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सरकार की तैयारी
उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने किसानों से अपील की है कि वे पराली न जलाएं और फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जा रही मशीनों और तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग करें. उन्होंने कहा कि जो लोग जानबूझकर पराली जलाकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएंगे, उनके खिलाफ नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी. साथ ही प्रशासन किसानों के सहयोग से पानीपत को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए लगातार काम करेगा.