धान खरीद की लचर व्यवस्था पर सियासत गरमाई, सीएम और पूर्व सीएम के बीच बयानबाजी.. किसानों के लिए ये बदलाव जरूरी

Paddy Purchase: नवीन पटनायक ने सरकार के उस फैसले पर भी सवाल उठाए, जिसमें 800 रुपये प्रति क्विंटल की इनपुट सब्सिडी को प्रति किसान 150 क्विंटल तक सीमित कर दिया गया है. उन्होंने इसे भरोसे का खुला उल्लंघन बताया और कहा कि इससे ज्यादा उत्पादन करने वाले किसानों को सजा मिल रही है, जो चुनावी वादों के खिलाफ है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 10 Feb, 2026 | 12:36 PM

Odisha News: ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (बीजेडी) अध्यक्ष नवीन पटनायक ने राज्य में चल रही खरीफ धान खरीद व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि सरकारी मंडियों में पूरी व्यवस्था फेल हो चुकी है और किसान भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं. पटनायक ने कहा कि यह संकट प्रशासनिक लापरवाही और भाजपा सरकार द्वारा 2024 के चुनावी वादों को पूरा न करने का नतीजा है.

उन्होंने ‘कटनी-छटनी’ की समस्या को किसानों की सबसे बड़ी परेशानी बताया और आरोप लगाया कि मंडियों में प्रति क्विंटल 5 से 7 किलो या उससे ज्यादा धान की अवैध कटौती की जा रही है. यह कटौती नमी या गुणवत्ता के नाम पर हो रही है, जिसमें मिलर्स और स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत का भी आरोप लगाया गया है. पटनायक ने कहा कि चुनाव के दौरान एमएसपी बढ़ाने और कटनी-छटनी  खत्म करने का वादा किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है.

इनपुट सब्सिडी को लेकर उठाया मुद्दा

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नवीन पटनायक ने सरकार के उस फैसले पर भी सवाल उठाए, जिसमें 800 रुपये प्रति क्विंटल की इनपुट सब्सिडी  को प्रति किसान 150 क्विंटल तक सीमित कर दिया गया है. उन्होंने इसे भरोसे का खुला उल्लंघन बताया और कहा कि इससे ज्यादा उत्पादन करने वाले किसानों को सजा मिल रही है, जो चुनावी वादों के खिलाफ है. पटनायक ने मंडियों में अव्यवस्थाओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि धान उठान की रफ्तार बेहद धीमी है, जिससे किसानों को कड़ाके की ठंड में रातभर अपनी फसल की रखवाली करनी पड़ रही है.

48 घंटे में डीबीटी के जरिए भुगतान का वादा

उन्होंने पत्र में लिखा कि मंडियों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, टोकन सिस्टम की विफलता और भुगतान में देरी ने किसानों को आंदोलन के कगार पर पहुंचा दिया है. सरकार ने 48 घंटे में डीबीटी के जरिए भुगतान का वादा किया था, लेकिन कई मामलों में इसमें हफ्तों लग रहे हैं. पटनायक का आरोप है कि इन देरी और मनमानी कटौतियों के चलते कर्ज में डूबे किसान मजबूरी में अपनी फसल निजी व्यापारियों और मिलर्स को एमएसपी से काफी कम दाम पर बेचने को मजबूर हो रहे हैं.

‘कटनी-छटनी’ को खत्म करने की सलाह

नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री से मांग की कि ‘कटनी-छटनी’ को खत्म करने के लिए विशेष निगरानी टीमें  तैनात की जाएं, इनपुट सब्सिडी पर लगाई गई 150 क्विंटल की सीमा हटाई जाए, धान खरीद के 48 घंटे के भीतर डीबीटी के जरिए किसानों को भुगतान सुनिश्चित किया जाए और खुले में रखे गए धान समेत 100 फीसदी उठान 72 घंटे के अंदर किया जाए.  उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो किसानों के पास राज्यभर में आंदोलन तेज करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा. पटनायक ने उम्मीद जताई कि सरकार सिर्फ बयानबाजी से ऊपर उठकर किसानों से किए गए वादों को पूरा करेगी.

 

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Published: 10 Feb, 2026 | 12:09 PM

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