क्या इस सीजन सेब बनाएगा रिकॉर्ड? जनवरी की बर्फबारी से बंपर पैदावार की उम्मीद, जानें फसल पर क्या होगा असर

Apple Farming: हिमाचल के ऊंचे इलाकों में जनवरी के आखिरी हफ्ते में हुई बर्फबारी से बागवानों के चेहरे खिल उठे. शिमला, कुल्लू और किन्नौर के सेब बागानों को इस बर्फ से सही ठंडक, मिट्टी में नमी और कीट-मुक्त बाग मिल रहा है. इससे सेब की मिठास, लाल रंग और साइज बढ़ेगा और किसानों की आमदनी भी.

नोएडा | Updated On: 26 Jan, 2026 | 04:12 PM

Himachal Apples: हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में जनवरी के आखिरी हफ्ते में जो भारी बर्फबारी हुई है, उसने बागवानों के चेहरे पर खुशियों की चमक ला दी है. शिमला, कुल्लू, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जैसे जिलों में गिर रही सफेद चादर सेब की खेती के लिए किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है. इसे बागवान अपने लिए ‘सफेद सोना’ कह रहे हैं.

लेकिन सवाल यह है कि यह बर्फबारी सेब के लिए इतनी जरूरी क्यों है और क्या इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं?

सेब के पेड़ को चाहिए सही ठंडक

हेल्दी सेब के पेड़ को साल में लगभग 800 से 1200 घंटे तक 7 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान की जरूरत होती है. जनवरी की बर्फबारी से तापमान गिरता है और पेड़ को यह जरूरी ठंडक मिल जाती है. अगर यह कोटा पूरा नहीं हुआ, तो फूल कम आते हैं और सेब का साइज भी छोटा रह जाता है.

मिट्टी में नमी का फिक्स्ड डिपॉजिट

पहाड़ी क्षेत्रों में सिंचाई करना मुश्किल होता है. बर्फ धीरे-धीरे पिघलती है, जिससे पानी जमीन के अंदर चला जाता है और जड़ों को लंबे समय तक नमी मिलती रहती है. इसका फायदा मार्च-अप्रैल में होता है जब पेड़ों में जान आती है, तब उन्हें सूखे का सामना नहीं करना पड़ता.

कीट और बीमारियों का सफाया

बर्फबारी केवल पानी ही नहीं देती, बल्कि बागों की सफाई भी करती है. ठंड और बर्फ के कारण हानिकारक कीट और फंगस मर जाते हैं. इससे पेड़ आने वाले सीजन के लिए ज्यादा हेल्दी रहते हैं.

फसल की क्वालिटी और रंगत

एक्सपर्ट के अनुसार, सही समय पर और भरपूर बर्फबारी से सेब का लाल रंग गहरा, मीठा और क्रंची होता है. अच्छे रंग और बड़े साइज के कारण बागवानों को मंडियों में सेब के दाम भी ज्यादा मिलते हैं.

बर्फबारी के नुकसान

ज्यादा या गलत समय पर बर्फबारी नुकसान भी कर सकती है:

बागवानों के लिए जरूरी सलाह

  1. पेड़ों पर ज्यादा बर्फ हो तो हल्के हाथों से झाड़ें.
  2. पेड़ के चारों तरफ पानी जमा न होने दें.
  3. टूटे टहनियों पर तुरंत बोर्डो पेस्ट या एंटी-फंगल दवा लगाएं.

कुल मिलाकर जनवरी के आखिरी हफ्ते की बर्फबारी हिमाचल के सेब बागवानों के लिए संजीवनी बूटी साबित हो रही है. इससे न केवल चिलिंग ऑवर्स पूरे होंगे, बल्कि ग्राउंड वाटर लेवल भी सुधरेगा. अगर कुदरत का साथ इसी तरह बना रहा तो यह साल बागवानों को मालामाल कर सकता है.

Published: 26 Jan, 2026 | 12:58 PM

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