खेत नहीं, छत पर उगाएं आलू! इस किस्म से घर बैठे होगी बंपर पैदावार, जानें मिट्टी से देखभाल तक का पूरा प्रोसेस

Ghar Par Aloo Kaise Ugaye: अब शहरी लोग भी अपने घर की छत पर आसानी से आलू उगा सकते हैं. कुफरी किरण जैसी उन्नत किस्म टेरेस गार्डनिंग के लिए सबसे बेहतर मानी जा रही है. सही मिट्टी, संतुलित पानी और खाद के साथ एक पौधे से 2 से 2.5 किलो तक आलू मिल सकता है. यह तरीका कम खर्च में ताजी और सुरक्षित सब्जी पाने का शानदार विकल्प है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 18 Jan, 2026 | 12:23 PM

How To Grow Potato At Home: अब आलू की खेती सिर्फ गांवों और खेतों तक ही सीमित नहीं रही है. देशभर में बढ़ती टेरेस गार्डनिंग के ट्रेंड के साथ लोग अपने घर की छत, बालकनी और खुली जगहों में भी आसानी से आलू उगा रहे हैं. खास बात यह है कि इसके लिए न तो बड़ी जमीन चाहिए और न ही ज्यादा खर्च. सही किस्म, मिट्टी और देखभाल के साथ कोई भी व्यक्ति घर पर ताजा और सुरक्षित आलू उगा सकता है.

एक्सपर्ट के अनुसार, कुफरी किरण आलू की एक ऐसी किस्म है जो शहरी खेती के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती है. यह किस्म अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में आसानी से ढल जाती है, इसलिए इसे सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में भी उगाया जा सकता है. इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे ग्रोइंग बैग, बोरे, ड्रम या टेरेस गार्डन में आसानी से लगाया जा सकता है.

हर मौसम में उगाने की सुविधा

कुफरी किरण किस्म को ठंड और हल्की गर्मी दोनों मौसम में उगाया जा सकता है. यही वजह है कि शहरी इलाकों में रहने वाले लोग साल के अलग-अलग समय पर इसे छत पर लगा सकते हैं. इसके अलावा कुफरी लालिमा और कुफरी सिंदूरी जैसी किस्में भी टेरेस गार्डनिंग के लिए अच्छी मानी जाती हैं.

Ghar Par Aloo Kaise Uga Sakte Hain

घर पर आलू कैसे उगा सकते हैं (Photo Credit: Canva)

कैसी हो मिट्टी और देखभाल

घर पर आलू उगाने के लिए दोमट या रेतीली दोमट मिट्टी सबसे बेहतर रहती है. मिट्टी का पीएच सामान्य यानी उदासीन होना चाहिए, ताकि पौधे की जड़ें अच्छी तरह फैल सकें. मिट्टी में गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट मिलाने से उत्पादन बेहतर होता है. पानी का संतुलन बहुत जरूरी है, क्योंकि ज्यादा पानी भरने से पौधे खराब हो सकते हैं.

कितनी मिल सकती है पैदावार

अगर खेतों की बात करें तो इस किस्म से 500 से 600 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन संभव है. वहीं टेरेस गार्डनिंग में सही मैनेजमेंट के साथ एक पौधे से 2 से 2.5 किलो आलू मिल सकता है. यह पूरी तरह खाद, पानी और धूप पर निर्भर करता है.

ठंडी जगहों पर ज्यादा फायदा, लेकिन हर जगह संभव

आमतौर पर आलू ठंडी जलवायु में बेहतर उत्पादन देता है, लेकिन आधुनिक तकनीक और सही देखभाल के साथ गर्म राज्यों में भी अच्छी पैदावार ली जा सकती है. यही कारण है कि आज शहरी लोग अपने घर पर आलू उगाकर न सिर्फ पैसे बचा रहे हैं, बल्कि केमिकल-मुक्त और ताजी सब्जी भी पा रहे हैं.

टेरेस गार्डनिंग के जरिए आलू उगाना शहरी लोगों को आत्मनिर्भर बनाता है. यह तरीका पर्यावरण के अनुकूल है और रोजमर्रा की जरूरत की सब्जी घर पर ही उपलब्ध करा देता है. कम खर्च, कम मेहनत और बेहतर सेहत-तीनों का फायदा इस तरीके से मिलता है.

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