अब हर पशु की बनेगी डिजिटल पहचान! Animal Tag से पशुपालकों को मिलेंगे कई बड़े फायदे

Dairy Farming: पशुपालन करने वाले किसानों के लिए Animal Tagging एक आसान और फायदेमंद तरीका बन रहा है. इससे हर पशु की अलग पहचान हो जाती है और उम्र, दूध उत्पादन, बीमारी व मालिक की जानकारी सुरक्षित रहती है. इससे पशुपालकों को सही फैसले लेने और नुकसान कम करने में मदद मिलती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 1 Mar, 2026 | 12:32 PM

Animal Tagging: आज के समय में पशुपालन भी धीरे-धीरे आधुनिक बनता जा रहा है. अब सिर्फ पशु पालना ही काफी नहीं है, बल्कि उनके बारे में सही जानकारी रखना भी जरूरी हो गया है. इसी को आसान बनाने के लिए पशुपालन और डेयरी विभाग ने पशुओं की एनिमल टैगिंग पर जोर दिया है. विभाग के अनुसार एक छोटा सा टैग पशुपालकों के लिए बहुत बड़ा फायदा दे सकता है. इससे पशु की पहचान से लेकर उसके स्वास्थ्य और उत्पादन तक की जानकारी आसानी से रखी जा सकती है.

एनिमल टैगिंग क्या है और क्यों जरूरी है

पशुपालन और डेयरी विभाग के अनुसार एनिमल टैगिंग एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें हर पशु के कान  में एक खास नंबर वाला टैग लगाया जाता है. यह नंबर उस पशु की पहचान बन जाता है. जैसे इंसानों का आधार कार्ड होता है, वैसे ही पशुओं के लिए टैग पहचान का काम करता है. इससे यह पता रहता है कि पशु किसका है और उसकी पूरी जानकारी रिकॉर्ड में सुरक्षित रहती है. पहले कई बार पशुओं की पहचान  करना मुश्किल हो जाता था, खासकर बड़े झुंड में. लेकिन टैग लगने से हर पशु अलग पहचान में आ जाता है. इससे पशुपालकों को अपने पशुओं का हिसाब रखना आसान हो जाता है.

पशु की पूरी जानकारी रखना होगा आसान

एनिमल टैगिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे पशु का पूरा रिकॉर्ड रखा जा सकता है. जैसे पशु की उम्र कितनी है, कब टीका लगा, कब बीमार हुआ या कितना दूध देता है. पशुपालन विभाग का कहना है कि सही रिकॉर्ड रहने से पशुपालकों को फायदा  होता है. जब पशु की जानकारी साफ रहती है तो यह पता चलता है कि कौन सा पशु ज्यादा दूध दे रहा है और कौन कम. इससे अच्छे पशु चुनना आसान हो जाता है. अगर पशु बीमार हो जाए तो डॉक्टर को भी पुरानी जानकारी देखकर इलाज करने में आसानी होती है.

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हर पशु की पहचान से पशुपालन होगा ज्यादा सुरक्षित.

बीमारी पर नजर रखने में मदद

एनिमल टैगिंग से पशुओं की बीमारी  पर नजर रखना भी आसान हो जाता है. अगर किसी इलाके में बीमारी फैलती है तो टैग के जरिए पता लगाया जा सकता है कि कौन-कौन से पशु प्रभावित हैं. इससे बीमारी को जल्दी रोकने में मदद मिलती है. पशुपालन विभाग का मानना है कि टैगिंग से पशुओं की सुरक्षा बढ़ती है और नुकसान कम होता है. जब हर पशु का रिकॉर्ड रहता है तो समय पर टीकाकरण और इलाज करना आसान हो जाता है. इससे पशु स्वस्थ रहते हैं.

पशुपालकों को मिलेंगे कई फायदे

एनिमल टैगिंग से पशुपालकों को कई तरह के फायदे मिलते हैं. सबसे बड़ा फायदा यह है कि पशु खो जाने पर उसे पहचानना आसान हो जाता है. अगर कोई पशु बिकता है तो उसकी पहचान साफ रहती है और मालिक बदलने का रिकॉर्ड भी दर्ज किया जा सकता है. इसके अलावा सरकारी योजनाओं का फायदा लेने में भी आसानी होती है क्योंकि टैग से पता चलता है कि पशु किस पशुपालक का है. इससे पशुपालन का काम  ज्यादा व्यवस्थित हो जाता है और गड़बड़ी कम होती है.

एक टैग से कई फायदे

पशुपालन और डेयरी विभाग का कहना है कि वन टैग, मेनी बेनिफिट यानी एक टैग से कई फायदे मिलते हैं. छोटा सा टैग पशु की पहचान, स्वास्थ्य, उत्पादन और मालिक की जानकारी को जोड़ देता है. सरकार की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा पशुओं को टैग लगाया जाए ताकि पशुपालन को आधुनिक बनाया जा सके.

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में एनिमल टैगिंग बहुत जरूरी हो जाएगी. इससे पशुपालकों को अपने पशुओं की सही जानकारी मिलेगी और कमाई बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. अगर पशुपालक अपने पशुओं पर टैग  लगवाते हैं तो उन्हें पशुपालन का काम आसान लगेगा और सही योजना बनाकर ज्यादा फायदा मिल सकता है. यही वजह है कि विभाग लगातार पशुपालकों को एनिमल टैगिंग के लिए जागरूक कर रहा है.

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