World Pulses Day: दालें कैसे बन गईं ‘गरीबों का सुपरफूड’? जानें सेहत से लेकर खेती तक का पूरा खेल

Pulses Day 2026: हर साल 10 फरवरी को मनाया जाने वाला विश्व दाल दिवस हमें याद दिलाता है कि दालें सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि सेहत, सस्ती पोषण व्यवस्था और टिकाऊ खेती की रीढ़ हैं. कम कीमत में भरपूर प्रोटीन देने वाली दालें करोड़ों लोगों की थाली और किसानों की आमदनी दोनों को मजबूत बनाती हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 10 Feb, 2026 | 11:36 AM

World Pulses Day 2026: हर साल 10 फरवरी को विश्व दाल दिवस (World Pulses Day) मनाया जाता है. इसे साल 2019 में संयुक्त राष्ट्र ने शुरू किया था. इसका मकसद लोगों को यह समझाना है कि दालें सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं हैं, बल्कि सेहत, खेती और भविष्य तीनों के लिए बहुत जरूरी हैं. आज के दौर में जब महंगाई बढ़ रही है, खाने-पीने की चीजें महंगी हो रही हैं और बीमारियां भी बढ़ रही हैं, तब दालें एक सस्ता और फायदेमंद विकल्प बनकर सामने आती हैं.

आखिर दालें होती क्या हैं?

दालें असल में फलीदार पौधों से निकलने वाले बीज होते हैं, जिन्हें हम रोज अपने खाने में इस्तेमाल करते हैं. जैसे मसूर, चना, अरहर, मूंग, मटर और राजमा. इन्हें खासतौर पर खाने के लिए ही उगाया जाता है, न कि तेल या पशुओं के चारे के लिए. दालों में प्रोटीन, फाइबर, आयरन और जरूरी मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जबकि इनमें चर्बी बहुत ही कम होती है. यही वजह है कि दालें सेहत के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती हैं.

‘गरीब आदमी का प्रोटीन’

शरीर को मजबूत रखने के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी होता है. लेकिन मांस, मछली या अंडा हर किसी के लिए रोज खाना आसान नहीं होता, क्योंकि ये चीजें महंगी भी होती हैं. ऐसे में दालें सस्ता और भरोसेमंद प्रोटीन देती हैं. शाकाहारी लोगों के लिए तो ये सबसे बेहतरीन विकल्प हैं. आपको बता दें कि, 100 ग्राम मसूर दाल में करीब 9 ग्राम प्रोटीन मिल जाता है. कम दाम में अच्छा पोषण मिलने की वजह से ही दालों को ‘गरीबों का प्रोटीन’ कहा जाता है.

खाने के साथ-साथ खेती के लिए भी फायदेमंद

दालें सिर्फ शरीर ही नहीं, जमीन के लिए भी अच्छी होती हैं. ये फसलें मिट्टी की ताकत बढ़ाती हैं और उसमें नाइट्रोजन जोड़ती हैं, जिससे ज्यादा खाद डालने की जरूरत नहीं पड़ती. दालों में पानी की खपत भी कम होती है, इसलिए ये बदलते मौसम में किसानों के लिए फायदेमंद फसल मानी जाती हैं. FAO (Food and Agriculture Organization) के मुताबिक, आज दुनिया में 3 अरब से ज्यादा लोग दालों पर निर्भर हैं.

दालें खाने से क्या-क्या फायदे होते हैं?

दालें शरीर को ताकत देती हैं और रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाती हैं. इनमें फाइबर ज्यादा होता है, जिससे पेट साफ रहता है और वजन भी कंट्रोल में रहता है. दालें हार्ट को हेल्दी रखती हैं और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करती हैं. डायबिटीज के मरीजों के लिए भी दालें अच्छी मानी जाती हैं. साथ ही, इनमें मौजूद पोषक तत्व कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद करते हैं.

दालें खाने के आसान और स्वादिष्ट तरीके

दालें सिर्फ दाल-चावल तक सीमित नहीं हैं. आप राजमा-चना की सब्जी, खिचड़ी, दाल का सूप, सलाद या भुना चना जैसे हेल्दी स्नैक्स भी बना सकते हैं. ये स्वाद में भी अच्छे होते हैं और सेहत के लिए भी.

विश्व दाल दिवस हमें यह याद दिलाता है कि दालें सिर्फ खाना नहीं, बल्कि सेहत, पर्यावरण और किसानों के भविष्य से जुड़ी हैं. अगर हम अपने खाने में दालों को जगह देते हैं, तो हम खुद भी स्वस्थ रहते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बेहतर भविष्य तैयार करते हैं.

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