मध्यप्रदेश में क्षीर धारा ग्राम योजना की शुरुआत, बैतूल के 37 गांवों में बढ़ेगा दूध उत्पादन और पशुपालन

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में पशुपालन और डेयरी को बढ़ावा देने के लिए ‘क्षीर धारा ग्राम योजना’ शुरू की जा रही है. इसके तहत 37 गांवों को आदर्श दुग्ध उत्पादन ग्राम बनाया जाएगा. योजना में पशुओं की टैगिंग, टीकाकरण, नस्ल सुधार, कृत्रिम गर्भाधान और पशुपालकों को प्रशिक्षण देकर दूध उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 8 Mar, 2026 | 05:01 PM

Kshir Dhara Gram Yojana: मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में अब पशुपालन और डेयरी को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है. पशुपालन एवं डेयरी विभाग की पहल पर जिले के 37 गांवों को “क्षीर धारा ग्राम योजना” के तहत आदर्श दुग्ध उत्पादन और पशुपालन ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा. इस योजना का मकसद गांवों में उन्नत पशुपालन को बढ़ावा देना, दूध उत्पादन बढ़ाना और पशुपालकों की आय में इजाफा करना है. साथ ही पशुओं के स्वास्थ्य, नस्ल सुधार और सही देखभाल पर भी खास ध्यान दिया जाएगा, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सके.

37 गांवों को बनाया जाएगा आदर्श पशुपालन ग्राम

पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुसार बैतूल जिले के 37 गांवों को इस योजना के तहत चुना गया है. इन गांवों में पशुपालन को आधुनिक  तरीके से बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार का उद्देश्य है कि इन गांवों को एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाए, जहां पशुपालन, दूध उत्पादन और पशु स्वास्थ्य से जुड़ी सभी सुविधाएं उपलब्ध हों. अगर यह योजना सफल होती है, तो भविष्य में जिले के अन्य गांवों में भी इसे लागू किया जा सकता है. इससे गांवों में रोजगार बढ़ेगा और किसानों को अतिरिक्त आय का बेहतर साधन मिलेगा.

पशुओं की टैगिंग से होगा पूरा रिकॉर्ड

योजना के तहत चयनित गांवों में सभी पशुओं की शत-प्रतिशत टैगिंग की जाएगी. टैगिंग के जरिए हर पशु की पहचान  तय होगी और उसका पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा. इस रिकॉर्ड में पशु का स्वास्थ्य, टीकाकरण, प्रजनन, इलाज और बीमा जैसी सभी जानकारी दर्ज की जाएगी. इससे पशुओं की देखभाल आसान होगी और किसी बीमारी या समस्या की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी. सरकार का मानना है कि टैगिंग व्यवस्था से पशुपालन को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी.

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पशुपालन बढ़ाकर दूध उत्पादन और किसानों की आय बढ़ेगी.

नस्ल सुधार और कृत्रिम गर्भाधान पर जोर

दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं की नस्ल सुधार  पर भी खास ध्यान दिया जाएगा. योजना के तहत अवर्णित सांडों का बधियाकरण किया जाएगा, ताकि बेहतर नस्ल वाले पशुओं का विकास हो सके. इसके साथ ही उच्च गुणवत्ता वाले सांडों के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी. इससे अच्छी नस्ल के बछड़े पैदा होंगे और भविष्य में दूध उत्पादन बढ़ेगा. पशुपालकों को नस्ल सुधार के फायदे और सही पशुपालन तकनीक के बारे में भी जानकारी दी जाएगी.

हरा चारा और संतुलित आहार की जानकारी

पशुओं की अच्छी सेहत और अधिक दूध उत्पादन के लिए सही आहार बहुत जरूरी होता है. इसलिए योजना के तहत पशुपालकों को हरा चारा उत्पादन और संतुलित पशु आहार  के बारे में भी जानकारी दी जाएगी. किसानों को बताया जाएगा कि कम लागत में कैसे अच्छा चारा तैयार किया जा सकता है. इससे पशुओं की सेहत बेहतर होगी और दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी. इसके अलावा पशुओं को कृमिनाशक दवाएं, इलाज और स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी.

टीकाकरण, जागरूकता और गोबर-गोमूत्र पर भी फोकस

योजना के तहत पशुओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि उन्हें खतरनाक बीमारियों से बचाया जा सके. इसके साथ ही गांवों में पशुपालकों के लिए जागरूकता शिविर भी आयोजित किए जाएंगे. इन शिविरों में बांझपन निवारण, पशु स्वास्थ्य  और बेहतर पशुपालन के बारे में जानकारी दी जाएगी. साथ ही गोबर और गोमूत्र के मूल्य संवर्धन पर भी जोर दिया जाएगा. किसानों को बताया जाएगा कि इनसे जैविक खाद और अन्य उत्पाद बनाकर अतिरिक्त आय कैसे प्राप्त की जा सकती है.

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