IVF Technology Use in Cattle Farming: पशुपालन क्षेत्र में अब तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से तेज बदलाव देखा जा रहा है, खासकर पशुओं के गर्भाधान और नस्ल सुधार की दिशा में. जो काम पहले कई सालों में होता था, अब वह कम समय में संभव होने लगा है. अच्छी नस्ल के पशु तैयार करना हमेशा से पशुपालकों के लिए चुनौती रहा है, लेकिन अब विज्ञान इस समस्या का आसान समाधान लेकर आया है. गुजरात पशुधन विकास बोर्ड की ओर से पशुपालन क्षेत्र में एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है. यहां के वैज्ञानिकों ने IVF (In vitro fertilization) तकनीक से एक नस्ल की गाय से दूसरी नस्ल की बछिया को जन्म देने में कामयाबी हासिल की है.
एम्ब्रियो ट्रांसफर लैब में मिली बड़ी सफलता
गुजरात सरकार के पशुपालन विभाग के अनुसार अमरेली जिले में पशुधन विकास से जुड़ी एक एम्ब्रियो ट्रांसफर लेबोरेटरी में आईवीएफ तकनीक का सफल प्रयोग किया गया. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की मदद से जिले में विज्ञान और तकनीक के बेहतरीन इस्तेमाल से एक कांकरेज नस्ल की गाय ने गीर नस्ल की बछिया को जन्म दिया है. वैज्ञानिकों ने इस सफलता को नस्ल सुधार और दूध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में कदम बताया है.
गुजरात के कृषि एवं पशुपालन मंत्री जीतूभाई वाघाणी ने प्रेस कांफ्रेंस में मीडिया को इस सफलता की जानकारी दी. ये उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे बेहतर नस्ल के पशुओं को तेजी से तैयार करने का रास्ता खुला है. पशुपालन क्षेत्र में इसे तकनीक और विज्ञान का बड़ा कदम माना जा रहा है. ये प्रयोग गुजरात पशुधन विकास बोर्ड के तहत अमरेली में संचालित एम्ब्रियो ट्रांसफर लैब में किया गया, जिसमें राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड ने भी सहयोग दिया.
कम दूध देने वाली गायें भी बनेंगी काम की
आईवीएफ तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कम दूध देने वाली गायों का भी बेहतर उपयोग किया जा सकता है. इन गायों को सरोगेट के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इसका मतलब ये है कि जिन गायों से दूध कम मिलता है, उनकी कोख में अच्छी नस्ल के पशु का भ्रूण डालकर बछड़े तैयार किए जा सकते हैं. इससे पशुपालकों को पशुओं से ज्यादा फायदा मिलेगा और अच्छी नस्ल के पशुओं की संख्या तेजी से बढ़ेगी.
एक गाय से 7 नहीं, 100 बछड़े तक संभव
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सामान्य तौर पर एक गाय अपने जीवनकाल में लगभग 7 से 8 बछड़ों को ही जन्म दे पाती है. लेकिन आईवीएफ और एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक के इस्तेमाल से एक ही उच्च नस्ल के पशु से करीब 100 बछड़े-बछियां तैयार किए जा सकते हैं. यह तकनीक पशुपालन के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि इससे कम समय में ज्यादा संख्या में उन्नत नस्ल के पशु तैयार किए जा सकते हैं. इससे डेयरी उद्योग को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है.
आगे 30 गायों में होगा तकनीक का इस्तेमाल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस सफलता के बाद प्रयोगशाला में मौजूद लगभग 30 अन्य गायों में भी इसी आईवीएफ तकनीक के जरिए उच्च नस्ल के भ्रूण प्रत्यारोपित करने की योजना बनाई गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर अपनाई जाती है, तो पशुपालन का भविष्य और मजबूत हो सकता है. अच्छी नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ने से दूध उत्पादन में बढ़ोतरी होगी और पशुपालकों की आय भी बेहतर हो सकेगी. कुल मिलाकर, आईवीएफ और एम्ब्रियो ट्रांसफर जैसी आधुनिक तकनीकें पशुपालन क्षेत्र में नई उम्मीद बनकर सामने आ रही हैं. आने वाले समय में यह तकनीक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और डेयरी क्षेत्र को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकती है.