कृषि ऋण लेना हुआ आसान, 2 लाख रुपये तक के लोन पर नहीं लगेगी स्टांप ड्यूटी

इस निर्णय का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसानों की कर्ज लेने की लागत सीधे तौर पर कम हो जाएगी. इसके साथ ही कागजी प्रक्रिया सरल होने से फसल ऋण जल्दी स्वीकृत होने की उम्मीद है. सरकार का मानना है कि इससे किसान समय पर बीज, खाद और अन्य कृषि इनपुट खरीद सकेंगे.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 4 Jan, 2026 | 07:43 AM

Maharashtra News: महाराष्ट्र सरकार ने नए साल की शुरुआत किसानों के हित में एक अहम फैसले के साथ की है. राज्य में अब 2 लाख रुपये तक के कृषि और फसल ऋण पर किसी भी तरह की स्टांप ड्यूटी नहीं देनी होगी. इस फैसले से किसानों पर पड़ने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम होगा और बैंक से कर्ज लेने की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा आसान बन जाएगी. लंबे समय से किसान यह शिकायत कर रहे थे कि कम राशि के फसल ऋण पर भी कागजी औपचारिकताओं के नाम पर उन्हें अतिरिक्त पैसे चुकाने पड़ते हैं. सरकार के इस कदम को किसानों के लिए राहत भरी पहल के तौर पर देखा जा रहा है.

सरकार का फैसला और इसकी पृष्ठभूमि

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने जानकारी दी कि सरकार ने यह फैसला किसानों की व्यावहारिक परेशानियों को ध्यान में रखते हुए लिया है. उन्होंने बताया कि जब यह सामने आया कि किसान कर्ज लेते समय भी स्टांप ड्यूटी के कारण अतिरिक्त खर्च झेल रहे हैं, तब इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया गया. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर राजस्व कानूनों को सरल और जनहितैषी बनाने की दिशा में यह निर्णय लिया गया.

गजट अधिसूचना से लागू हुआ आदेश

यह छूट 1 जनवरी 2026 से लागू हो चुकी है. इस संबंध में राजस्व एवं वन विभाग की ओर से सरकारी गजट में अधिसूचना जारी की गई है. इसके तहत 2 लाख रुपये तक के कृषि और फसल ऋण से जुड़े सभी जरूरी कानूनी दस्तावेजों पर स्टांप ड्यूटी नहीं लगेगी. इसमें जमीन के कागजात, मॉर्गेज डीड, गिरवी से जुड़े दस्तावेज, गारंटी लेटर और लोन एग्रीमेंट जैसे कागजात शामिल हैं. यानी किसान को अब कर्ज लेते समय अलग से स्टांप शुल्क के लिए पैसे नहीं देने होंगे.

पहले कितना खर्च करना पड़ता था किसान को

इस फैसले से पहले किसानों को फसल ऋण पर प्रति 1 लाख रुपये के हिसाब से 0.3 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी देनी पड़ती थी. यानी अगर कोई किसान 2 लाख रुपये का कर्ज लेता था, तो उसे करीब 600 रुपये केवल स्टांप ड्यूटी के रूप में चुकाने होते थे. छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह रकम भी बड़ी मानी जाती थी, खासकर ऐसे समय में जब खेती की लागत लगातार बढ़ रही है. अब इस पूरी राशि की बचत सीधे किसान को होगी.

पूरे राज्य में लागू होगा नियम

सरकार ने साफ किया है कि यह फैसला पूरे महाराष्ट्र में लागू होगा और सभी बैंकों, सहकारी संस्थाओं और अन्य ऋण देने वाली एजेंसियों पर बाध्यकारी होगा. चाहे किसान राष्ट्रीयकृत बैंक से कर्ज ले या सहकारी बैंक से, 2 लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर स्टांप ड्यूटी नहीं ली जाएगी. इससे किसानों को अलग-अलग संस्थानों के चक्कर लगाने से भी राहत मिलेगी.

किसानों को क्या होंगे फायदे

इस निर्णय का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसानों की कर्ज लेने की लागत सीधे तौर पर कम हो जाएगी. इसके साथ ही कागजी प्रक्रिया सरल होने से फसल ऋण जल्दी स्वीकृत होने की उम्मीद है. सरकार का मानना है कि इससे किसान समय पर बीज, खाद और अन्य कृषि इनपुट खरीद सकेंगे. कुल मिलाकर यह कदम खेती को आर्थिक रूप से थोड़ा और आसान बनाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है.

महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब किसान मौसम की मार और बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं. स्टांप ड्यूटी की यह छूट किसानों के लिए न सिर्फ आर्थिक राहत है, बल्कि सरकार की किसान-हितैषी सोच को भी दर्शाती है.

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