न महंगे इंजेक्शन, न केमिकल दवाइयां… दूधारू पशु को खिला दें ये एक जड़ी-बूटी, दूध की बहेगी धारा!

Gay Ka Doodh Kaise Badhaye: ग्रामीण क्षेत्रों में गाय का दूध कम होना किसानों के लिए चिंता का कारण बन जाता है. महंगी दवाइयों और इंजेक्शन के बावजूद भी कुछ खास फर्क नजर नहीं आता है. ऐसे में एक खास आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी गाय के दूध बढ़ाने में मददगार साबित होती है. सही मात्रा में इसके इस्तेमाल से दूध का फैट और प्रोटीन भी बेहतर होता है. यह गाय की सेहत, रोग प्रतिरोधक क्षमता और प्रजनन में भी लाभकारी मानी जाती है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 23 Jan, 2026 | 02:40 PM

Dairy farming Tips: गांव से लेकर शहरों तक, पशुपालन आज लाखों परिवारों की आजीविका का सबसे बड़ा साधन बन चुका है. लेकिन ऐसे में जब गाय का दूध अचानक कम या बंद हो जाए तो पशुपालक की चिंता बढ़ना स्वाभाविक होती है. कई बार महंगे इंजेक्शन, बाजारू टॉनिक और केमिकल दवाइयों का इस्तेमाल करने के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता. ऐसे में देसी और आयुर्वेदिक ज्ञान पशपालकों के लिए उम्मीद बनकर सामने आता है.

पुराने समय से पशुपालक शतावरी की जड़ का इस्तेमाल करते रहे हैं. शतावरी की जड़ न केवल दूध की मात्रा बढ़ाने में मददगार मानी जाती है, बल्कि ये गाय के मानसिक तनाव को कम कर लैक्टेशन प्रोसेस को भी दोबारा से सक्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

दूध कम होने की असली वजह

कई बार गाय शारीरिक रूप से स्वस्थ होते हुए भी दूध नहीं देती. इसका सबसे बड़ा कारण मानसिक तनाव हो सकता है. तनाव में गाय के दिमाग से ऑक्सीटॉसिन हार्मोन का स्राव सही ढंग से नहीं होता. ऑक्सीटॉसिन वही हार्मोन है जो दूध निकलने की प्रक्रिया को शुरू करता है. अगर यह हार्मोन सही समय पर रिलीज न हो, तो थनों में दूध होते हुए भी वह बाहर नहीं निकल पाता.

देसी जड़ी-बूटी का कमाल

आयुर्वेद में शतावरी को बलवर्धक और लैक्टेशन बढ़ाने वाली जड़ी-बूटी माना गया है. शतावरी की जड़ में पाए जाने वाले नेचुरल तत्व गाय के हार्मोनल सिस्टम को बैलेंस करते हैं और दिमाग को शांत रखते हैं. इसका सीधा असर ऑक्सीटॉसिन हार्मोन पर पड़ता है, जिससे दूध निकलने की प्रक्रिया दोबारा सक्रिय हो जाती है. यही वजह है कि पुराने समय में पशुपालक शतावरी का चूर्ण या काढ़ा गाय को खिलाते थे और अच्छे नतीजे पाते थे.

सही मात्रा और तरीका

विशेषज्ञों के अनुसार शतावरी का संतुलित उपयोग बेहद जरूरी है. आमतौर पर 25 से 50 ग्राम शतावरी का चूर्ण गुड़ या दाने में मिलाकर गाय को दिया जा सकता है. यदि ताजी जड़ उपलब्ध हो, तो 2-3 डंठल पीसकर भी खिलाया जा सकता है. कुछ किसान इसका काढ़ा बनाकर भी देते हैं. नियमित और सही मात्रा में देने से दूध की मात्रा बढ़ती है, साथ ही दूध का फैट और प्रोटीन लेवल भी सुधारता है.

आधुनिक दवाओं में भी मौजूद है यही देसी राज

आजकल बाजार में मिलने वाली कई दूध बढ़ाने वाली टैबलेट्स और टॉनिक में शतावरी जैसे आयुर्वेदिक तत्व मिलाए जाते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये दवाइयां दूध दुहने से 1 से 1.5 घंटे पहले दी जाती हैं और इनके साइड इफेक्ट भी नहीं होते. यानी आधुनिक दवाओं की जड़ भी कहीं न कहीं इस पारंपरिक देसी ज्ञान से जुड़ी है.

स्वास्थ्य और प्रजनन में भी लाभ

शतावरी का फायदा सिर्फ दूध बढ़ाने तक सीमित नहीं है. इसका नियमित सेवन गाय की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, पाचन प्रणाली मजबूत करता है और प्रजनन क्षमता में सुधार लाता है. यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे पूर्ण देसी समाधान मानते हैं. सही जानकारी और सलाह के साथ इसका उपयोग पशुपालकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं.

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