Chane Ki Kheti: चने की फसल रबी सीजन में किसानों की आमदनी का एक अहम जरिया होती है, लेकिन जनवरी-फरवरी का समय इसे सबसे नाजुक दौर में ले आता है. यही वह समय है, जब पौधों पर फूल आने शुरू होते हैं और पाला के साथ फली छेदक कीट जैसे खतरे तेज हो जाते हैं. यदि किसान इस बदलाव को समय रहते नहीं पहचानते हैं, तो फूल और छोटी फलियां झड़ने लगती हैं, पौधों की बढ़वार रुक जाती है और उत्पादन में भारी गिरावट आती है.
कृषि विशेषज्ञ की माने तो बुवाई के लगभग 40-60 दिन बाद फूल आने का चरण आता है. यह पौधों का सबसे संवेदनशील समय होता है, क्योंकि इस दौरान उन्हें पोषण और सुरक्षा की अधिक जरूरत होती है. ठंड के कारण पाला पड़ने से फूल झुलस सकते हैं और फली छेदक कीट इस समय सबसे ज्यादा सक्रिय हो जाता है. यह कीट फूल और नई फलियों में छेद कर उन्हें नष्ट कर देता है. कई किसान इसे सामान्य मौसमी प्रभाव मानकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन यही समय है जब उचित कदम उठाने से भारी नुकसान रोका जा सकता है.
फसल को इल्ली से बचाने के उपाय
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चने की फसल में कीट प्रकोप फूल आने के समय सबसे ज्यादा दिखाई देता है. इस दौरान इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी आधारित कीटनाशक काफी असरदार है, जिसे कई जगह चने एक्सप्लोड के नाम से भी जाना जाता है. इसके साथ बोरॉन और सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे जिंक और आयरन मिलाकर छिड़काव करने से ना केवल कीट पर नियंत्रण होता है बल्कि फूल झड़ने से भी बचाव मिलता है.
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छिड़काव का सही समय और तरीका
पहला छिड़काव तब करना चाहिए जब खेत में 40-50% फूल आ जाएं. इसके बाद दूसरा छिड़काव 15 दिन के अंतराल पर करें. इससे पौधों की बढ़वार बेहतर होती है, फूल ज्यादा बनते हैं और फलियों की संख्या भी बढ़ती है. एक एकड़ खेत के लिए लगभग 400 रुपये का इमामेक्टिन बेंजोएट और 300 रुपये का पोषक टॉनिक मिलाकर पानी में घोल बनाकर समान रूप से छिड़काव करना चाहिए.
सिंचाई और देखभाल
सिर्फ कीटनाशक ही काफी नहीं है. हल्की सिंचाई फूल आने से पहले करनी चाहिए ताकि पौधों को पर्याप्त नमी मिले और वे कीटों के हमले का बेहतर मुकाबला कर सकें. खेत में खरपतवार न रहने दें और नियमित निरीक्षण करते रहें ताकि किसी भी तरह के कीट प्रकोप को शुरुआती चरण में ही रोका जा सके.
समय पर उठाएं कदम
जनवरी-फरवरी में थोड़ी सी सतर्कता किसानों को बड़े नुकसान से बचा सकती है. सही समय पर पोषण, सिंचाई और कीटनाशक का इस्तेमाल कर महज 700 रुपये के निवेश में एक एकड़ खेत को इल्ली से काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यही समय है जब किसान अपनी फसल पर खास ध्यान दें क्योंकि इस फैसले से तय होगा कि इस सीजन में पैदावार बढ़ेगी या घट जाएगी.