अब पशुओं को वैक्सीन लगते ही बताना होगा OTP, नई डिजिटल व्यवस्था से रुकेगी फर्जी एंट्री

मध्य प्रदेश में पशुओं के टीकाकरण को पारदर्शी बनाने के लिए नई डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है. अब वैक्सीन के बाद पशुपालक को ओटीपी बताना जरूरी होगा. FMD अभियान के तहत बड़े स्तर पर टीकाकरण चल रहा है. ओटीपी और टैगिंग से सही रिकॉर्ड बनेगा और फर्जी एंट्री पर रोक लगेगी.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 13 Feb, 2026 | 06:44 PM

Madhya Pradesh Animal Husbandry:  पशुओं के टीकाकरण को पूरी तरह पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए नई डिजिटल व्यवस्था लागू कर दी गई है. अब वैक्सीन लगने के बाद पशुपालक को अपने मोबाइल पर आए ओटीपी की जानकारी देनी होगी. बिना ओटीपी दर्ज किए टीकाकरण की एंट्री मान्य नहीं होगी. मध्यप्रदेश में यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि सही पशु और सही पशुपालक का रिकॉर्ड पक्का हो सके और किसी तरह की गलत जानकारी दर्ज न हो.

FMD से बचाव के लिए बड़ा अभियान

मध्य प्रदेश में खुरपका-मुंहपका रोग (FMD) से बचाने के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है. यह बीमारी इंसानों के लिए खतरनाक नहीं मानी जाती, लेकिन पशुओं के लिए बेहद गंभीर है. इससे दूध उत्पादन  कम हो जाता है और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है. विभाग के अनुसार, एक तय अवधि तक बड़े पैमाने पर टीकाकरण किया जाएगा. जिले में करीब डेढ़ लाख गाय, भैंस, भेड़ और बकरियों को यह टीका लगाया जाना है. अब तक हजारों पशुओं को टीका लगाया जा चुका है और अभियान तेजी से जारी है.

टीकाकरण के बाद ओटीपी जरूरी

नई व्यवस्था के तहत अब हर पशुपालक का आधार नंबर लेकर पंजीकरण किया जा रहा है. टीका लगाने के बाद पशुपालक के मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा. इस ओटीपी को दर्ज करने के बाद ही टीकाकरण की प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी. मध्यप्रदेश पशुपालन विभाग  के अनुसार, इस डिजिटल सिस्टम से फर्जी एंट्री या गलत जानकारी पर रोक लगेगी. टीकाकरण से जुड़ा पूरा डाटा भारत पशुधन ऐप में सुरक्षित किया जा रहा है. इससे सरकार को सही आंकड़े मिलेंगे और भविष्य की योजनाएं बेहतर तरीके से बनाई जा सकेंगी.

टैगिंग भी अनिवार्य

मध्यप्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार, अभियान को सफल बनाने के लिए जिले में सहायक पशु चिकित्सा  क्षेत्र अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है. इनके साथ मैदानी कर्मचारी और गोसेवक भी तैनात किए गए हैं. टीकाकरण के दौरान हर पशु के कान में टैग लगाना जरूरी किया गया है. जिन पशुओं में पहले से टैग नहीं है, उन्हें नया टैग लगाकर पंजीकरण किया जा रहा है. इसके बाद पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से अपलोड किया जाता है.

क्यों जरूरी है यह सख्ती?

खुरपका-मुंहपका रोग तेजी से फैलने वाली बीमारी है. इससे पशु कमजोर हो जाते हैं और दूध उत्पादन घट जाता है. कई बार छोटे पशुपालकों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. मध्यप्रदेश पशुपालन विभाग  का कहना है कि डिजिटल निगरानी से अब हर टीकाकरण का प्रमाण रहेगा. इससे पशुपालकों को भी भरोसा मिलेगा कि उनके पशु को सही समय पर सही टीका लगाया गया है. नई व्यवस्था से न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि पशुधन को सुरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी. विभाग का मानना है कि अगर सभी पशुपालक सहयोग करें, तो FMD जैसी बीमारी पर काबू पाना आसान हो जाएगा और पशुपालन व्यवसाय  को बड़ा सहारा मिलेगा.

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