Telangana News: इस साल तेलंगाना में आम की बंपर पैदावार होने की उम्मीद है. अभी से आम के पेड़ फूलों से लदे हुए हैं, जिसे देखकर किसान काफी खुश हैं. कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि इस साल सर्दी के दौरान रात का तापमान औसत से कम रहा, जो आम के लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ. इसके चलते आम के पेड़ फूलों से लद गए हैं. हालांकि, कुछ इलाकों के बागों में कीटों का खतरा बढ़ गया है. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. किसानों को डर है कि अगर समय पर कीटों का इलाज नहीं किया गया, तो पैदावार को नुकसान पहुंच सकता है.
द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, कई आम के बागों में थ्रिप का अटैक देखा गया है. यह एक छोटा कीट है, जो पत्तियों और फलों के फूलों पर हमला करता है. खासकर नगरकुर्नूल जिले में इसका असर कुछ ज्यादा ही देखने को मिल रहा है. इसके अलावा यह तेलंगाना के कई अन्य इलाकों के बागों में आम की बढ़वार में बाधा डाल रहा है. श्री कोण्डा लक्ष्मण तेलंगाना हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने बागों को इन कीटों से बचाने के उपाय सुझाए हैं.
इस तरह के बाग में लगता है थ्रिप रोग
नगरकुर्नूल जिले के किसान बलराजू ने कहा कि उनके छह एकड़ जमीन का बड़ा हिस्सा थ्रिप की चपेट में है. उन्होंने कहा कि मैंने काफी ध्यान रखा था फिर भी यह समस्या हुई. उनके बाग की हाल ही में यूनिवर्सिटी की टीम ने जांच की थी. थ्रिप्स सीधे फूल से बनने वाले फल (fruit set) पर हमला नहीं करते, लेकिन छोटे हरे आम (fruitlet) को नुकसान पहुंचाते हैं. यूनिवर्सिटी के प्रेस नोट के अनुसार, यह समस्या उन बागों में ज्यादा होती है, जहां पेड़ों की शाखाओं के कारण धूप ठीक से नहीं पहुंचती और छाया बनती है. ऐसी स्थिति आमतौर पर बड़े और 20 साल से अधिक पुराने बागों में देखी जाती है, खासकर महबूबनगर में.
रोग से फसल को बचाने के लिए क्या करें?
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि आम के बागों की नियमित छंटाई (pruning) करनी चाहिए ताकि पर्याप्त धूप पहुंचे और नमी कम हो, क्योंकि ये परिस्थितियां थ्रिप्स के फैलने के लिए अनुकूल होती हैं. किसानों को मिट्टी में मौजूद प्यूपा (puppa) को बाहर लाने के लिए इंटर कल्टीवेशन करने की भी सलाह दी गई है. इसके साथ ही, फल के आकार और सुरक्षा के लिए प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर्स, फंगिसाइड, पेस्टिसाइड और पौष्टिक तत्वों की उचित आपूर्ति करने की सिफारिश की गई है.