क्या E20 पेट्रोल वाकई नुकसानदायक है… ISMA ने विपक्ष के दावों को बताया भ्रामक, जानिए पूरा मामला

E20 इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच ISMA ने कहा है कि चर्चा वैज्ञानिक तथ्यों और आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित होनी चाहिए. एसोसिएशन ने तमाम दावों को भ्रामक बताया है. लेकिन उस भ्रम को हटाने के लिए अपनी तरफ से कोई प्रमाण पेश नहीं किया है.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 8 Jul, 2026 | 03:22 PM

भारत में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E20 को लेकर बहस तेज हो गई है. सोशल मीडिया पर जहां कुछ लोग इसके इस्तेमाल से वाहन खराब होने, माइलेज घटने और अन्य समस्याओं के दावे कर रहे हैं, वहीं इथेनॉल उद्योग इसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय और स्वच्छ ईंधन की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है.

इसी बहस के बीच भारतीय चीनी एवं बायो-एनर्जी निर्माता संघ (ISMA) ने अपील की है कि इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर सार्वजनिक चर्चा वैज्ञानिक तथ्यों, आधिकारिक आंकड़ों और प्रमाणित जानकारी के आधार पर होनी चाहिए. ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि भारत का इथेनॉल कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा, किसानों के हित और स्वच्छ परिवहन को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण कदम है. हालांकि इस्मा ने अपनी प्रेस रिलीज में कहीं किसी वैज्ञानिक के हवाले से कोई दावा नहीं किया है. यह भी समझना होगा कि इस्मा का हित इथेनॉल से जुड़ा है, ऐसे में उनकी यह अपील अपने हित में की गई दिखाई देती है.

ISMA का कहना है कि E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर कई ऐसे दावे किए जा रहे हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. हाल में कुछ दावे किए गए हैं कि इससे वाहन खराब हो सकते हैं, कीड़े आकर्षित होते हैं, बीमा अमान्य हो जाता है या पेट्रोल में सीधे गन्ने का रस मिलाया जाता है. एसोसिएशन ने इन दावों को गलत और भ्रामक बताया है.

ISMA के मुताबिक, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत का इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम वैज्ञानिक जांच, परीक्षण और लगातार निगरानी के बाद लागू किया गया है. समस्या यह है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के स्पष्टीकरण को और मजबूत करने के लिए इस्मा ने अपनी तरफ से कुछ और नहीं किया है. सिर्फ मंत्रालय की बात को ही आगे बढ़ाया है.

यह सच है सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि E20 लागू होने के बाद इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण इंजन फेल होने या बड़े स्तर पर वाहन खराब होने की कोई घटना सामने नहीं आई है. लेकिन विपक्षी दावों को देखें, तो इसे लेकर उपभोक्ताओं में भरोसे के लिए कुछ नहीं किया गया.
राजनीतिक तौर पर आम आदमी पार्टी की तरफ से लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस की जा रही हैं. पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि अगर ऐसी घटना नहीं आई है, तो कंपनियां इस बारे में उपभोक्ताओं को गारंटी क्यों नहीं दे रही हैं. केजरीवाल ने कहा है कि उन्होंने कई कंपनियों को इस बारे में पत्र भी लिखा है.

क्या पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाया जा रहा है

सोशल मीडिया पर एक दावा यह भी किया जा रहा है कि पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाया जा रहा है. ISMA ने इसे पूरी तरह गलत बताया है. यहां पर भी मंत्रालय की तरफ से आए स्पष्टीकरण को आगे बढ़ाने के लिए कोई अतिरिक्त जानकारी नहीं दी है. उनके मुताबिक इथेनॉल उत्पादन एक औद्योगिक प्रक्रिया है. इसमें गन्ने का रस, शीरा, मक्का, टूटे चावल और अन्य कृषि उत्पादों को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

इसके बाद Fermentation और Distillation जैसी प्रक्रियाओं से फ्यूल ग्रेड इथेनॉल तैयार किया जाता है. यह तैयार इथेनॉल पेट्रोल में मिलाने से पहले निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा करता है. हालांकि इसे लेकर ज्यादातर लोगों को संदेह नहीं होना चाहिए. गन्ने के रस जैसी बात कभी विश्वसनीय नहीं रही. मूल मुद्दा गाड़ी खराब होने और माइलेज कम होने का है.

E20 और वाहन सुरक्षा को लेकर विवाद

E20 के विरोध में सबसे बड़ा सवाल वाहनों की सुरक्षा को लेकर उठाया जा रहा है. ISMA का कहना है कि वाहन निर्माता कंपनियां, तेल कंपनियां, भारतीय वाहन निर्माता संगठन (SIAM), फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री (FIPI), तेल विपणन कंपनियां और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) E20 की सुरक्षा को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट कर चुके हैं.

उद्योग का कहना है कि E20 से वाहन खराब होने की चिंताएं मुख्य रूप से गलत जानकारी और भ्रम पर आधारित हैं. हालांकि, तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने वाहन, जो कम इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल के लिए डिजाइन किए गए थे, उनमें लंबे समय में कुछ बदलावों की जरूरत हो सकती है. समस्या यही है कि हर दो साल में गाड़ी बदलना आम लोगों के लिए संभव नहीं है. अभी जो गाड़ियां सड़क पर हैं, उनमें ज्यादातर पुरानी हैं, जिन्हें ई 20 की तरफ जाने के लिए नई गाड़ी लेने का इंतजार करना होगा.
यह सही है कि इथेनॉल के पक्ष में बैटिंग करने वाले बता रहे हैं कि गाड़ी को नुकसान नहीं होगा. लेकिन इस बात की क्या गारंटी है, इसका जवाब नहीं है. विपक्ष की तरफ से मुख्य सवाल यही है कि गाड़ियों में जब साफतौर पर यह गारंटी नहीं है कि यह ई20 कंप्लायंट है, तो सिर्फ किसी के कहने पर इसे कैसे माना जाए.

नए वाहन अब E20 अनुकूल बनाए जा रहे हैं, यह बात बताई जा रही है. सवाल यही है कि पेट्रोल पंप पर ई10 और ई20 के विकल्प क्यों नहीं हैं. जैसे-जैसे नई गाड़ियां आती जाएं, उनके लिए ई20 अनिवार्य कर दिया जाए. भले ही यह सच हो कि इंजन या गाड़ी पर कोई बुरा असर नहीं होगा, लेकिन इसे लेकर कोई पुख्ता प्रमाण अभी तक किसी ने नहीं दिया है.

माइलेज पर क्या है स्थिति

E20 को लेकर एक प्रमुख चिंता माइलेज में कमी की है. इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होती है. इसलिए वैज्ञानिक रूप से यह संभव है कि E20 मिश्रण वाले पेट्रोल से कुछ वाहनों में मामूली माइलेज अंतर दिखाई दे. ISMA और ऑटो उद्योग का कहना है कि यह अंतर बहुत कम है और इसके बदले देश को कम प्रदूषण, कम कच्चे तेल आयात और विदेशी मुद्रा बचत जैसे फायदे मिलते हैं.

यानी E20 से माइलेज पर कुछ प्रभाव की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता. पांच-छह परसेंट की बात इथेनॉल का पक्ष लेने वाले लोग भी मान रहे हैं. जबकि आम लोगों में यह धारणा है कि उनकी गाड़ी का माइलेज 20 परसेंट तक कम हो रहा है. भले ही विदेशी मुद्रा बचाने जैसी बात करे, लेकिन सच्चाई यही है कि अब तक लोगों को लगता था इथेनॉल से दाम कम होंगे. लेकिन अब यह साफ हो गया है कि दाम कम नहीं होंगे. ज्यादा पैसे देकर कम माइलेज और इंजन खराब होने की आशंका इथेनॉल के पक्ष में माहौल नहीं बनने दे रही है. इस्मा को सरकार की तरफ से जारी स्पष्टीकरण को आगे बढ़ाने की जरूरत है. उसे जैसे का तैसा रख देना इस मामले में इथेनॉल के पक्ष में नहीं जाता.

इथेनॉल से भारत को क्या फायदा

ISMA के अनुसार, इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इथेनॉल मिश्रण से भारत ने कच्चे तेल के आयात में कमी के कारण 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचत की है. इसके अलावा, इथेनॉल उत्पादन ने किसानों के लिए मक्का, गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बढ़ाई है.

एक बार फिर, आम लोगों का सवाल यही है कि अगर 1.4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बची है, तो इसका लाभ आम लोगों को क्यों नहीं मिल रहा. कुल मिलाकर समस्या भरोसा पैदा करने की है, जो अभी इसे लेकर नहीं बन रहा.

दुनिया में भी इस्तेमाल होता है इथेनॉल मिश्रण

इथेनॉल मिश्रण केवल भारत तक सीमित नहीं है. अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे कई देशों में इथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है. ब्राजील ने E27 को अपने मानक पेट्रोल मिश्रण के रूप में अपनाया है. यहां कोई यह साफ नहीं कर रहा है कि ब्राजील में गाड़ियां ई27 मानक के अनुकूल हैं या नहीं. यह भी सवाल कि अगर अमेरिका इथेनॉल फ्री पेट्रोल खरीदने का विकल्प देता है, तो भारत क्यों नहीं. वैसे भी अमेरिका में ज्यादातर जगह ई 10 ब्लेंडिंग वाला पेट्रोल मिलता है. ब्राजील ने ई 27 तक पहुंचने के लिए काफी वक्त लिया ताकि गाड़ियां रिप्लेस होती रहें और नई गाड़ियां ई 27 कंप्लायंट हैं.

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Published: 8 Jul, 2026 | 03:19 PM

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