E20 पेट्रोल से टेंशन में सेब किसान! मशीनें हो रहीं कमजोर.. खेती में बढ़ गई लागत

हिमाचल के सेब किसानों ने E20 पेट्रोल पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि इससे बागानों में इस्तेमाल होने वाली स्प्रेयर, पावर वीडर और अन्य मशीनों की क्षमता घट रही है, रखरखाव का खर्च बढ़ रहा है और खराबी जल्दी आ रही है. किसानों ने सामान्य पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराने और E20 को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की मांग की है.

नोएडा | Updated On: 14 Jul, 2026 | 07:58 AM

E20 Petrol: हिमाचल प्रदेश के सेब किसानों ने E20 (20 फीसदी इथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि इस ईंधन से बागानों में इस्तेमाल होने वाली मशीनें पहले जैसी क्षमता से काम नहीं कर रही हैं. इससे मशीनों का रखरखाव महंगा हो रहा है, खराबी बढ़ रही है और किसानों की लागत भी बढ़ने लगी है. किसानों के मुताबिक, सेब के बागानों में इस्तेमाल होने वाले स्प्रेयर, ब्रश कटर, पावर वीडर और टिलर जैसी ज्यादातर मशीनें पेट्रोल से चलती हैं. E20 पेट्रोल का ज्यादा असर पुराने मॉडल और टू-स्ट्रोक इंजन वाली मशीनों पर पड़ रहा है, क्योंकि इन्हें इस तरह के ईंधन के हिसाब से नहीं बनाया गया था. इससे मशीनों की कार्यक्षमता और उनकी उम्र दोनों प्रभावित हो रही हैं.

रोहड़ू के सेब उत्पादक लोकिंदर बिष्ट ने ‘द ट्रिब्यून’ से कहा कि E20 पेट्रोल  इस्तेमाल करने से कृषि मशीनों का माइलेज कम हो रहा है. यानी पहले के मुकाबले एक लीटर पेट्रोल में मशीनें कम काम कर रही हैं. उनका दावा है कि इथेनॉल की अधिक मात्रा से मशीनों के रबर सील, फ्यूल पाइप और फिल्टर भी खराब हो सकते हैं. इससे मशीनों की मरम्मत और रखरखाव का खर्च बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर किसानों की लागत और मुनाफे पर पड़ रहा है.

इथेनॉल के कारण इन मशीनों की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही

वहीं, एमटेक डिग्रीधारी किसान योगिंदर शर्मा ने कहा कि बागानों में इस्तेमाल होने वाली ज्यादातर छोटी कृषि मशीनें  टू-स्ट्रोक इंजन से चलती हैं. उनके अनुसार, ये इंजन E20 पेट्रोल के लिए उपयुक्त नहीं हैं. ज्यादा इथेनॉल होने के कारण इन मशीनों की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है और वे जल्दी खराब हो रही हैं. योगिंदर शर्मा ने आरोप लगाया कि अगर मशीन खराब होने की वजह E20 पेट्रोल बताई जाती है, तो कई कंपनियां वारंटी का दावा भी स्वीकार नहीं करतीं. उन्होंने कहा कि उनकी नई पावर वीडर मशीन से ज्यादा धुआं निकलने लगा था. जब उन्होंने कंपनी से संपर्क किया तो कंपनी ने इसकी वजह इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बताई और वारंटी देने से इनकार कर दिया.

नई मशीन खरीदने का खर्च नहीं उठा सकते किसान

उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसान बार-बार महंगी मशीनों की मरम्मत या नई मशीन खरीदने का खर्च नहीं उठा सकते. अगर E20 लागू करना जरूरी था तो सरकार को इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करना चाहिए था. वहीं, रोहड़ू के एक अन्य सेब उत्पादक डिंपल पांजटा ने सरकार से मांग की कि लोगों को सामान्य पेट्रोल और E20 पेट्रोल में से अपनी जरूरत के अनुसार विकल्प चुनने की सुविधा मिलनी चाहिए.

कृषि मशीनों के लिए E20 पेट्रोल उपयुक्त नहीं

उनका कहना था कि कई कृषि मशीनों के लिए E20 पेट्रोल उपयुक्त नहीं है और उन्हें लगता है कि प्रीमियम पेट्रोल में इथेनॉल  कम होता है. हालांकि, शिमला के पेट्रोल पंप संचालक अमित नंदा ने इस धारणा को गलत बताया. उन्होंने कहा कि सामान्य और प्रीमियम दोनों पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा समान होती है. फर्क सिर्फ इतना है कि प्रीमियम पेट्रोल की ऑक्टेन रेटिंग अधिक होती है और उसमें इंजन के प्रदर्शन को बेहतर बनाने वाले अतिरिक्त एडिटिव्स मिलाए जाते हैं.

Published: 14 Jul, 2026 | 07:51 AM

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