समुद्री मछलियों पर अल नीनो का साया, घट सकता है उत्पादन.. ऑयल सार्डिन सबसे ज्यादा प्रभावित

केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) ने चेतावनी दी है कि अल नीनो के असर से 2027 में समुद्री मछली उत्पादन घट सकता है. खासकर ऑयल सार्डिन जैसी छोटी मछलियों की संख्या कम होने की आशंका है. समुद्री हीटवेव, बढ़ते तापमान और अधिक खारेपन से मत्स्य पालन तथा कोरल रीफ पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है.

Kisan India
नोएडा | Published: 11 Jul, 2026 | 03:12 PM

Fish Production: अल नीनो का असर समुद्री मछली उत्पादन पर भी पड़ सकता है. केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) ने मछुआरों को सावधान रहने की सलाह दी है. संस्थान का कहना है कि अल नीनो के कारण साल 2027 में समुद्री मछलियों का उत्पादन घट सकता है. खासकर ऑयल सार्डिन जैसी छोटी मछलियों की संख्या में कमी आने की आशंका है.

सीएमएफआरआई के निदेशक ग्रिन्सन जॉर्ज ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इसका असर केवल प्रशांत महासागर  तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हवा और समुद्री धाराओं में बदलाव के कारण हिंद महासागर भी प्रभावित होता है. उन्होंने कहा कि ‘वॉकर सर्कुलेशन’ नामक वायुमंडलीय प्रक्रिया के जरिए प्रशांत महासागर की गर्मी हिंद महासागर तक पहुंचती है. इससे समुद्री वातावरण बदलता है और मछलियों के प्रजनन व उनकी संख्या पर नकारात्मक असर पड़ सकता है. इसी वजह से मछुआरों को पहले से सतर्क रहने की सलाह दी गई है.

छोटी समुद्री मछलियों की संख्या घट सकती है

ग्रिन्सन जॉर्ज ने कहा कि अल नीनो का असर तुरंत नहीं दिखता. प्रशांत महासागर से हिंद महासागर तक गर्मी पहुंचने में करीब 4 से 6 महीने लगते हैं. मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, अल नीनो नवंबर-दिसंबर 2026 में अपने चरम पर पहुंच सकता है और इसका असर अप्रैल-मई 2027 से दिखाई देना शुरू होगा. हालांकि, इस साल मछुआरों के लिए राहत की बात यह है कि ऑयल सार्डिन मछली की अच्छी पैदावार हो रही है और सामान्य आकार की मछलियां बड़ी संख्या में मिल रही हैं. लेकिन वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि 2027 में अल नीनो के असर से ऑयल सार्डिन समेत छोटी समुद्री मछलियों की संख्या घट सकती है.

ऑयल सार्डिन का जीवन चक्र एक साल का होता है

ऑयल सार्डिन ऐसी मछली है, जिसका जीवन चक्र एक साल का होता है. इसलिए हर साल नई मछलियों का सुरक्षित रहना और उनका प्रजनन होना बहुत जरूरी है. अगर एल नीनो के कारण इनकी संख्या कम हुई, तो अगले साल समुद्री मछली उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. सीएमएफआरआई के निदेशक ग्रिन्सन जॉर्ज ने कहा कि ऑयल सार्डिन मछली का प्रजनन मई-जून में होता है. अंडों से निकली नई मछलियां करीब चार महीने बाद मछली पकड़ने के चक्र में शामिल हो जाती हैं. लेकिन अल नीनो के कारण समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने से अंडों का लार्वा (बच्चे) में विकसित होने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. इससे नई मछलियों की संख्या कम होने का खतरा है.

ऑयल सार्डिन सबसे अधिक जलवायु-संवेदनशील प्रजाति

उन्होंने कहा कि समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने से दूसरी छोटी समुद्री मछलियां भी प्रभावित होंगी, लेकिन ऑयल सार्डिन सबसे अधिक जलवायु-संवेदनशील प्रजाति है. अगर इसकी नई पीढ़ी कम हुई, तो कुल समुद्री मछली उत्पादन  पर भी असर पड़ सकता है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मछुआरों को छोटी (जुवेनाइल) सार्डिन मछलियां पकड़ने से बचने के लिए जागरूक किया जा रहा है, ताकि मछलियों की संख्या बनी रहे. उनके अनुसार, कुल मछली उत्पादन में बहुत बड़ी गिरावट आने की संभावना नहीं है, क्योंकि दूसरी प्रजातियां कुछ हद तक इसकी भरपाई कर सकती हैं. साथ ही, ऑयल सार्डिन ऐसी प्रजाति है जो अल नीनो का असर कम होने के बाद फिर से तेजी से अपनी संख्या बढ़ाने की क्षमता रखती है.

समुद्री जीवों और मत्स्य पालन पर पड़ सकता है असर

राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में सीएमएफआरआई के निदेशक ग्रिन्सन जॉर्ज ने कहा कि 2027 के अप्रैल और मई में समुद्र में हीटवेव समुद्री सतह का तापमान बढ़ने और पानी में लवणता (खारापन) अधिक रहने की संभावना है. इसका असर समुद्री जीवों और मत्स्य पालन पर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि अगर समुद्र का तापमान लंबे समय तक अधिक बना रहा, तो कोरल रीफ (प्रवाल भित्तियां) को नुकसान हो सकता है. इससे कोरल ब्लीचिंग की समस्या बढ़ेगी और रेड स्नैपर जैसी कोरल रीफ पर निर्भर मछलियों की संख्या कम हो सकती है.

 

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