Winter Cattle Care: उत्तर भारत की हाड़ कंपा देने वाली सर्दी शुरू हो चुकी है. जब हम खुद को रजाई और गर्म कपड़ों में लपेट कर भी ठिठुर रहे हैं, तो जरा सोचिए उन बेजुबानों का क्या हाल होगा जो खुले बाड़ों में खड़े हैं. पशुपालक अक्सर शिकायत करते हैं कि ठंड आते ही गाय-भैंस का दूध आधा रह गया है या पशु बीमार पड़ गया है. असल में, पशु को सिर्फ छत नहीं, बल्कि सर्दी से लड़ने के लिए अंदरूनी ताकत की जरूरत होती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान भाई खान-पान और रखरखाव में थोड़े से बदलाव कर लें, तो न केवल पशु तंदुरुस्त रहेंगे बल्कि दूध की बाल्टी भी पहले की तरह भरी रहेगी.
सर्दी में पशु का खान-पान
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सर्दियों में पशुओं के शरीर को खुद को गर्म रखने के लिए ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है. जैसे हमें सर्दी में गुड़ और मेवे पसंद आते हैं, वैसे ही पशुओं के मेटाबॉलिज्म को भी एक्स्ट्रा डाइट चाहिए. जानकारों के मुताबिक, इस मौसम में सूखे भूसे के साथ दाने की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए. चने का छिलका, मक्का और चोकर का मिश्रण पशु को वह गर्मी देता है जो उसे ठंड से बचाती है. सबसे जरूरी बात यह है कि दुधारू पशुओं को रोज एक मुट्ठी मिनरल मिक्सचर और कैल्शियम जरूर दें. यह न केवल उनकी हड्डियों को मजबूत रखेगा, बल्कि दूध उत्पादन में भी कमी नहीं आने देगा.
देसी जुगाड़ से दें हीटर जैसी गर्माहट
पशु को ठंड से बचाने के लिए महंगे उपकरणों की जरूरत नहीं है. हमारे घर में मौजूद फटे-पुराने कपड़े, जूट की बोरी या टाट को सिलकर पशुओं के लिए बेहतरीन झूल (कोट) तैयार की जा सकती है. इसके अलावा, फर्श पर धान का पुआल या नेवारी बिछाना बहुत फायदेमंद होता है. यह जमीन की ठंडक को पशु के शरीर तक नहीं पहुंचने देता. रात के समय बाड़े में सावधानीपूर्वक बोरसी (अंगीठी) या हीटर का प्रयोग भी किया जा सकता है, लेकिन ध्यान रहे कि धुआं बाहर निकलने का रास्ता हो और आग पशु से दूर रहे.
पानी पिलाने में न करें ये बड़ी गलती
अक्सर देखा गया है कि पशुपालक ठंड के मारे पशु को बहुत कम पानी पिलाते हैं या फिर बहुत ठंडा पानी दे देते हैं. यह पशु की सेहत बिगाड़ सकता है. भले ही ठंड ज्यादा हो, लेकिन शरीर के अंदरूनी कामकाज के लिए पानी जरूरी है. कोशिश करें कि पशु को हल्का ताजा या गुनगुना पानी ही पिलाएं. ठंडा पानी पीने से पशु की ऊर्जा उसे गर्म करने में खर्च हो जाती है, जिससे सीधे तौर पर दूध का उत्पादन गिर जाता है. दिन में कम से कम तीन बार पानी पिलाने का नियम बनाएं.
बीमारी के लक्षणों को पहचानें और खुद न बनें डॉक्टर
सर्दी के मौसम में पशुओं को अक्सर नजला, खांसी या बुखार की शिकायत हो जाती है. अगर आपका पशु सुस्त खड़ा है, चारा छोड़ दिया है या उसकी नाक से पानी बह रहा है, तो समझ लीजिए उसे ठंड लग चुकी है. ऐसे समय में देसी नुस्खों के साथ-साथ तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है. अक्सर किसान भाई खुद ही कोई भी दवा दे देते हैं, जो खतरनाक हो सकता है. समय पर सही मैनेजमेंट और संतुलित आहार ही आपके पशुपालन व्यवसाय को घाटे से बचाकर मुनाफे की गारंटी दे सकता है.