Krishi Loan Subsidy: आजकल भारत में खेती सिर्फ पुराने तरीकों से नहीं होती. ट्रैक्टर, रोटावेटर, हार्वेस्टर, सीड ड्रिल और ड्रोन जैसी नई मशीनों के बिना तेजी से और अच्छी फसल उगाना मुश्किल है. लेकिन ये मशीनें महंगी होती हैं, इसलिए छोटे और मध्यम किसान इन्हें आसानी से नहीं खरीद पाते. इसी लिए सरकार ने कृषि मशीनरी लोन और लोन सब्सिडी की सुविधा शुरू की है, ताकि किसान आसानी से मशीन खरीदकर अपनी खेती को ज्यादा लाभकारी बना सकें.
केंद्र और राज्य सरकार मिलकर किसानों को कम ब्याज वाले लोन और सीधे बैंक खाते में सब्सिडी देती हैं, ताकि किसान आधुनिक मशीनें इस्तेमाल कर अपनी खेती ज्यादा फायदेमंद और आय बढ़ाने वाली बना सकें.
कृषि मशीनरी लोन क्या है?
कृषि मशीनरी लोन वह लोन होता है, जो किसानों को खेती में काम आने वाली मशीनें जैसे ट्रैक्टर, रोटावेटर, थ्रेशर आदि खरीदने के लिए दिया जाता है. यह लोन बैंक, सहकारी बैंक और फाइनेंस कंपनियां देती हैं, जिसमें ब्याज कम होता है और पैसा चुकाने के लिए अच्छा-खासा समय मिलता है. किसान इस लोन को सरकारी सब्सिडी के साथ या बिना सब्सिडी के भी ले सकते हैं. इसका फायदा छोटे, बड़े सभी किसानों को मिलता है, साथ ही किसान समूह, FPO और SHG भी इसका लाभ उठा सकते हैं.
कृषि लोन सब्सिडी क्या होती है?
कृषि लोन सब्सिडी एक तरह की आर्थिक मदद है, जिसमें सरकार मशीन की कीमत का कुछ हिस्सा खुद भर देती है. इसका मतलब है कि किसान को कम पैसा उधार लेना पड़ता है और उसकी EMI (किस्त) भी कम हो जाती है, यानी खर्च कम हो जाता है.
- सब्सिडी की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में DBT के माध्यम से आती है.
- कुछ मामलों में सब्सिडी बैंक द्वारा एडजस्ट कर दी जाती है.

कृषि मशीनरी लोन क्या है? (Photo Credit: Canva)
कृषि मशीनरी लोन के प्रकार (Loan Types)
ट्रैक्टर लोन
ट्रैक्टर खरीदने के लिए किसानों को ट्रैक्टर लोन की सुविधा दी जाती है, जिसके तहत 3 लाख से 15 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है. इस लोन पर ब्याज दर आमतौर पर 7% से 12% के बीच होती है और इसे चुकाने के लिए 5 से 7 साल तक का समय दिया जाता है. सरकार की ओर से इस पर 20% से 50% तक सब्सिडी भी मिल सकती है, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ कम होता है.
कृषि उपकरण लोन
खेती में काम आने वाले रोटावेटर, कल्टीवेटर, थ्रेशर और सीड ड्रिल जैसे उपकरणों की खरीद के लिए कृषि उपकरण लोन दिया जाता है. इस लोन के तहत 50,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक की राशि मिलती है और इसे 3 से 5 साल की अवधि में आसानी से चुकाया जा सकता है. यह लोन छोटे और मध्यम किसानों के लिए काफी उपयोगी माना जाता है.
हार्वेस्टर और कंबाइन लोन
हार्वेस्टर और कंबाइन जैसी महंगी मशीनों की खरीद के लिए विशेष हार्वेस्टर और कंबाइन लोन उपलब्ध है. इस लोन पर 40% से 60% तक सब्सिडी दी जाती है, जिसमें SC/ST वर्ग के किसानों को अधिक लाभ मिलता है. इसके अलावा, FPO को भी इस लोन में खास छूट और सुविधाएं दी जाती हैं, ताकि सामूहिक खेती को बढ़ावा मिल सके.
कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) लोन
जो किसान या समूह खेती की मशीनें खरीदकर उन्हें किराये पर देना चाहते हैं, उनके लिए कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) लोन की सुविधा है. इस योजना के तहत 80% तक सब्सिडी मिल सकती है. इससे एक तरफ किसानों की आमदनी बढ़ती है, वहीं दूसरी तरफ गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं.
कृषि ड्रोन लोन
नई और उभरती तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सरकार कृषि ड्रोन लोन भी दे रही है. इस लोन पर 40% से 75% तक सब्सिडी मिलती है, जिससे ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक किसानों की पहुंच में आ सके. खासतौर पर युवा किसानों और FPO को इस योजना का अधिक लाभ दिया जाता है, ताकि स्मार्ट और आधुनिक खेती को प्रोत्साहन मिल सके.

कृषि लोन सब्सिडी क्या होती है? (Photo Credit: Canva)
कृषि मशीनरी पर मिलने वाली सब्सिडी प्रतिशत
| मशीन का नाम | सामान्य किसान | SC/ST/महिला |
|---|---|---|
| ट्रैक्टर | 20–30% | 40–50% |
| रोटावेटर | 40% | 50% |
| हार्वेस्टर | 40% | 60% |
| ड्रोन | 50% | 75% |
| CHC यूनिट | 40% | 80% |
सब्सिडी राज्य सरकार के नियमों पर निर्भर करती है.
कृषि मशीनरी सब्सिडी (राज्य)
| राज्य / योजना | सब्सिडी का आम प्रतिशत | नोट्स |
|---|---|---|
| SMAM (केंद्र) | 50%–80% | SC/ST और महिला किसानों को ज्यादा फायदा |
| तेलंगाना | करीब 50% (SC/ST के लिए 100%) | यंत्र लक्ष्मी योजना के तहत |
| तमिलनाडु | 40%–50% | ट्रैक्टर, रोटावेटर और अन्य उपकरणों पर लागू |
| महाराष्ट्र | 25%–50% | अलग-अलग किसान श्रेणी के हिसाब से दरें |
| उत्तर प्रदेश | करीब 25% (अधिकतम सीमा) | कृषि यंत्र सब्सिडी योजना |
| केरल | करीब 25% | मैकेनाइजेशन योजना के तहत |
| बिहार | 80% तक | फार्म मशीनरी बैंक योजना से लाभ |
| हरियाणा | 40%–50% | राज्य कृषि सब्सिडी योजना |
कृषि लोन सब्सिडी के लिए जरूरी दस्तावेज (Documents Checklist)
- आधार कार्ड
- किसान क्रेडिट कार्ड (यदि उपलब्ध)
- जमीन के कागजात / लीज एग्रीमेंट
- बैंक पासबुक
- पासपोर्ट साइज फोटो
- मशीन का कोटेशन
- जाति प्रमाण पत्र (SC/ST के लिए)
- मोबाइल नंबर (DBT के लिए)
कृषि मशीनरी लोन देने वाले प्रमुख बैंक
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)
- बैंक ऑफ बड़ौदा
- पंजाब नेशनल बैंक
- ग्रामीण बैंक
- सहकारी बैंक
- NABARD समर्थित संस्थान

कृषि लोन सब्सिडी के लिए आवेदन कैसे करें (Photo Credit: Canva)
कृषि लोन सब्सिडी के लिए आवेदन कैसे करें?
कृषि लोन सब्सिडी लेने का आसान तरीका
- मशीन का चयन करें: सबसे पहले किसान सरकार द्वारा मंजूर की गई सूची में से अपनी जरूरत की कृषि मशीन चुनता है, जैसे ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल, हार्वेस्टर या अन्य उपकरण.
- ऑनलाइन आवेदन करें: इसके बाद अपने राज्य के कृषि विभाग या सब्सिडी पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन किया जाता है. आवेदन के समय किसान की व्यक्तिगत जानकारी, भूमि विवरण और चुनी गई मशीन की जानकारी भरनी होती है.
- जरूरी दस्तावेज तैयार रखें: आवेदन के साथ आधार कार्ड, बैंक पासबुक, जमीन के कागजात, पासपोर्ट साइज फोटो और मशीन का कोटेशन जैसे दस्तावेज अपलोड या जमा किए जाते हैं.
- बैंक में लोन आवेदन: ऑनलाइन आवेदन के बाद किसान नजदीकी सरकारी या सहकारी बैंक में जाकर कृषि मशीनरी लोन के लिए फॉर्म भरता है. बैंक किसान की पात्रता और कागजात की जांच करता है.
- लोन मंजूरी और मशीन खरीद: बैंक से लोन स्वीकृत होते ही किसान मशीन खरीद सकता है. कई मामलों में बैंक सीधे डीलर को भुगतान करता है.
- सब्सिडी की राशि खाते में जमा: मशीन खरीद और सत्यापन के बाद सरकार द्वारा तय की गई सब्सिडी की रकम सीधे किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है.
आवेदन करते समय इन बातों का रखें ध्यान
- केवल रजिस्टर्ड विक्रेता से मशीन खरीदें
- एक साल में सीमित मशीनों पर ही सब्सिडी
- गलत दस्तावेज देने पर आवेदन रद्द
- सब्सिडी पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर
कृषि मशीनरी लोन और सब्सिडी के फायदे
- खेती की लागत में कमी: आधुनिक मशीनों की मदद से खेती में लगने वाला खर्च काफी कम हो जाता है. पहले जहां ज्यादा मजदूरों और बार-बार जुताई की जरूरत पड़ती थी, वहीं मशीनों से कम समय में काम पूरा हो जाता है. सब्सिडी मिलने से मशीन खरीदने का खर्च भी घटता है, जिससे कुल खेती लागत कम होती है.
- समय और मेहनत की बचत: ट्रैक्टर, रोटावेटर और हार्वेस्टर जैसी मशीनें कम समय में ज्यादा काम कर देती हैं. इससे किसानों को मौसम पर निर्भरता कम करनी पड़ती है और फसल की बुवाई व कटाई सही समय पर हो पाती है. साथ ही शारीरिक मेहनत भी काफी कम हो जाती है.
- उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार: मशीनों से खेत की तैयारी, बीज बोना और फसल की कटाई ज्यादा सटीक तरीके से होती है. इससे बीज और खाद की बर्बादी कम होती है और फसल की गुणवत्ता बेहतर बनती है. अच्छी गुणवत्ता वाली फसल बाजार में बेहतर दाम दिलाती है.
- किसानों की आय में बढ़ोतरी: कम लागत, बेहतर उत्पादन और अच्छी कीमत मिलने से किसानों की कुल आमदनी बढ़ती है. कई किसान मशीनें खरीदकर उन्हें किराये पर भी देते हैं, जिससे खेती के साथ-साथ अतिरिक्त कमाई का रास्ता भी खुलता है.
- आधुनिक खेती को बढ़ावा: कृषि ड्रोन, सीड ड्रिल और स्मार्ट मशीनों के इस्तेमाल से खेती धीरे-धीरे आधुनिक और तकनीक आधारित बन रही है. इससे युवा किसान भी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं और पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर स्मार्ट फार्मिंग को अपनाया जा रहा है.

कृषि मशीनरी लोन और सब्सिडी के फायदे (Photo Credit: Canva)
FAQs: कृषि लोन सब्सिडी से जुड़े सवाल
- क्या बिना जमीन के लोन मिल सकता है? – कुछ मामलों में लीज पर खेती करने वालों को भी लाभ मिलता है.
- सब्सिडी कितने समय में मिलती है? – आमतौर पर 30-90 दिनों में.
- क्या एक किसान कई मशीनों पर सब्सिडी ले सकता है? – सीमित संख्या में, राज्य नियमों के अनुसार.
अगर आप खेती को आधुनिक बनाना चाहते हैं और महंगी मशीनों की वजह से पीछे हट रहे हैं, तो कृषि मशीनरी लोन और कृषि लोन सब्सिडी आपके लिए सबसे बेहतर विकल्प है. सही जानकारी, सही समय और सही दस्तावेज के साथ आप आसानी से इस योजना का लाभ उठा सकते हैं.
आज ही नजदीकी बैंक या राज्य कृषि विभाग की वेबसाइट पर जाकर कृषि लोन सब्सिडी के लिए आवेदन करें और अपनी खेती को बनाएं ज्यादा लाभदायक.